• ऑफिस में शेर-ए-पंजाब की तस्वीर लगवाई

पंजाब भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। इस मौके पर एक समागम आयोजित किया गया, जिसमें पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद उन्होंने पदभार ग्रहण किया। साथ ही महाराजा रणजीत सिंह की तस्वीर का विमोचन किया।

ढिल्लों ने कहा- आज ऐतिहासिक दिन है। महाराजा रणजीत सिंह शेर-ए-पंजाब की तस्वीर भाजपा कार्यालय में लगाई गई है। उन्होंने जो राज चलाया था, उसमें सभी को एक नजर से देखा जाता था और सबको समान माना जाता था। भारतीय जनता पार्टी 2027 में पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह वाली सरकार बनाने जा रही है।

अब सेक्टर-37 स्थित लॉ भवन में एक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी, पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़, पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह, राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, राष्ट्रीय सचिव नरेंद्र सिंह रैना, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष जय इंद्र कौर समेत भाजपा के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हैं।

अकाली दल बीजेपी के बिना कुछ नहीं था; हारे हुए को मंत्री बनाया

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सबसे पहले सुनील कुमार जाखड़ का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनकी अगुवाई में बहुत बड़ा काफिला बना। बीजेपी शुरू से ही बहुत मजबूत पार्टी रही है। अकाली दल बीजेपी के बिना कुछ नहीं था। चुघ साहब बता रहे थे कि बादल साहब 18 सीटों के आगे 19 से शुरुआत करते थे। वह कहते थे कि 18 सीटें तो उनकी ही हैं।

बिटटू ने कहा कि जाखड़ साहब ने उस समय सरकार के सामने मजबूती से अपनी बात रखी, जब नई सरकार आई थी। हम दूसरी पार्टी से इस पार्टी में आए हैं। अश्वनी शर्मा तीन बार प्रधान रहे, लेकिन पार्टी ने वर्किंग प्रधान लगा दिया। इसके बावजूद वह काम करते रहे।

हमारे पास नेताओं की कमी नहीं है। जहां आम आदमी पार्टी वाले अपनी राजधानी बताते हैं, वहीं पार्टी ने केवल सिंह ढिल्लों को अपनी कुर्सी पर बैठाया है। कई बार गुस्से में बात नहीं बनती, वह बात प्यार से हो जाती है। हमारे पास राज्यसभा में पंजाब से सात सदस्य हैं, जो उनकी नालायकी की वजह से हैं,

क्योंकि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया। मेरे जैसे व्यक्ति को दिल्ली में बैठे हुए 17 साल हो गए, लेकिन मौका नहीं मिला। मुझे हारने के बावजूद मंत्री बना दिया गया। मेरी पहली पार्टी ने तो मुझे सदस्य भी नहीं बनाया। अब पंजाब में डबल इंजन सरकार लाने की जरूरत है।

पंजाब सरकार के जाने का काउंटडाउन शुरू

बीजेपी महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि आज से पंजाब सरकार के जाने का काउंटडाउन शुरू हो गया है। भगवंत मान के शासनकाल में 22 थानों पर हमले हुए हैं। पुलिस मुख्यालय पर हमला हुआ है। आज पंजाब में रंगदारी के कॉल आ रहे हैं। बम ब्लास्ट हो रहे हैं। 2027 में भगवंत मान की सरकार जाएगी और मोदी की सरकार आएगी। साथ ही पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह जैसा राज स्थापित किया जाएगा। केवल सिंह ढिल्लों कोई नेता नहीं, बल्कि एक इंस्टीट्यूशन हैं। भगवंत मान आईएसआई के । पंजाब में हमलों बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया।

तरुण चुघ ने कहा कि “युद्ध नशों के विरुद्ध” दो बार असफल हो चुका है। नशों के खिलाफ लड़ने वाला सेनापति ही नशे में धुत है, तो वह क्या लड़ेगा। उन्होंने कहा कि अकेले-अकेले बीजेपी नेताओं का टेस्ट करवा लो।

कट्‌टर ईमानदार पार्टी का हुआ पतन

जाब भाजपा के कार्यकारी प्रधान अश्वनी शर्मा ने कहा, “पंजाब दोराहे पर खड़ा है। यह चुनौतीपूर्ण समय है। लोग बीजेपी को आशा की नजर से देख रहे हैं। कांग्रेस लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। उसका इतिहास भ्रष्टाचार से भरा रहा है। जबकि ‘कट्टर ईमानदार’ के नाम पर चलने वाली सरकार का चार साल में राजनीतिक चकाचौंध के बीच पतन हुआ है।

