•  मुरलीधर को भेंट की ‘गीता प्रेरणा’, धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को आत्मसात करने का दिया संदेश

शहर के श्री अर्धनारीश्वर (गौरी शंकर) शिव मंदिर में आयोजित प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत दिव्य श्रीराम कथा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रसिद्ध संत स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कथा में सहभागिता कर श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक जीवन के महत्व का संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन और भगवान श्रीराम के जयघोष के साथ हुआ। मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। श्रीराम कथा के दौरान भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, सत्य, त्याग और सेवा के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने श्री मुरलीधर जी को ‘गीता प्रेरणा’ भेंट कर उन्हें श्रीमद्भगवद्गीता के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने और जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य ज्ञान है, जो हर परिस्थिति में मनुष्य का मार्गदर्शन करती है।

भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है

स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण है। वहीं भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से कर्मयोग, निस्वार्थ सेवा और धर्म के पालन का संदेश दिया। यदि समाज इन दोनों महान आदर्शों को अपने जीवन में अपनाए तो सामाजिक समरसता, नैतिकता और शांति स्वतः स्थापित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि मंदिरों में होने वाले ऐसे धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कारों एवं धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का कार्य भी करते हैं। आज के समय में परिवार और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना के लिए ऐसे आयोजनों का विशेष महत्व है।

श्रद्धालुओं ने भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की प्रार्थना की

प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की प्रार्थना की। पूरे मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और वैदिक मंत्रों की गूंज से भक्तिमय वातावरण बना रहा। कार्यक्रम के अंत में स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए भगवान श्रीराम एवं भगवान श्रीकृष्ण से सभी के सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि ईश्वर की कृपा से समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना निरंतर बनी रहे तथा प्रत्येक व्यक्ति धर्म और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़े। महोत्सव के समापन पर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन समिति ने कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी संतों, अतिथियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के निरंतर आयोजन का संकल्प दोहराया।