इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के चीफ अभय सिंह चौटाला ने चंडीगढ़ को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि भाजपा क्या चंडीगढ़ को छोड़ना चाहती है? मुख्यमंत्री ने इसको लेकर पत्र भी लिखा है। अगर ऐसा होता है तो हम ईंट से ईंट बजा देंगे। अभय चौटाला ने ये दावा चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में किया।

उन्होंने कहा कि शाह कमीशन अपना फैसला दे चुका है कि चंडीगढ़ पर हरियाणा का अधिकार है। चंडीगढ़ में हमारी 40 फीसदी की हिस्सेदारी है। केंद्र सरकार अगर चंडीगढ़ को अलग से केंद्र शासित प्रदेश बनाना चाहती है तो वह और जगह तलाशे। हम चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश नहीं बनने देंगे।

SYL पर दोनों मुख्यमंत्री दिखावा कर रहे

चंडीगढ़ में चौधरी अभय सिंह चौटाला ने मीडिया से बात करते हुए एसवाईएल ने कहा कि बैठक का मकसद पंजाब चुनाव तक सतलुज जमुना लिंक नहर के निर्माण को टालना है। अगर अधिकारियों के जरिए ही इस समस्या का समाधान निकलता तो दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बैठक करने की क्या जरूरत थी।

यह सारी कार्रवाई जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए की जा रही है। बीजेपी और आम आदमी पार्टी आपस में मिली हुई है। पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान कहते थे कि हरियाणा को एक बूंद भी पानी नहीं देंगे। अब कहते हैं कि किसी का हक मरना नहीं चाहिए।

CM सैनी को डमी मुख्यमंत्री बताया

अभय सिंह चौटाला ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी को डमी बताते हुए कहा कि वह खुद कोई फैसला लेने में सक्षम नहीं है। ऊपर से जो निर्देश आते हैं वह उन्हें ही लागू करवाने का प्रयास करते हैं। जब तक कांग्रेस और भाजपा सत्ता में रहेगी एसवाईएल नहर का समाधान नहीं हो सकता।

इंडियन नेशनल लोकदल ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो इसका समाधान करेगी और हरियाणा को पानी भी दिलवाएगी। बीजेपी सरकार सतलुज यमुना लिंक नहर के मसले पर हरियाणा के पक्ष को कमजोर कर रही है। ऐसा ही हाल हरियाणा में कांग्रेस का भी है। जब भी लिंक नहर का मसला उठता है तो कांग्रेस चुप हो जाती है।

प्री-बजट मीटिगें सिर्फ दिखावा

मुख्यमंत्री नायब सैनी की प्री बजट बैठक को अभय सिंह चौटाला ने बताया समय की बर्बादी। प्री बजट की परंपरा को पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शुरू की थी। उनके पास काम करने के लिए कुछ होता नहीं था। इसलिए टाइम पास करने के लिए वह प्री बजट बैठक करते थे। वर्तमान मुख्यमंत्री भी इस लाइन पर चल रहे हैं।

मुख्यमंत्री के पास करने के लिए बहुत कुछ होता है। लेकिन मुख्यमंत्री जिलों में जाकर बजट बैठक कर बहुमूल्य समय बर्बाद कर रहे हैं।