• नहीं पहुंचे सभी पार्षद, पिछली बार ADC हुए थे बीमार
  • अब अगली तारीख का इंतजार

हरियाणा : ब्रेकिंग न्यूज : पानीपत जिला परिषद चेयरपर्सन का चुनाव एक बार फिर टल गया है। दरअसल, 16 सदस्यों में से 11 के पहुंचने पर ही कोरम पूरा होना था। लेकिन 11 पार्षद भी आज के चुनाव में नहीं पहुंचे। इनमें से पहले 9 पहुंचे थे। फिर दो और बीच में चले गए। निर्धारित समय तक भी इंतजार करने के बाद कोरम पूरा न होने पर अधिकारियों द्वारा चुनाव को टाले जाने की घोषणा की गई।

बता दें कि पिछला बार चुनाव अधिकारी ADC डॉ. पंकज यादव बीमार हो गए थे, जिस कारण चुनाव टल गया था। अब अगली तारीख का इंतजार रहेगा।

गौरतलब है कि BJP ने सुदेश रानी को प्रत्याशी बनाया है, जबकि दूसरे छौर से अन्नू मलिक भी मैदान में थी। लेकिन गुटबाजी में क्रॉस वोटिंग के आसार बने हुए थे।

सूत्रों के अनुसार, संगठन एक नाम तय नहीं कर सका, जो जीत सके। सुदेश रानी को कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार का आशीर्वाद प्राप्त है। 26 जनवरी को थर्मल में पंवार की 12 पार्षदों के साथ हुई बैठक में अधिकांश ने वार्ड 7 से पार्षद सुदेश को समर्थन दिया था। सुदेश रानी के पति सुरेंद्र आर्य आरएसएस के तृतीय वर्ग प्रशिक्षक बताए जाते हैं।

BJP के भी 2 वोट अन्नू को मिलने के आसार

वार्ड 3 से पार्षद अन्नू मलिक समर्थक 9 वोट का दावा कर रहे हैं। अन्नू मलिक समर्थक 16 में से 9 पार्षदों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। इस स्थिति में भाजपा के पास 7 वोट रह जाएंगे। अन्नू मलिक का बैकग्राउंड कांग्रेसी रहा है। उनके देवर अनिल मलिक कांग्रेस के नेता हैं।

यह माना जा रहा है कि अगर भाजपा की ओर से ज्योति शर्मा को प्रत्याशी बनाया जाता, तो सुरेश आर्य के समर्थन से ज्योति की जीत हो जाती। सूत्रों ने बताया कि वोटिंग में भाजपा पार्षदों के दो वोट अन्नू को मिल सकते हैं। बैठक का समय सुबह 11 बजे जिला सचिवालय में तय किया गया है। 16 सदस्यों में से 11 के पहुंचने पर ही कोरम पूरा होगा।

तीन साल में 2 चेयरपर्सन हटी, अब कुर्सी खाली

पानीपत जिला परिषद की चेयरपर्सन की कुर्सी पिछले 3 साल में 2 बार भरी। पहली चेयरपर्सन ज्योति शर्मा भाजपा के समर्थन से बनी थी, जबकि दूसरी बार काजल देशवाल चेयरपर्सन बनने के बाद भाजपाई बन गई थी। दोनों ही लंबे समय तक कुर्सी पर नहीं टिक पाई, अब चेयरपर्सन की कुर्सी खाली है।

पहले ज्योति, फिर काजल बनी चेयरपर्सन

ज्योति शर्मा 27 दिसंबर 2022 को भाजपा के समर्थन से जिला परिषद चेयरपर्सन चुनी गई थीं। लेकिन उनके खिलाफ लामबंदी शुरू हो गई। 6 मार्च 2024 को उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उस समय 17 में से 13 पार्षद उनके खिलाफ खड़े थे। इसके बाद 14 जून 2024 को इन्ही लामबंद पार्षदों के समर्थन से काजल देशवाल सर्वसम्मति से चेयरपर्सन बन गई, लेकिन सिर्फ एक साल ही इस पद पर रह पाई।

जाति प्रमाणपत्र फर्जी साबित होने पर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।