- मेडिकल कॉलेज की ओर नहीं ध्यान
हरियाणा के नारनौल में पूर्व मंत्री डा. अभय सिंह ने बिना नाम लिए स्वास्थ्य मंत्री आरती राव पर निशाना साधा। उन्होंने कि उनके विरोधी कुछ लोग छोटी-छोटी पीएचसी-सीएचसी के कामों को गिनाकर वाहवाही लूट रहे हैं, जबकि 750 करोड़ की लागत से बने मेडिकल कॉलेज की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
आज पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा कामों का श्रेय लेने की होड़ लगी है। वे छोटे-छोटे कामों को गिना रहे हैं। नांगल चौधरी कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर बनवाने के तथा राता में नहरी पानी प्रोजेक्ट के नाम पर वाहवाही लूटी जा रही है। इनके प्रेसनोट अखबारो में बड़े हैडिंग के साथ लगवाए जा रहे हैं, जबकि यहां पर बने बड़े मेडिकल कॉलेज की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
लोग जा रहे बाहर
उन्होंने कहा कि ये लोग यदि मेडिकल कॉलेज की ओर ध्यान दें तो यहां के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं। यहां मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद लोगों को इलाज के लिए अभी भी रोहतक व जयपुर जाना पड़ रहा है।
उनके खिलाफ किया जा रहा दुष्प्रचार
पूर्व मंत्री ने कहा कि बसीरपुर में बनने वाले मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के लिए दुष्प्रचार किया जा रहा है। लोगों को बताया जा रहा है कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है तथा डा. अभय सिंह ने किसानों के साथ भ्रष्टाचार किया है, जबकि हकीकत यह है कि उन्होंने यहां के किसानों को अधिक मुआवजा दिलाया है।
सीधा किसानों के खातों में गया
उन्होंने कहा कि मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब की जमीन के लिए कलेक्टर रेट से दो से ढाई गुणा ज्यादा मुआवजा उन्होंने यहां के किसानों को दिलवाया। यहां बसीरपुर, तलोट व छिलरो में कलेक्टर रेट 12 लाख रुपए से 13 लाख रुपए प्रति एकड़ था, जबकि यहां के किसानों को मुआवजा 30 लाख रुपए प्रति एकड़ मिला है। यह सीधा किसानों के खातों में गया। ऐसे में उनका कोई रोल ही नहीं है।
प्रोजेक्टों में डाल रहे अड़चने
उन्होंने कहा कि कुछ लोग यहां पर विकास नहीं होने देना चाहते। यही कारण है कि इतने बड़े प्रोजेक्टों में अड़चन डाली जा रही है। ये लोग यहां के किसानों को गुमराह कर रहे हैं, जबकि देखा जाए तो माजरा में बन रहे एम्स में भी इन्होंने वहां के किसानों को कम ही मुआवजा दिलाया।
एम्स में भी कम मिला
उन्होंने कहा कि एम्स के पास माजरा गांव की जमीन का कलेक्टर रेट 24 लाख रुपए प्रति एकड़ था तथा वहां पर मुआवजा महज 40 लाख रुपए प्रति एकड़ मिला है। यह मुआवजा लॉजिस्टिक हब जमीन के मिले हुए मुआवजे के पांच साल बाद दिया गया है। इसका मतलब वहां के किसानों के साथ भी धोखा हुआ है।
विरोधी कर रहे गुमराह
उन्होंने कहा कि माजरा एम्स में पांच-पांच लाख रुपए काटकर वहां के लोगों को एक-एक शॉपिंग काम्पलेक्स में दुकानें दी गई हैं। ऐसे में वहां के लोगों को प्रति एकड़ महज 35 लाख रुपए का ही मुआवजा मिला। उन्होंने कहा कि उनके विरोधियों का काम केवल लोगों को गुमराह करना रह गया।
