• कांग्रेस नए प्रभारी की पहली मीटिंग में विवाद, सहारण-हंस ने भी नेम स्लिप फाड़ी

हरियाणा में संजय दत्त को कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद पार्टी में नया विवाद खड़ा हो गया है। सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया ने 8 जुलाई को चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई बैठक के दौरान मंच पर नेताओं की बैठने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

शनिवार को सिरसा में मीडिया से बातचीत में सेतिया ने अशोक तंवर का नाम लिए बिना कहा, “जिन लोगों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया, उन्हें ही मंच पर आगे बैठाया जा रहा है। क्या पार्टी को हाशिए पर धकेलना चाहते हैं? मंच के पीछे लगी कुर्सियों पर मैंने, देवेंद्र हंस और विकास साहरण के नाम की पर्चियां लगी थीं। हमने वे पर्चियां फाड़ दीं और आगे जाकर बैठ गए।”

सेतिया ने पार्टी नेतृत्व को नसीहत देते हुए कहा, “विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 37 विधायक जीते थे। राज्यसभा चुनाव के बाद चार-पांच विधायक भाग गए। जब 32 विधायक भी नहीं संभल रहे, तो संगठन कैसे संभलेगा?”

मेरा और देवेंद्र हंस का नाम सबसे पीछे था

गोकुल सेतिया ने कहा, “मंच की पहली लाइन में पांच कुर्सियां लगी थीं। सबसे पीछे कॉर्नर में चार कुर्सियां रखी गई थीं। उनमें मेरा और विधायक देवेंद्र हंस का नाम लिखा था। उसके बाद भी दो लाइनें थीं, जिन पर अन्य विधायकों के नाम थे। जबकि सबसे आगे की पंक्ति में पार्टी के पदाधिकारी और हाल ही में नियुक्त किए गए नेता बैठे थे।”

अशोक तंवर पर निशाना, बोले- पहले से आकर कुर्सी पर बैठ गए

पूर्व सांसद अशोक तंवर का नाम लिए बिना सेतिया ने कहा, “कुछ चेहरे ऐसे थे, जो समय से पहले ही आकर आगे बैठ गए। शायद उन्हें भी भरोसा नहीं था कि उन्हें मंच पर जगह मिलेगी या नहीं। पता नहीं कैसे मंच पर पहुंच गए। जाते समय उन्हें माइक भी थमा दिया गया और वे अनुशासन का पाठ पढ़ाने लगे। ये वही लोग हैं, जिन्होंने सिरसा में पार्टी को कमजोर करने का काम किया। अगर हमने कभी पार्टी छोड़ी थी तो इसकी वजह भी यही लोग थे। ये बड़ी तेजी से कभी इधर तो कभी उधर जाते रहे।

कभी टीएमसी, कभी बसपा, फिर भाजपा और वापस कांग्रेस

सेतिया ने कहा, “ये लोग कभी टीएमसी गए, शायद बसपा भी गए, फिर भाजपा में चले गए और चुनाव के समय बड़ी तेजी से वापस कांग्रेस में आ गए। कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट मांगने की उनकी ऑडियो भी हमने मीडिया के साथ साझा की थी। ऐसे लोगों को माइक देकर प्रवचन दिलवाए गए। क्या वे हमें सिखाएंगे कि पार्टी के लिए कैसे काम करना चाहिए?”

पार्टी को कमजोर करने वाले मंच पर बैठे थे

गोकुल सेतिया ने कहा, “जो लोग पार्टी को कमजोर करने वाले थे, वे मंच पर बैठे थे। जिन कार्यकर्ताओं ने 2009 में इन्हें सांसद बनाया, उन्हीं के साथ बाद में कैसा व्यवहार किया गया। कार्यकर्ता जब उनकी कोठी पर जाते थे तो उनका अपमान कर बाहर निकाल दिया जाता था। यह भी नहीं देखा जाता था कि कौन वरिष्ठ नेता है और कौन कार्यकर्ता।”

आगे बैठाकर पार्टी क्या संदेश देना चाहती है?

उन्होंने कहा, “चाहे भरत सिंह बैनीवाल हों, चौधरी रणजीत सिंह, डॉ. केवी सिंह या शीशपाल कहरवाला, किसी से भी इनके संबंध अच्छे नहीं रहे। ऐसे लोगों को आगे बैठाकर आखिर पार्टी क्या संदेश देना चाहती है? क्या पार्टी फिर से हाशिए पर जाना चाहती है? मैंने यह बात कमरे में भी साफ तौर पर रखी। अगर शुरुआत ही गलत होगी तो उसके खिलाफ आवाज उठाना मैं पार्टी हित में समझता हूं।

पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह को लेकर भी साधा निशाना

गोकुल सेतिया ने बिना नाम लिए पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “सुना है कि हाल ही में उनके पिता की भी बैठक हुई थी। मिलना-जुलना तो सबसे होता रहता है, लेकिन नगर निगम में पद और मंत्री रहते हुए किसानों के खिलाफ खड़े रहने वाले लोग आज हमें ही पार्टी चलाने का ज्ञान दे रहे हैं कि क्या करना चाहिए।

हमें पार्टी में कोई दिक्कत नहीं है। हम खुलकर अपनी बात रखते हैं। अगर पार्टी हमारी बात पर कोई कार्रवाई करती है तो भी ठीक है, नहीं करती तो भी हम अपना काम करते रहेंगे और बाकी लोग अपना काम करें।”

साथ को लेकर हुड्‌डा-सुरजेवाला में मजाक हुआ

नए प्रभारी संजय दत्त की पहली मीटिंग के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के बीच हल्का-फुल्का मजाक देखने को मिला था। बैठक शुरू होने से पहले हुड्डा ने मुस्कुराते हुए सुरजेवाला से कहा, “सुरजेवाला, मेरा साथ दो… सरकार लेकर आएंगे।” इस पर सुरजेवाला ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “20 साल से आपका ही साथ दे रहा हूं। अब आपकी बारी है।”