हरियाणा कांग्रेस जिलाध्यक्षों की रिव्यू मीटिंग के बाद संगठन बदलाव के संकेत हो गए हैं। इसे लेकर लोगों में काफी चर्चाएं बन गई है। सूत्रों की मानें तो कुछ जिलाध्यक्षों की संगठन को लेकर रिपोर्ट ठीक नहीं है और स्थानीय नेताओं-वर्करों एवं विधायकों के साथ उनकी खींचतान-गुटबाजी भी बड़ी वजह है। कई जिलों में जिलाध्यक्षों के साथ पार्टी कार्यक्रम में भी कांग्रेस नेता और विधायक नजर ही नहीं आते।
इसे लेकर रिव्यू मीटिंग में कुछ जिलाध्यक्षों ने प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और प्रदेश प्रभारी बीके हरि प्रसाद के समक्ष खुलकर बातें रखी और कहा- पार्टी के जिला स्तरीय कार्यक्रम में कुछ नेता और विधायक उनके बुलाने या निमंत्रण के बावजूद नहीं आते हैं। खासकर सिरसा और हिसार में गुटबाजी पर चर्चा हुई। क्योंकि यहां के नेताओं में काफी गुटबाजी है।
इस पर प्रदेशाध्यक्ष और प्रभारी ने भी गहरी चिंता व्यक्त की और ये भी कहा- सभी नेता और विधायक उनको समर्थन करेंगे। अगर कोई नहीं आता है तो वे अवगत करवाए। संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए काम करे।
हाल ही में प्रभारी ने एक पत्र जारी कर आदेश भी दिया है कि कांग्रेस पार्टी के नाम पर कोई भी प्रदर्शन या आंदोलन जिला या राज्य नेतृत्व के बिना नहीं किया जाएगा। इसे सभी वर्कर, नेता, विधायक और सांसद सुनिश्चित करे।
रिव्यू मीटिंग में ये पूछा गया
पार्टी की ओर से जिलाध्यक्षों के साथ महीने में एक बार मीटिंग अवश्य होती है। प्रदेश के सभी जिलाध्यक्ष बारी-बारी हर माह प्रोग्राम कर रहे हैं। अब ताजा करनाल जिलाध्यक्ष कार्यक्रम करवा रहे हैं। इसके अलावा 3 माह में रिव्यू मीटिंग होती है। इसमें जिलाध्यक्ष से रिपोर्ट मांगी जाती है कि पिछले 3 माह में पार्टी की ओर से कितने कार्यक्रम हुए और धरातल पर कितना असर रहा। संगठन को जोड़ने या आगे बढ़ाने में क्या योगदान रहा। जिला कार्यकारिणी बनी है या नहीं।
इस लेकर प्रदेशाध्यक्ष एवं प्रभारी की ओर से मई में ये रिपोर्ट ली थी और पार्टी मुख्यालय को भेजी थी। इस पर आगामी फैसला आना बाकी है। हालांकि, कुछ जिलाध्यक्षों ने जिला कार्यकारिणी के लिए नामों की लिस्ट भेजी है, परंतु उस पर प्रदेशाध्यक्ष या प्रभारी की ओर से फाइनल मुहर नहीं लगी। ऐसे में वह पेंडिंग पड़ी है।
दरअसल, कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की सूची अगस्त 2025 को जारी हुई थी। कांग्रेस नेता एवं लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्वयं पहली बार इनके साथ मीटिंग की थी। सिरसा से जिलाध्यक्ष बनाने पर संतोष बैनिवाल ने इसका श्रेय सांसद कुमारी सैलजा को दिया था, लेकिन बाद में वह पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और सांसद दीपेंद्र हुड्डा से मिलने जा पहुंची। इससे काफी नाराजगी चल रही है।
सिरसा में विधायक-नेता एक तरफ माहौल बना रहे
कांग्रेस गुटबाजी का बड़ा उदाहरण सिरसा में देखने को मिल कि एक ही प्रदर्शन 2 दिन अलग-अलग किया गया। एक दिन पहले जिलाध्यक्ष और दूसरे दिन सभी विधायक। पार्टी वर्कर भी 2 गुटों में बंट गए। जिलाध्यक्ष और पार्टी व उनके समर्थक व वर्कर एक तरफ है और विधायक व कुछ नेता जिलाध्यक्ष के खिलाफ जाकर एक तरफ माहौल बना रहे हैं।
वे जिलाध्यक्ष के साथ कार्यक्रम में कभी नजर नहीं आते। प्रदर्शन से एक दिन पहले सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा भी दौरे पर आई थी, लेकिन वह अगले दिन प्रदर्शन में शामिल नहीं हुई।
अभी जिलाध्यक्ष बदलने जैसी बात नहीं : कृष्ण सातरोड
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कृष्ण सातरोड का कहना है कि यह रिव्यू मीटिंग हर 3 माह में आती है। इसमें संगठन को लेकर चर्चा होती है कि कितने लोगों को जोड़ा है और संगठन कितना बढ़ाया है। कुछ जिलाध्यक्षों की संगठन को लेकर रिपोर्ट ठीक नहीं है तो उसे धरातल पर और अधिक काम करने के लिए कहा जाता है। अभी कोई जिलाध्यक्ष बदलने जैसी बात नहीं है।
संगठन के आदेश आने पर पता चलेगा : संतोष
सिरसा से कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष बैनिवाल ने दैनिक भास्कर एप की टीम से बातचीत में बताया, मई माह में चंडीगढ में रिव्यू मीटिंग हुई थी, उसी में सभी ने अपने-अपने विचार और समस्याएं रखी थी। संगठन को लेकर भी चर्चा हुई।
जिला कार्यकारिणी के लिए नामों का पैनल भेजा हुआ है। अभी तक संगठन नहीं बना है। फिर भी प्रदर्शन या अन्य कार्यक्रम सही ढंग से चल रहे हैं। कोई दिक्कत नहीं आ रही है। बाकी पार्टी संगठन की ओर से क्या ओदश आते हैं, वो आने पर ही पता चलेगा।
