• पार्टी प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र ने की घोषणा, बोले- पार्टी की बैठक में लिया गया फैसला

हरियाणा में निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस ने पंचकूला मेयर पद के लिए उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस ने पंचकूला से महिला विंग की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुधा भारद्वाज को प्रत्याशी घोषित किया है। सुधा भारद्वाज कांग्रेस नेता संजीव भारद्वाज की पत्नी हैं। पंचकूला में पार्टी के पास मुख्य तौर 2 ही नाम थे। कांग्रेस में पंजाबी समुदाय की ओर से पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष रविंद्र रावल तथा ब्राह्मण समुदाय से सुधा भारद्वाज टिकट मांग रही थी। रावल के समुदाय के वोटरों की संख्या करीब 50 हजार तथा सुधा के समुदाय की वोट करीब 15 हजार हैं। लेकिन सुधा को कांग्रेस MLA चंद्रमोहन का साथ मिल गया, जिससे उनकी राह आसान हो गई।

चंद्रमोहन की वीटो आई काम

कांग्रेस की चुनाव कमेटी की मीटिंग में प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र ने बताया कि टिकट के लिए 12 आवेदन आए हैं। सभी के नाम पढ़े गए तो चंद्रमोहन एकाएक खड़े हो गए तथा रविंद्र रावल के नाम का विरोध कर दिया। चंद्रमोहन ने कहा कि, रावल को पार्टी ने नोटिस दिया है, ऐसे में उनकी चर्चा नहीं होनी चाहिए। जिसके बाद मीटिंग में मौजूद नेताओं ने उनसे नाम मांगा तो उन्होंने सुधा भारद्वाज का नाम प्रस्तावित कर दिया। जिसके बाद सिरसा सांसद कुमारी सैलजा से पूछा गया तो उन्होंने भी चंद्रमोहन की पसंद पर अपनी सहमति जता दी।

पंजाबी समुदाय के वोटों की संख्या का जिक्र करते हुए रविंद्र रावल के नाम पर सहमति जताई गई

जिला कमेटी से जब चर्चा हुई तो पंजाबी समुदाय के वोटों की संख्या का जिक्र करते हुए रविंद्र रावल के नाम पर सहमति जताई गई, लेकिन सुधा भारद्वाज का विरोध भी नहीं किया गया। जिसके बाद CLP लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी रविंद्र रावल के नाम पर अपनी मुहर लगाई। लेकिन आम सहमति नहीं बन पाने के कारण मामला अटक गया। लेकिन अंत में पंचकूला कांग्रेस MLA चंद्रमोहन को तरजीह देते हुए कांग्रेस ने सुधा भारद्वाज की टिकट डिक्लेयर की है।

महिला प्रदेश अध्यक्ष रहीं हैं सुधा भारद्वाज

सुधा भारद्वाज कांग्रेस में वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पर रहीं है। उसके बाद जब पद खाली हुआ तो उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। वे संजीव भारद्वाज की पत्नी हैं, जो फिलहाल प्रदेश कांग्रेस में मीडिया इंचार्ज का काम देख रहे हैं। भारद्वाज 2004 में HPCC सचिव थे, 2005 में पार्टी छोड़ दी और 2016 में फिर से पार्टी में शामिल हो गए। परिवार एंटी हुड्‌डा खेमें में गिना जाता है। सुधा बृजेंद्र सिंह की यात्रा में भी सक्रिय रहीं हैं।