• प्रेमानंद महाराज से मिले हरियाणा डिप्टी स्पीकर

हरियाणा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण लाल मिड्‌ढा ने वृंदावन जाकर प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। कृष्ण मिड्‌ढा ने इस मुलाकात का एक वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है।

कृष्ण मिड्‌ढा ने प्रेमानंद महाराज से धर्म और करुणा के महत्व और राजनीति को साधना बनाने को लेकर सवाल पूछा। इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि निर्णय लेते हुए हमेशा धर्म देखना चाहिए। करुणा से पक्षपात होता है।

वहीं, साधना के सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि समाज को सुख पहुंचाना ही सबसे बड़ी साधना है। भगवान का नाम जपते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करें।

पूछा- निर्णय में धर्म-करुणा का महत्व

डिप्टी स्पीकर कृष्ण मिड्‌ढा ने बुधवार (28 जनवरी) को वृंदावन जाकर प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए। मिड्‌ढा ने सवाल किया कि मुझे बहुत से निर्णय लेने होते हैं, निर्णय लेते समय में धर्म और करुणा को कैसे प्राथमिकता दूं?
प्रेमानंद बोले- करुणा से पक्षपात होगा: प्रेमानंद महाराज ने कहा कि निर्णय में करुणा को प्राथमिकता नहीं देनी चाहिए। निर्णय में धर्म देखा जाता है, करुणा नहीं। करुणा में पक्षपात होता है। अगर करुणा आ गई, तो पक्षपात ले लेगी। जैसे, यदि आपको निर्णय करना है, और आपका पुत्र अपराधी है, जबकि शत्रु का पुत्र निरपराध है, तो आपको करुणा नहीं, धर्म के अनुसार शत्रु के पुत्र को मुक्त करना होगा और अपने पुत्र को दंड देना होगा।

कर्तव्य का पालन करते हुए ठीक निर्णय करें

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि जब निर्णय लेना हो, तो कर्तव्य और धर्म को आगे रखकर निर्णय लिया जाता है। अगर हम करुणा को आगे ले आए, तो पक्षपात हो जाएगा, और फिर हानि हो जाएगी। उसी प्रकार, जो हमारा पद है, हमारा जो अधिकार है, हम उस समाज के व्यक्ति के साथ अपने कर्तव्य का पालन करते हुए ठीक निर्णय करें। अगर वह दंडनीय है, तो हम उसे दंडित करें। अन्यथा, यदि वह दंडनीय नहीं है, तो चाहे वह शत्रु पक्ष का ही क्यों न हो, उसे दंड देने का विचार नहीं करेंगे, बल्कि हम उसका सहयोग करेंगे, यह भाव रखना होगा।

राजनीति साधना बन जाए, इसके लिए क्या करें

प्रेमानंद महाराज से डिप्टी स्पीकर ने सवाल किया कि “राजनीति ही मेरी साधना बन जाए, इसके लिए क्या करें?” इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि “नाम जप करते हुए जो आपको कर्तव्य मिला है, वही आपकी भक्ति है। ऐसा मानकर समाजप्रिय बनिए, समाज को सुख पहुंचाइए। जो सरकार, सेवा और संविधान देती है, उसके अनुसार समाज को सुख पहुंचाइए। यही सबसे बड़ी साधना है। भगवान का नाम जप जरूर चलना चाहिए। नाम जप करते हुए अपने कर्तव्य का पालन करो।