- कुलदीप ने मौके को भुनाया, पॉलिटिकल एक्सपर्ट बोले-दोनों की राजनीतिक मजबूरियां
हरियाणा भाजपा में उभरा ताजा असंतोष क्या वाकई पार्टी के लिए कोई बड़ा संकट है या फिर यह सिर्फ अपने सियासी वजूद को बचाए रखने के लिए शुरू हुई ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ है? गुरुग्राम में केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह के कड़वे बोल और फिर ‘X’ पर उनके समर्थन में उतरे पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई के सुर ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सतीश त्यागी के अनुसार, अहीरवाल बेल्ट के बड़े नेता राव इंद्रजीत और बिश्नोई बेल्ट के चेहरे कुलदीप बिश्नोई की इस जुगलबंदी को यदि गहराई से समझें, तो इसके पीछे दोनों नेताओं की अपनी-अपनी राजनीतिक मजबूरियां और महत्वकांक्षाएं नजर आती हैं।
6 बार के सांसद और दक्षिण हरियाणा में 11 से 14 विधानसभा सीटों पर सीधा प्रभाव रखने वाले राव इंद्रजीत सिंह लगातार केंद्र में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाए जाने से असहज हैं। उन्हें मलाल है कि इतने बड़े जनाधार के बावजूद उन्हें ‘फुल-फ्लैश’ केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का दर्जा नहीं मिला। हालांकि, उनकी बेटी आरती राव हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, फिर भी राव अपनी अनदेखी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं। कई बार उनकी यह नाराजगी सार्वजनिक मंच से भी जाहिर हो चुकी है।
वहीं, विश्लेषकों का मानना है कि राव इंद्रजीत के मुकाबले कुलदीप बिश्नोई का राजनीतिक कद और जनाधार काफी घट चुका है। वह आज इस स्थिति में नहीं हैं कि भाजपा को छोड़कर कोई नया रास्ता चुन सके।
- मुख्यमंत्री पद की सार्वजनिक दावेदारी (सितंबर 2024): विधानसभा चुनाव के दौरान जब भाजपा नायब सिंह सैनी के चेहरे पर चुनाव लड़ रही थी, तब राव इंद्रजीत ने खुलकर बयान दिया कि “दक्षिण हरियाणा की जनता आज भी चाहती है कि मैं हरियाणा का मुख्यमंत्री बनूं”। उन्होंने यह भी कहा था कि 2014 और 2019 में दक्षिण हरियाणा (अहीरवाल) के समर्थन के बल पर ही भाजपा राज्य में सरकार बना सकी थी।
- संगठन में उपेक्षा और वॉकआउट का तंज (अगस्त 2026): गुरुग्राम में आयोजित भाजपा के कार्यक्रम में उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और अन्य वरिष्ठ नेताओं के सामने मंच से कहा कि “अगर यह पार्टी का कार्यक्रम नहीं होता, तो मुझे यहां बुलाया भी नहीं जाता और न बोलने वालों की सूची में मेरा नाम होता”। उन्होंने आयोजकों द्वारा समय सीमा का इशारा किए जाने पर तीखा कटाक्ष किया।
- पूर्व मुख्यमंत्री खट्टर और ‘पंजाबी लॉबी’ पर हमला (अगस्त 2026): राव ने पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर की अहीरवाल क्षेत्र में बढ़ती पैठ पर नाराजगी जताई। उन्होंने मंच से आंकड़े गिनाते हुए बयान दिया कि “पंजाबी नाम से वोट नहीं मिलते और मनोहर लाल खट्टर को केवल पंजाबी समाज ने नहीं, बल्कि हरियाणा की 36 बिरादरियों ने मिलकर मुख्यमंत्री बनाया था”।
कुलदीप बिश्नोई का समर्थन देकर स्थिति भुना रहे
राव इंद्रजीत के बयान पर तुरंत कूदकर समर्थन देने वाले कुलदीप बिश्नोई की स्थिति इस मामले में थोड़ी अलग है। विश्लेषकों का मानना है कि राव इंद्रजीत के मुकाबले कुलदीप बिश्नोई का राजनीतिक कद और जनाधार काफी घट चुका है। हिसार, सिरसा, फतेहाबाद और आदमपुर बेल्ट में पारंपरिक पकड़ होने के बावजूद वह आज इस स्थिति में नहीं हैं कि भाजपा को छोड़कर कोई नया रास्ता चुन सके। कुलदीप बिश्नोई ने खुद को भी उपेक्षित नेताओं की श्रेणी में रखकर राव के बयान का समर्थन किया है, लेकिन जानकार इसे उनकी ‘गलतफहमी’ और सिर्फ अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का जरिया मानते हैं।
क्या वाकई भाजपा की टेंशन बढ़ेगी? 3 बड़े सवाल…
1. क्या यह भाजपा में बगावत का संकेत है? नहीं? विश्लेषकों के मुताबिक, अभी हरियाणा में दूर-दूर तक कोई चुनाव नहीं है। यह सिर्फ भाजपा संगठन और केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाने की ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ है।
2. क्या किरण चौधरी इस मोर्चे में जुड़ेंगी? बिल्कुल नहीं। वरिष्ठ नेत्री किरण चौधरी इस असंतुष्ट खेमे या मोर्चे में शामिल नहीं होंगी। उनके अपने राजनीतिक समीकरण हैं और वह इस गुटबाजी से दूर रहेंगी।
3. नजरअंदाज करने का जोखिम उठा सकती है भाजपा? नहीं। विश्लेषकों के मुताबिक, राव इंद्रजीत का अहीर समाज (यादव वोट बैंक) पर एकछत्र प्रभाव है। भले ही यह प्रेशर पॉलिटिक्स हो, लेकिन भाजपा शीर्ष नेतृत्व राव जैसे बड़े जनाधार वाले नेता को ज्यादा देर तक नजरअंदाज करने का जोखिम नहीं ले सकता।
