• फतेहाबाद और रतिया के बन चुके 2-2 चेयरमैन

हरियाणा सरकार की ओर से लगातार की जा रही अलग-अलग निगमों और बोर्डों के चेयरमैनों की नियुक्ति में फतेहाबाद जिले का टोहाना पिछड़ गया है। जिले में 3 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें फतेहाबाद, टोहाना और रतिया शामिल हैं। रतिया और फतेहाबाद के कुछ कार्यकर्ताओं को चेयरमैन की कुर्सी मिल गई है। मगर टोहाना से एक भी चेयरमैन नहीं बन पाया है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा सांसद सुभाष बराला और पूर्व मंत्री देवेंद्र बबली की खींचतान का खामियाजा आम कार्यकर्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि, पूरे जिले में अब तक सबसे बड़ा पद सुभाष बराला के ही पास है। इससे पहले भी जब चेयरमैनी टोहाना को मिली तो वो बराला के हिस्से में ही आई। उन्हें सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो का चेयरमैन बनाया गया था।

इस समय टोहाना जिले की राजनीति का सबसे बड़ा गढ़

इस समय जिले की राजनीति में टोहाना सबसे बड़ा गढ़ है। फतेहाबाद और रतिया क्षेत्र को जहां लगातार प्रतिनिधित्व मिल रहा है, वहीं टोहाना क्षेत्र इस दौड़ में पिछड़ता नजर आ रहा है। हालांकि, अब संगठन के कार्यक्रमाें में बराला से ज्यादा देवेंद्र बबली नजर आने लगे हैं। मगर जहां बबली कार्यक्रम में प्रमुखता से नजर आएं, वहां बराला का बैनर से फोटो तक गायब हो जाता है।

फतेहाबाद-रतिया में कौन-कौन चेयरमैन

फतेहाबाद हलके से पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष भारत भूषण मिड्ढा एग्रो इंडस्ट्रीज के चेयरमैन हैं। अब इसी हलके से पुराने कार्यकर्ता राजपाल बैनीवाल को भी हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण में कार्यकारी समिति का चेयरमैन बनाया गया है। इसी तरह रतिया हलके से पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष बलदेव ग्रोहा को हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम का चेयरमैन बनाया गया है।

इनका नहीं बढ़ा कार्यकाल

रतिया हलके के गांव फूलां निवासी बीजेपी के पूर्व जिलाध्यक्ष वेद फूलां पहले हरकोफैड और रतिया के ही गांव बलियाला निवासी प्रो. रविंद्र बलियाला को हरियाणा अनुसूचित जाति आयोग का चेयरमैन बनाया गया था। मगर टर्म खत्म होने के बाद दोनों का कार्यकाल नहीं बढ़ा है। प्रो. रविंद्र बलियाला का जनवरी जबकि वेद फूलां का मार्च में कार्यकाल पूरा हो गया था।

टोहाना में मार्केट कमेटी चेयरमैन बनाने पर भी हुई थी खींचतान

टोहाना में मार्केट कमेटी चेयरमैन बनाने के दौरान भी खींचतान देखने को मिली थी। कहीं बराला तो कहीं बबली समर्थक को चेयरमैन बनाकर सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश की गई। उससे पहले मंडल अध्यक्ष बनाने को लेकर भी तनातनी नजर आई थी।

हालांकि, कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनावों में मेहनत करने वाले जमीनी नेताओं को भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए ताकि संगठन में उत्साह बना रहे।