• नांदल 1 वोट से हारे थे

लंबे समय तक भाजपा के साथ गठबंधन में रही जननायक जनता पार्टी (JJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय चौटाला ने बड़ा राजनीतिक खुलासा करते हुए एक बार फिर हरियाणा की सियासत में घमासान मचा दिया है। चौटाला ने दावा किया है कि केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उन्हें राज्यसभा की एक सीट का ऑफर दिया था।

इतना ही नहीं, उनसे यह भी कहा गया था कि “तैयारी करो, कांग्रेस के 9 विधायक मैं दिलवा दूंगा”। इसके अलावा चौटाला ने ये भी दावा किया है कि पूर्व सीएम खट्‌टर के ऑफर में ये भी था कि बीजेपी के 31 वोटों के अलावा अन्य विधायकों के वोट भी उन्हें ही मिलेंगे। हालांकि मैं ये जानता था कि INLD के दो वोट मुझे नहीं मिलने थे, इसलिए ऑफर को ठुकरा दिया।

जजपा अध्यक्ष अजय चौटाला ने इस बात का स्वीकार किया पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्‌टर ने राज्यसभा चुनाव के लिए मेरी पार्टी से संपर्क किया था। बता दें कि राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने समर्थित उम्मीदवार के तौर पर बिजनेसमैन सतीश नांदल को मैदान में उतारा था। मगर, भाजपा का एक वोट रद्द होने के कारण वे कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध (28 वोट) से मात्र 0.66 वोट से पीछे रह गए थे।

उधर, अजय चौटाला के इस बयान के राजनीतिक विश्लेषक कई मायने निकाल रहे है। इनमें से एक यह माना जा रहा है कि JJP अपने समर्थकों और जनता को यह बताना चाहती है कि पार्टी ने किसी राजनीतिक सौदे को स्वीकार नहीं किया और अपने सिद्धांतों पर कायम रही।

अजय चौटाला ने ऐसा दावा क्यों किया…3 पॉइट्स में समझिए

क्रॉस वोटिंग के आरोपों पर जवाबी रणनीति : राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में अजय चौटाला का यह बयान खुद को ‘डील’ से दूर दिखाने और नैतिक बढ़त लेने की कोशिश माना जा रहा है।

JJP की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत करना : JJP लंबे समय तक भाजपा के साथ गठबंधन में रही है। अब पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह किसी दबाव या सौदेबाजी का हिस्सा नहीं है और अपनी अलग राजनीतिक लाइन पर चल रही है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों पर दबाव बनाना : इस बयान के जरिए JJP ने एक साथ दो बड़े दलों को कटघरे में खड़ा करने की रणनीति अपनाई है, भाजपा पर ‘ऑफर’ देने का आरोप। कांग्रेस पर ‘विधायक टूटने’ की आशंका दिखाना।

अजय चौटाला क्या मैसेज देना चाह रहे हैं?

‘हम बिकाऊ नहीं हैं’ का संदेश : JJP अपने समर्थकों और जनता को यह बताना चाहती है कि पार्टी ने किसी राजनीतिक सौदे को स्वीकार नहीं किया और अपने सिद्धांतों पर कायम रही।

भविष्य की राजनीति के लिए पोजिशनिंग : यह बयान आगामी चुनावों से पहले JJP की राजनीतिक भूमिका को मजबूत करने और खुद को ‘किंगमेकर’ की स्थिति में दिखाने की रणनीति भी हो सकता है।

सियासी नैरेटिव सेट करने की कोशिश: बयान के जरिए JJP यह नैरेटिव बनाना चाहती है कि राज्यसभा चुनाव में पर्दे के पीछे बड़ी राजनीतिक बातचीत और जोड़तोड़ हुई थी।

आगे क्या असर हो सकता है?
इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों से प्रतिक्रिया आने की संभावना है। चुनाव आयोग या पार्टी स्तर पर इस दावे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो सकती है। हरियाणा की राज्यसभा सीट को लेकर सियासी माहौल और गर्माने के संकेत हैं।