हरियाणा यूनिवर्सिटीज कॉन्ट्रैक्चुअल टीचर्स एसोसिएशन (हुकटा) ने नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से रोहतक में मुलाकात की। हुकटा ने आगामी मानसून सत्र में राजकीय विश्वविद्यालयों के करीब 1400 अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवा-सुरक्षा का मुद्दा उठाने की मांग की। हुड्डा ने आश्वासन दिया कि सरकार से बातचीत के साथ विधानसभा में भी शिक्षकों की आवाज उठाई जाएगी।
हुकटा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. विजय मलिक और डॉ. सुमन रंगा ने बताया कि 2024 में सरकार ने राजकीय महाविद्यालयों के एक्सटेंशन लेक्चरर्स के लिए सेवा-सुरक्षा कानून पारित किया था। उस समय विश्वविद्यालयों के अनुबंधित शिक्षकों को भी समान सुरक्षा देने की मांग उठी थी।
डॉ. मलिक के अनुसार इन शिक्षकों की नियुक्तियां यूजीसी नेट, पीएचडी जैसी निर्धारित योग्यताओं, विज्ञापन और चयन समितियों के माध्यम से हुई हैं। कई शिक्षक 10 से 15 वर्षों से पूर्ण कार्यभार के साथ सेवाएं दे रहे हैं, फिर भी नियमित भर्ती होने पर नौकरी जाने का खतरा बना रहता है।
उन्होंने कहा कि अनेक अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर पिछले 5 से 7 वर्षों से 57,700 रुपये के सातवें वेतन आयोग के प्रारंभिक वेतन पर कार्य कर रहे हैं और नियमित वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिल रहा।
हुकटा ने सरकार से मांग की कि हरियाणा राज्य विश्वविद्यालय अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसर (सेवा सुरक्षा) अधिनियम-2026 के प्रस्ताव को मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश कर पारित किया जाए। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वह नियमित भर्ती का विरोध नहीं करता, बल्कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए पहले सेवा-सुरक्षा चाहता है।