- तभी कानून प्रावधाए लाए
हांसी जिले के चैनत गांव में भाखड़ा पाइपलाइन से टी-कनेक्शन की मांग को लेकर चल रहे धरने के बीच, हरियाणा के पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर निशाना साधा है। उन्होंने इस पूरे विवाद को प्रशासनिक कमजोरी बताते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री की मंशा ठीक होती, तो चैनत गांव के लोगों को अब तक पानी मिल चुका होता।
पूर्व डिप्टी सीएम ने सरकार के ढुलमुल रवैये पर तंज कसते हुए कहा कि पहले तो मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सहमति बनाने की बात की, लेकिन बाद में बीजेपी सरकार अपनी बात से मुकर गई। प्रशासन और सरकार के इसी विरोधाभास के कारण चैनत गांव का यह विवाद सुलझने के बजाय और उलझ गया है।
रात को 8 बजे टी आई कहां से
दुष्यंत चौटाला ने चैनत विवाद पर कहा, इस तरह के हालात जो बने हैं। इसके लिए पूरा प्रशासन जिम्मेदार है। रात को टी आई भी है और रात को 8 बजे टी आई कहां से, इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। टी लगी भी है। फिर डिप्टी कमिश्नर और एसपी ने जाकर टी खुलवाई भी है। इसके बाद चीफ मिनिस्टर ने डेलीगेट को बुलाया और सहमति की चर्चा भी बीजेपी ने करी, बाद में असहमति हुई।
अगर सरकार की मंशा नहीं थी। क्या दिक्कत है कि उसकी कैपिसिटी को बढ़ाकर गांव चैनत को पानी दिया जाए। अगर 2 घंटे बारी पानी की सप्लाई वहां बढ़ा दी जाए तो मुझे नहीं लगता कि चैनत की जो पानी की डिमांड है, उसमें कोई किल्लत आए। मगर प्रशासनिक कमजोरी के कारण आज इस तरह की व्यवस्था में ये चैनत में बन गई है। यह बयान दुष्यंत चौटाला ने आज शुक्रवार को मीडिया में जारी किया।
दुष्यंत बोले- सीएम को आधी चीजें अधिकारी बुलाते हैं
सीएम द्वारा अमृत-2 योजना के तहत पाइप में कहीं भी टी नहीं लगती के जवाब पर दुष्यंत चौटाला ने कहा- ये कहां लिखा हुआ है। चीफ मिनिस्टर को आधी चीजें तो जो अधिकारी बताते हैं, वो बोलते हैं। बाद में उन्हीं चीजों पर एक्शन लेते हैं। अमृत द्वार और अमृत टू ये योजना तो पुरानी चलती आ रही है।
अगर सरकार की मंशा साफ है तो कुछ भी हो सकता है। यदि मंशा में खोट हो तो इस तरह की बातें और कानून प्रावधान लाए जाते हैं। अगर मुख्यमंत्री की नीयत साफ हो तो वहां इतना बड़ा विवाद जल्दी से नहीं बनता। अब तो पानी की सप्लाई भी सुचारू हो जाती।
