• यूथ को इसकी जानकारी होना जरूरी

राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 9वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब में आपातकाल के दौर के बारे में एक सेक्शन शामिल किया है। इसको लेकर चंडीगढ़ में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि NCERT ने सही किया है क्योंकि ऐसे काले कारनामे के बारे में देश की अगली पीढ़ी की जानना चाहिए ताकि दोबारा ऐसा न हो। बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी इस फैसला का समर्थन किया है। वहीं कांग्रेस ने इस पर कहा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जहां भी सत्ता में होती है, वहां वह अपने हिसाब से इतिहास को पेश करने की कोशिश करती है।

इंडिया एंड बियॉन्ड’ में इमरजेंसी पर एक सेक्शन शामिल किया है। अब इसी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। बीजेपी के तमाम नेता जहां इसके लिए कांग्रेस को कोसते हुए NCERT की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस के नेता इसे लेकर बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं।

1. इमरजेंसी को पाठ्यक्रम में शामिल करने का समर्थन

​केंद्रीय मंत्री ने NCERT द्वारा स्कूली किताबों में आपातकाल (1975 की इमरजेंसी) से जुड़े घटनाक्रमों को शामिल करने या उसे पढ़ाए जाने के फैसले का खुलकर बचाव किया।
उन्होंने आपातकाल को देश के इतिहास का एक “काला कारनामा” बताया। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ियों (भविष्य की पीढ़ी) को यह जानना, पढ़ना और समझना बेहद जरूरी है कि उस दौर में क्या हुआ था।

​2. ‘A’ टीम और ‘B’ टीम का जिक्र

​जब एक पत्रकार ने उनसे इस फैसले को लेकर राजनीतिक दलों के विरोध या किसी ‘प्लान बी’ के बारे में सवाल पूछा, तो उन्होंने विरोध करने वालों पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि देश में कुछ ऐसे लोग या राजनीतिक दल हैं, जिनके मन में देश की प्रगति और विकास को लेकर एक तरह की कुंठा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के हर फैसले का विरोध करने वाले लोग अलग-अलग रूप बदलकर सामने आते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इनमें से कोई ‘A’ टीम (मुख्य विपक्षी दल) बनकर आता है, तो कोई ‘B’ टीम (उन्हें परोक्ष रूप से समर्थन देने वाले दल या संगठन) बनकर एजेंडा चलाता है।

बयान से ये दिया मैसेज

​धर्मेंद्र प्रधान के इस बयान का सीधा मैसेज यह है कि सरकार इतिहास के उन हिस्सों (जैसे आपातकाल) को नई पीढ़ी के सामने लाने के पक्ष में है जिसे वह कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार की बड़ी भूल मानती है, और इस पर राजनीति करने वालों को वे देश के विकास में बाधक या ‘कुंठित’ मानसिकता का हिस्सा मानते हैं।