• हरियाणा में 10 दिन में ₹7.37 बढ़े दाम

पेट्रोल-डीजल के दामों में 10 दिन में चार बार उछाल आने के सवाल को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर टाल गए। पत्रकारों ने जब उनसे यह सवाल पूछा तो टालने के अंदाज में खट्टर ने अंगुली दिखाई।

सवाल रिपीट करने पर पूर्व सीएम ने फिर अंगुली दिखाते हुए कहा-मैंने सुन लिया है, धन्यवाद। यह कहकर वो आगे बढ़ गए। खट्टर सोमवार को भिवानी में सर्व कल्याण मंच हरियाणा द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में आए थे।

वहीं, सिरसा में इनेलो सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला ने कहा-मोदी जी सत्ता में आने से पहले कहते थे कि पेट्रोल और डीजल के भाव गिरा देंगे, लेकिन अब तो आग लगा दी है।

दरअसल, हरियाणा में 10 दिन में चौथी बार तेल दाम बढ़े हैं। पेट्रोल 2.60 रुपए महंगा होकर औसतन ₹103 प्रति लीटर पहुंच गया है, जो ऑल टाइम हाई है। वहीं, डीजल 2.70 रुपए प्रति लीटर महंगा होकर ₹95.66 पर पहुंच गया है। सिरसा में पेट्रोल सबसे ज्यादा ₹104.43 प्रति लीटर है।

हरियाणा पेट्रोल पंप एसोसिएशन के प्रधान संजीव चौधरी का कहना है कि अभी दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि सरकार कुल 10 रुपए तक इसे बढ़ाना चाहती है। अभी पेट्रोल रेट कुल 7 रुपए 37 पैसे बढ़े हैं।

अभी और बढ़ेंगे पेट्रोल के दाम

हरियाणा पेट्रोल पंप एसोसिएशन के प्रधान संजीव चौधरी ने बताया कि अभी पेट्रोल-डीजल के रेट में और बढ़ोतरी होगी। हमे जानकारी मिली है कि मिडिल ईस्ट तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर ₹10 और डीजल पर ₹10 रुपए की बढ़ोत्तरी करनी है।

अभी सरकार की ओर से चार बार ही बढ़ोतरी हुई है, लेकिन आने वाले दिनों में फिर से एक या दो बार में ये तीन से चार रुपए की बढ़ोतरी कर कर सकती है। उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में होने वाली बढ़ोतरी को लेकर तैयार रहना चाहिए।

ब्लिंकिट राइडर्स का प्रदर्शन- भुगतान बढ़ाने की मांग

लगातार बढ़ती पेट्रोल कीमतों के चलते झज्जर में ब्लिंकिट राइडर्स ने विरोध प्रदर्शन किया। भुगतान बढ़ाने और ईंधन खर्च के हिसाब से उचित राशि देने की मांग को लेकर राइडर्स ने विरोध जताया। विरोध के चलते शहर में ब्लिंकिट की सेवाएं प्रभावित रहीं और कई जगह डिलीवरी बंद रहने की बात सामने आई।

राइडर्स का कहना है कि पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन प्रति ऑर्डर मिलने वाला भुगतान पहले जैसा ही है। ऐसे में दिनभर डिलीवरी करने के बाद भी खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। कई डिलीवरी साझेदारों ने आरोप लगाया कि प्रोत्साहन राशि में भी लगातार कटौती की जा रही है, जिससे उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?

इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।

अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं…

मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे।

खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी।

बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

बेस प्राइस से चार गुना तक बढ़ जाती है कीमत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर देश में ईंधन के दाम तय किए जाते हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ यानी डायनेमिक प्राइसिंग सिस्टम के तहत हर दिन सुबह 6 बजे नए रेट अपडेट करती हैं। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले तेल की कीमतों में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं, जिसे हम आसान भाषा में समझ सकते हैं:

कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस): भारत अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए बैरल के हिसाब से प्रति लीटर तेल की कीमत तय होती है।

रिफाइनिंग और कंपनियों का चार्ज: कच्चे तेल को देश की रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है। इसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का मार्जिन शामिल होता है।

केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी: रिफाइनरी से निकलने के बाद केंद्र सरकार इस पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) और रोड सेस लगाती है। यह देशभर में सभी राज्यों के लिए समान होती है।

डीलर कमीशन: तेल कंपनियां जिस रेट पर पेट्रोल पंप मालिकों (डीलर्स) को ईंधन बेचती हैं, उसमें डीलर्स का अपना निश्चित कमीशन जोड़ा जाता है, जो पेट्रोल और डीजल के लिए अलग-अलग होता है।

राज्य सरकार का वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट या लोकल सेल्स टैक्स लगाती हैं। चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें भी अलग-अलग हो जाती।