- कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा-डरना नहीं चाहिए था
गुरुग्राम में कांग्रेस के दो बड़े नेताओं के चार दिन से गायब होने और देर रात अचानक वापस लौटने पर सियासत गरमा गई है। देर रात डीसीपी वेस्ट नवीन गोयल के ऑफिस में ग्रामीण जिलाध्यक्ष वर्धन राव और शहरी जिलाध्यक्ष पंकज डावर पेश हुए, जहां से उन्हें जमानत मिल गई।
वहीं विधायक मुकेश शर्मा पहलवान भी अब इस मामले में खुलकर सामने आ गए हैं और दोनों जिलाध्यक्षों को फुकरा बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के काफिले को काला झंडा दिखाकर खुद को ‘राहुल गांधी का बब्बर शेर’ बताने वाले ये नेता ‘मिस्टर इंडिया’ की तरह गायब हो गए और फिर अचानक प्रकट भी हो गए। अगर विरोध का इतना ही शौक था तो छिपकर भागने की बजाय मौके पर ही गिरफ्तारी दी जानी चाहिए थी।
प्रदेशाध्यक्ष ने कहा-छिपना नहीं चाहिए था
इस पूरे विवाद पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र ने दिन में दावा किया था कि मुझे खुद नहीं मालूम कि दोनों जिलाध्यक्ष इस वक्त कहां हैं। मेरे से उनका कोई सम्पर्क नहीं हुआ है। हालांकि, राव नरेंद्र ने दोनों नेताओं से कहा था कि उन्हें इस तरह छिपना नहीं चाहिए। दोनों को तुरंत सामने आना चाहिए। डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, पूरी पार्टी उनके साथ खड़ी है। इसके बाद वे रात को सरेंडर करने पहुंचे।
विधायक का तंज-ऐसी हरकतें शोभा नहीं देतीं, दोनों फुकरे हैं
दूसरी तरफ, भाजपा के विधायक मुकेश शर्मा के तेवर इन नेताओं को लेकर बेहद सख्त नजर आए। विधायक ने इन नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दोनों नेता फुकरे हैं। इस तरह की बचकानी और गैर-जिम्मेदाराना हरकतें किसी भी जिम्मेदार पदाधिकारी को शोभा नहीं देतीं। विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राजनीति में गंभीरता जरूरी है, न कि ऐसा ड्रामा। अगर छात्रों के मुद्दे उठाने ही थे, तो ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में उठाना चाहिए था या अपने पार्टी द्वारा मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में उठाना चाहिए था।
‘बब्बर शेर’ से बने ‘मिस्टर इंडिया’
विधायक ने कहा कि सीएम के काफिले को अचानक काला झंडा दिखाने से एक बड़ा हादसा हो सकता था, उसमें सूबे के मुखिया को भी चोट लग सकती थी। क्योंकि जिस तरह से इन फुकरों ने सीएम के काफिले के सामने आकर बचकानी हरकत की है, उससे एक बड़ा हादसा होते-होते टला है। खुद को बब्बर शेर करने वाले मिस्टर इंडिया बन गए और चार दिन पुलिस से छिपते रहे।
पुलिस की सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस पूरी तरह फेल हुई
21 अगस्त को मुख्यमंत्री के काफिले को काले झंडे दिखाने वाले दोनों जिला अध्यक्ष चार दिनों तक पुलिस की नाक के नीचे अंडरग्राउंड रहे। हैरानी की बात यह है कि भारी पुलिस सुरक्षा के बीच न सिर्फ यह विरोध प्रदर्शन हुआ, बल्कि इसके बाद आरोपी नेता आसानी से पुलिस की गिरफ्त से दूर निकल गए। पुलिस कमिश्नर ने कुछ पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई तो की, लेकिन इतने बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बावजूद स्थानीय खुफिया तंत्र को भनक तक नहीं लगी, जो सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है।