आज लोग बीजेपी की तरफ देख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुए कामों की तरफ देख रहे हैं।जब मुझे वर्किंग प्रधान लगाया गया तो कई फोन आए। मैंने कहा कि पार्टी अगर झाड़ू लगाने की ड्यूटी भी लगा दे, तो वह भी कर दूंगा। इन्हें तो जनता ने उखाड़ फेंकना है। साढ़े 12 बजे गए । मुख्यमंत्री आवास तक आवाज पहुंचानी है। अब वह जाग गए होंग।

नियुक्त होते ही फिल्ड में हुए एक्टिव

केवल सिंह ढिल्लों पंजाब बीजेपी के पहले जाट सिख प्रधान हैं। वह दो दशक से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय हैं। लंबे समय तक वह कांग्रेस में रहे और विधायक भी रह चुके हैं। उद्योग जगत में भी उनकी पहचान रही है। पद संभालने के बाद से वह सक्रिय हो गए हैं। पहले चरण में उन्होंने बीजेपी नेताओं के घर-घर जाकर उनसे मुलाकात की।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उठा दिया सवाल

जैसे ही केवल ढिल्लों के नाम का ऐलान हुआ, उसके तुरंत बाद इस नियुक्ति पर उनके ही करीबी माने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने मीडिया हाउस से बातचीत में कहा, “केवल ढिल्लों मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन भाजपा अध्यक्ष के रूप में सही विकल्प नहीं हैं।”

उन्होंने इस फैसले से खुद को अलग करते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने ढिल्लों के नाम की कोई सिफारिश नहीं की थी। उनका मानना है कि जाखड़ को हटाकर ढिल्लों को लाना सही फैसला नहीं है और पार्टी को ऐसे नेता की जरूरत थी जो संगठन को आगे ले जा सके।

वहीं पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा पंजाब में “नेतृत्व आउटसोर्स” करने को मजबूर है क्योंकि उसके पास अपने खेमे का कोई योग्य चेहरा नहीं है। लगातार दूसरी बार (पहले सुनील जाखड़ और अब ढिल्लों) किसी पूर्व कांग्रेसी को कमान दी गई है। आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहले उन्हें हारा हुआ नेता बताया, लेकिन बाद में कहा कि वह अभी उनका काम देखकर ही टिप्पणी करेंगे।

पंजाब BJP ने यह फैसला क्यों लिया, 4 वजहें

चुनाव से पहले सिख चेहरा जरूरी

पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यहां सिख चेहरे की अगुआई जरूरी थी। पंजाब में सिख सेंटिमेंट्स बहुत ज्यादा रहते हैं। ऐसे में सिख चेहरे को प्रधान की कुर्सी सौंपने से भाजपा को उम्मीद है कि सिख उनके प्रति आकर्षित होंगे।

अभी 2 हिंदू चेहरों के पास थी अगुआई

पंजाब में भाजपा के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ और वर्किंग प्रधान अश्वनी शर्मा थे। ऐसे में दोनों ही बड़े पदों पर हिंदू चेहरे थे। भाजपा नहीं चाहती थी कि पंजाब में चुनाव के दौरान भी उन पर सिर्फ हिंदुओं की पार्टी की ठपा लगा रहे। इस फैसले से ये मैसेज जाए कि भाजपा सिख चेहरों को आगे नहीं लाना चाहती।

सुनील जाखड़ इस्तीफा दे चुके थे

प्रधान सुनील जाखड़ 2024 में ही पद से इस्तीफा दे चुके थे। उस दौरान भाजपा 13 में से एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। इसके बाद जाखड़ काफी टाइम तक एक्टिव पॉलिटिक्स से भी दूर रहे। मगर, कुछ समय से वह एग्रेसिव ढंग से पार्टी के लिए काम कर रहे थे। फिर भी जातीय समीकरण साधने की चुनावी मजबूरी के चलते भाजपा को उन्हें हटाना पड़ा।

कैप्टन अमरिंदर को भी खुश किया

पंजाब के 2 बार मुख्यमंत्री रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह की लगातार शिकायत थी कि भाजपा में आने के बाद उनसे पंजाब को लेकर कुछ नहीं पूछा जाता। अब भाजपा ने उनके ही करीबी नेता को पार्टी की कमान सौंप दी है। ऐसे में अब कैप्टन भी चुनाव में खुलकर काम करते दिखाई दे सकते हैं।