- पासपोर्ट और आधार कार्ड को नागरिकता प्रमाण माना जाए
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को कहा, ‘केंद्र सरकार का ये कहना की पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, एक बेतुका कानूनी विरोधाभास है।’ उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार का फैसला भ्रम पैदा कर रहा है। इसने राजनीतिक बहस शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा, ‘हमेशा से पासपोर्ट को सबसे विश्वसनीय सरकारी पहचान दस्तावेज माना जाता रहा है। अगर पासपोर्ट से देश के भीतर नागरिकता साबित नहीं होती, तो फिर किस दस्तावेज से होगी।’
दरअसल, विदेश मंत्रालय ने 24 जून को जारी आदेश में कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, सिर्फ एक यात्रा दस्तावेज है। इससे पहले SIR से जुड़ी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि आधार कार्ड पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं।
थरूर का सुझाव- पासपोर्ट और आधार कार्ड को नागरिकता प्रमाण माना जाए
थरूर ने कहा, ‘पासपोर्ट और आधार कार्ड दोनों को नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाना चाहिए, जब तक कि सरकार उन्हें रद्द या वापस न ले।’
‘भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) गैर-भारतीय निवासियों के लिए अलग पहचान वाला आधार कार्ड जारी करे। इससे सामान्य भारतीय आधार कार्ड और वैध भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता के पर्याप्त प्रमाण के रूप में स्वीकार किया सकेगा।
SIR की जगह NRC (या SRI – आपके मूल संदर्भ के अनुसार) में होने वाले विवाद कम होंगे, प्रशासनिक कामकाज आसान होगा और नागरिकों को अपनी पहचान और नागरिकता को लेकर कानूनी स्पष्टता मिलेगी।
पासपोर्ट विवाद पर बयान
अमित मालवीय (BJP नेता और IT सेल के प्रमुख): उन्होंने साफ किया कि सरकार ने कोई नया नियम नहीं बनाया है, बल्कि यह पुराना कानून ही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसके समर्थन में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 का हवाला दिया, जिसके तहत विशेष परिस्थितियों में जनहित में गैर-नागरिकों को भी भारत सरकार पासपोर्ट जारी कर सकती है।
कपिल सिब्बल (वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद): अगर पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज नहीं है, तो फिर नागरिकता का प्रमाण कौन सा दस्तावेज है? बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मेरी नागरिकता पर संदेह कर सकता है।
जावेद अख्तर (मशहूर गीतकार और लेखक): उन्होंने विदेश मंत्रालय के इस बयान को पूरी तरह तर्कहीन बताया। उन्होंने कहा कि क्या मंत्रालय गैर-भारतीय नागरिकों को भी भारतीय पासपोर्ट जारी कर रहा है जो वह ऐसा बयान दे रहा है?
सरकार ने पासपोर्ट की संख्या को लेकर क्या कहा है?
मंत्रालय ने बताया कि पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवा केंद्र और संबंधित सुविधाओं की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है। 2025 में शुरू हुए चिप आधारित ई-पासपोर्ट की अब तक 1.47 करोड़ प्रतियां जारी की जा चुकी हैं। आवेदन निपटाने का औसत समय घटकर 5-6 दिन रह गया है। 2019 के 16 देशों के मुकाबले अब 27 देश भारतीयों को वीजा-फ्री प्रवेश देते हैं।
नहीं। भारत कोई ऐसा एक दस्तावेज जारी नहीं करता है जो सभी नागरिकों के लिए नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाए। नागरिकता इस बात पर तय होती है कि इसे कैसे हासिल किया गया और नागरिकता कानून के तहत कौन से रिकॉर्ड मौजूद हैं।
