• जींद में डिप्टी स्पीकर डॉ. मिड्ढा बोले- आपातकाल देश का सबसे क्रूर, काला अध्याय

हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने आपातकाल को देश के इतिहास का सबसे क्रूर और काला अध्याय बताया। डॉ. मिड्ढा ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता बचाने के लिए पूरे सिस्टम को बंधक बना लिया था।

उन्होंने बताया कि एक ही रात में राष्ट्रपति से हस्ताक्षर कराकर देश पर आपातकाल थोप दिया गया था। विपक्ष के कई बड़े नेताओं को रातों-रात गिरफ्तार कर 18 से 19 महीनों तक जेलों में रखा गया।

जींद के विश्राम गृह में प्रेसवार्ता के दौरान डॉ. मिड्ढा ने आपातकाल के दौरान जेलों में दी गई यातनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बर्फ की सिल्लियों पर लिटाना और बर्बरता से मारपीट करना उस समय आम बात थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ, मीडिया का गला घोंट दिया गया और पत्रकारों को जेल में डालकर सेंसरशिप लागू की गई।

इंदिरा गांधी ने संविधान को कुचला : डा. मिड्ढा
डॉ. मिड्ढा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा संसद में संविधान की प्रति दिखाए जाने पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि संविधान को सबसे ज्यादा नुकसान और उसे कुचलने का काम राहुल गांधी की दादी इंदिरा गांधी ने ही किया था।

उन्होंने राहुल गांधी को अपने पूर्वजों का इतिहास पढ़ने की सलाह दी। डॉ. मिड्ढा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी लोकसभा में कागजों को फाड़कर फेंकते हैं और मनमोहन सिंह सरकार के समय भी अध्यादेश की प्रतियां सरेआम फाड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि जो खुद संविधान की धज्जियां उड़ाते हैं, वे आज संविधान के रक्षक बनने का ढोंग कर रहे हैं।

आपातकाल के दौरान जबरन की गई नसबंदी का जिक्र करते हुए डॉ. मिड्ढा ने कहा कि उस समय युवाओं के भविष्य को बर्बरतापूर्वक कुचल दिया गया था।

पंजाब के सीएम भगवंत मान पर बोला हमला

विधानसभा उपाध्यक्ष ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पहले लोकसभा और अब विधानसभा जैसी पवित्र जगहों पर शराब पीकर आ चुका हो, उसके आचरण और गरिमा के बारे में कुछ भी कहना शब्दों को खराब करने जैसा है। उन्होंने दावा किया कि भगवंत मान की सच्चाई और वीडियो पूरे देश की जनता के सामने आ चुके हैं।

​जींद शहर में स्थापित बायोगैस प्लांट से जुड़े विवाद और स्थानीय लोगों की शिकायतों पर डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने स्पष्ट किया कि वे स्वयं इस मामले का संज्ञान ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं खुद स्थानीय निवासियों के साथ प्लांट का दौरा कर चुका हूं। हाल ही में कंपनी प्रबंधकों के साथ जो बैठक हुई, उसमें दिए गए जवाबों से हम संतुष्ट नहीं हैं।”

बॉयोगैस प्लांट को लेकर होगी संयुक्त मीटिंग

उन्होंने आगे की रणनीति बताते हुए कहा आगामी 15 दिनों के भीतर कंपनी के उच्च अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों की एक संयुक्त बैठक तय की जाएगी। स्थानीय लोग अपनी आपत्तियों और सवालों की एक प्रश्नावली तैयार करेंगे, जिसका जवाब कंपनी को लिखित में देना होगे कंपनी से देश में चल रहे उनके सभी 50-60 बायोगैस प्लांट्स की लोकेशन और आबादी से उनकी दूरी का पूरा डेटा मांगा गया है।

रात और सुबह के समय निकलने वाले धुएं की गहनता से जांच कराई जाएगी कि वह जनता के स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक है। जनता की संतुष्टि के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा ।