• फेसबुक पर हुड्डा के साथ फोटो हटाई, मोबाइल स्विच ऑफ, कांग्रेस से जता चुके नाराजगी

हरियाणा राज्यसभा चुनाव के बाद झज्जर के बादली से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स के तेवर बदल गए हैं। उन्होंने फेसबुक एकाउंट से रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा के साथ लगी फोटो हटा दी है। मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है। चुनाव के तुरंत बाद उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में काम की कद्र नहीं।

वत्स पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान उनका वोट कैंसिल होने की चर्चा चली। तब 17 मार्च को हुड्डा ने खुद मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि वत्स का वोट कैंसिल नहीं हुआ है, उन्होंने पार्टी प्रत्याशी को वोट दिया है। तब वत्स भी साथ ही खड़े थे। हालांकि उसके बाद से वो सामने नहीं आए हैं।

कुलदीप पिछले तीन दिनों से अपने हलके में नजर भी नहीं आए हैं। दैनिक भास्कर एप ने उनका पक्ष जानने के लिए मोबाइल पर कई बार संपर्क किया, लेकिन हर बार स्विच ऑफ का मैसेज आया। इस बीच उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

जानिए राज्यसभा चुनाव के बाद से क्या-क्या हुआ…

9 मार्च को सीएलपी बैठक से गैरहाजिर

राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति बनाने के लिए 9 मार्च को चंडीगढ़ में सीएलपी लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मीटिंग में कुलदीप वत्स नहीं गई थे। हालांकि तब पार्टी ने ही स्पष्ट किया कि वत्स के भतीजे की शादी की वजह से वो नहीं गए।
कांग्रेस की बाड़ाबंदी से दूर रहे

विधायक बचाओ मिशन के तहत 13 मार्च को कांग्रेस के 31 विधायक हिमाचल भेज दिए गए। इन विधायकों में भी वत्स नहीं थे। तब उन्होंने तर्क दिया कि 15 मार्च को भतीजों की शादी की रिसेप्शन रखा गई है।

राज्यसभा चुनाव से एक दिन पहले सीएम आए

राज्यसभा चुनाव से एक दिन पहले यानी 15 मार्च को CM नायब सैनी विधायक वत्स के भतीजों को आशीर्वाद देने पहुंचे। वत्स ने खुद पूरे जोश से उनकी मेहमान नवाजी की। तभी से चर्चा थी कि विधायक की भाजपा से करीबी बढ़ रही है।

वोटिंग के लिए देर से पहुंचे, दीपेंद्र लेकर आए

16 मार्च को कांग्रेस के सभी विधायक सुबह भूपेंद्र सिंह हुड्डा के चंडीगढ़ आवास पहुंच गए थे। वत्स वहां नहीं पहुंचे। वोटिंग शुरू हो चुकी थी, तब तक भी वत्स नहीं आए। उस दिन दैनिक भास्कर एप ने वत्स से संपर्क किया तो उन्होंने कहा था कि अभी जाम में फंसे हैं। बाद में रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा उन्हें लेकर विधानसभा पहुंचे। हालांकि उन्होंने कोई मीडिया से बात नहीं की।

वोटिंग के बाद कहा-कांग्रेस जीत रही है

16 मार्च को ही वोटिंग के दौरान मीडिया के सामने आए वत्स ने कहा कि कांग्रेस जीत रही है। कुछ लोग वैसे ही धक्का कर रहे हैं। हालांकि तब उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। वह तब तक हुड्डा के साथ ही नजर आ रहे थे।

वोट कैंसिल का आरोप लगा तो हुड्डा ने सफाई दी

राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस के 5 विधायकों ने क्रॉस वोट किया, जबकि 4 के वोट कैंसिल हो गए। सोशल मीडिया पर वोट कैंसिल होने वाले लिस्ट वायरल हुई, जिसमें वत्स का नाम था। 17 मार्च को भूपेंद्र हुड्डा ने मीडिया के सामने खुद कहा कि यह अफवाह है कि वत्स का वोट कैंसिल हुआ। वत्स ने पार्टी प्रत्याशी को वोट दिया है।

कांग्रेस के प्रति जाहिर की थी नाराजगी

वोटिंग के दिन ही एक निजी न्यूज चैनल पर बातचीत में कुलदीप वत्स ने कांग्रेस के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी मेहनती कार्यकर्ताओं की कद्र नहीं करती, जबकि चापलूस लोगों को ज्यादा महत्व दिया जाता है। उनके इस बयान के बाद से ही उनके कांग्रेस से दूरी बनाने के संकेत मिल रहे हैं।

दफ्तर खाली, कोई कुछ बोलने वाला नहीं

झज्जर अनाज मंडी में विधायक वत्स का दफ्तर वीरवार को खाली दिखा। दैनिक भास्कर एप की टीम जब यहां पहुंची तो कोई नहीं था। हालांकि दफ्तर खुला था। दफ्तर में अभी भी हुड्डा के साथ बड़े-बड़े होर्डिंग व फोटो लगी हैं। विधायक कहां हैं और नाराजगी क्यों है, इस पर कोई बोलने वाला नहीं है।

भाई बोले- जल्द लोगों के बीच होंगे विधायक

हालांकि, कुलदीप वत्स के बड़े भाई ईश्वर वत्स ने सामने आकर स्थिति साफ करने की है। उन्होंने कहा कि कुलदीप वत्स जल्द ही मैदान में लौटेंगे और पहले की तरह सक्रिय नजर आएंगे। उन्होंने कहा कि हलके के लोगों की सेवा करना उनके पूरे परिवार का मुख्य उद्देश्य रहा है और आगे भी इसी भावना के साथ काम जारी रहेगा।

कुलदीप को कांग्रेस का सच्चा सिपाही बताया

कुलदीप वत्स के समर्थन में इलाके के कई स्थानीय नेता खुलकर सामने आए हैं। जहांगीरपुर से सरजीत गुलिया ने कहा कि कुलदीप वत्स “कांग्रेस का सच्चा सिपाही” है और उनके ऊपर लग रहे आरोप निराधार हैं।

दो बार के विधायक, दोनों बार धनखड़ को हराया

कुलदीप वत्स लगातार दूसरी बार विधायक बने हैं। साल 2014 में वत्स ने पहले चुनाव निर्दलीय लड़ा लेकिन भाजपा के दिग्गज जाट नेता ओमप्रकाश धनखड़ से हार गए। उसके बाद कांग्रेस के टिकट पर 2019 और 2024 में वत्स ने धनखड़ को लगातार दो बार हराया। 51 वर्षीय वत्स ने नामांकन में पत्नी का बिजनेस दिखाया। परिवार कारोबारी है। शपथ पत्र में 7 क्रिमिनल केस दिखाए थे।