• हिमाचल में पार्टी का प्लेट खर्च कराया, राज्यसभा चुनाव में वोट BJP को दिया

हरियाणा राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोट करने के मामले में कांग्रेस में घमासान तेज हो गया है। अब कांग्रेस के भीतर ही उन 5 विधायकों को पार्टी से बाहर करने की मांग उठने लगी है, जिन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी को वोट दिया। सिरसा से विधायक गोकुल सेतिया ने कहा- इन विधायकों ने होटल में कांग्रेस की प्लेट खाई और वोट BJP को दिया।

सेतिया ने कहा- कांग्रेस के अपनी सरकार गिरने का तो डर है नहीं, फिर 5 विधायकों को पार्टी से निकालकर सख्त संदेश जरूर देना चाहिए। साथ ही उन 4 विधायकों का नाम भी सामने लाने चाहिए, जिनके वोट कैंसिल हुए।

क्रॉस वोट में नाम आने पर एक दिन पहले ही हथीन विधायक मोहम्मद इसराइल ने कहा था- मैंने अपने मन की कर ली, अब कांग्रेस अपने मन की करके देख ले। मैं कांग्रेस से अगला चुनाव नहीं लड़ूंगा।

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सवाल: क्रॉस वोट करने वाले विधायकों पर कांग्रेस को क्या एक्शन लेना चाहिए?
विधायक: उनको एक तरफ करें, कौन सा सरकार गिर रही है। अभी 37 हैं तो 32 हो जाएंगे। बुरे से बुरा सोचकर देख लो, वक्त बदलता है। मान लेंगे बुरा समय चल रहा है। कै सरकार ढह ज्यां गी, इनको सबक सिखानो जरूरी है, मारै कन्नै बेशक लेट जा, इनको सबक सिखाना जरूरी है। तब एक उदाहरण पेश होगा आने वाले समय में कि ऐसा घटिया काम किया है।

सवाल: रतिया विधायक जरनैल सिंह का कहना है कि कांग्रेस के सभी विधायक CM से चोरी से मिलते हैं और काम करवाते हैं?
विधायक: मैं तो कभी चोरी से मिला नहीं। ना मैंने गलत वोट डालने के बाद तारीफ की। मैंने तो सीधा कांग्रेस को वोट दिया। व्यक्तिगत तौर पर सीएम नायब सिंह सैनी की दिल से तारीफ करता था और आज भी करता हूं। जो मुझे मान-सम्मान देते हैं, उनके लिए क्यों किसी प्रकार से गलत लैंग्वेंज इस्तेमाल करूं। मैं तो बीजेपी में भी था और धरने पर बैठ जाता था।

सवाल: पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की सद्भावना यात्रा में क्यों शामिल नहीं हुए?
विधायक: मेरा आज का प्रोग्राम दो दिन पहले से ही तय था। सुबह से जनता दरबार में लगा था। कुछ राज्यसभा चुनाव तो कुछ विधानसभा सेशन के कारण पहले व्यस्त रहा था। इन दिनों शादी- समारोह भी ज्यादा हैं।

सवाल: जिनके वोट कैंसिल हुए, उनके नाम नहीं आए, किन पर शक लग रहा ?
विधायक: उनको सबक सिखाना चाहिए। तुम हजारों वोट लेना जानते हो, अपना वोट डालना नहीं आता। उसमें करना क्या था, उसे छिपाकर सिंपल लाइन लगाकर डालना था। पीछे से डॉट कहां से आ गई। ट्रेनिंग तीन-तीन बार हो गई, इतना भोला थोड़ा है कोई। हमें तो चार-चार बार बताया गया कि लाइन बिलकुल सीधी रखनी है। हम विधायक हैं, ऐसे कैसे हो सकता है।

सवाल: कांग्रेस के पोलिंग एजेंट क्या वोट डालते समय टिक देख नहीं पाए ?
विधायक: वो बैकसाइड थी ना, वो प्लेन नहीं थी, वो प्रिंटेड थी। कई बार नजर भी नहीं पड़ती। जो कैंसिल हुए है, उनको तो डिसक्लॉज करना चाहिए। वो किस कारण से कैंसिल हुई है, उसका बैलेट नंबर क्या है।

सवाल: राज्यसभा चुनाव में विधायक कैसे दबाव में आए और शक की सुई आप पर भी थी?
विधायक: जो 4 वोट कैंसिल हुए है, वो सामने नहीं आ रहे। आने वाले समय में बड़े लोगों को अंदर से हौंसला मिल जाएगा कि इस तरह वोट कैंसिल कराया। 4 वोटों को डिसक्लॉज किया जाता तो उनको पता चलता कि गलत काम करने का क्या नतीजा होता है। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो 5 ऐसा सरेआम कर गए और 4 ने चोरी-चुपके से किया। ये 4-5 वाला आंकड़ा कितना भी बढ़ सकता है। ये विधायक बीमारी हैं और इन्हें जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। अब समय है उन 4 लोगों की पहचान करना।

सवाल: क्या आप समझते हैं कि राज्यसभा की तरह विधानसभा में खेला हुआ?
विधायक: देखिए, जीत का कोई कारण नहीं, हार का कारण होता है। ठीक है, साढ़े 3 साल बचे हैं। इस राज्यसभा में जो गड़बड़ियां हुई, इसी पर सख्त एक्शन लेकर शुरुआत करनी चाहिए। जब ऐसे विधायक पार्टी से निष्कासित होंगे, तब इनका बैंच चेंज हो जाएगा और री-इलेक्शन की बात आती है तो इनको लोग बताएंगे कि किस प्रकार से गद्दारी की जाती है। इन पर जो टैग लगेगा और पता लगेगा कि क्या स्टेप उठाया है, अपने कैरियर का नाश कर लिया। नहीं तो ये यहीं कहेंगे कि नेता प्रतिपक्ष ने पक्षपात किया है।

सवाल: कैंसिल वोट में आपका नाम आया तो धरने पर बैठे, फिर मान कैसे गए?
विधायकः जब मेरा और नांगल चौधरी से विधायक मंजू चौधरी के नाम पर बात आई, तो हम धरने पर बैठे। तभी नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा आए और साफ कहा कि इनका बीच में कोई रोल नहीं है। हमें सम्मान से उठाकर लेकर गए। हमने राय रखी कि उन चार नामों की पहचान होनी चाहिए।