- प्रभारी बघेल की मीटिंग में 80 नेता इकट्ठे होंगे, मांग- सांसद चन्नी को CM चेहरा घोषित करो
पंजाब कांग्रेस के बागी गुट ने पूर्व CM चरणजीत चन्नी को 2027 के चुनाव के लिए मुख्यमंत्री चेहरा बनाने की मांग कर दी है। चन्नी गुट का कहना है कि अगर उन्हें प्रधान नहीं बनाना तो फिर CM चेहरा घोषित करें ताकि उनके नाम पर पंजाब में वोटें मांगी जा सकें। हाईकमान पहले ही कह चुका है कि वह अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान पद से नहीं हटाएंगे।
पार्टी में बिगड़ते हालात के बीच डैमेज कंट्रोल के लिए पूर्व CM चन्नी की शर्तों के आधार पर कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल उनसे मिलने कपूरथला के MLA राणा गुरजीत के घर उनसे मिलने जाएंगे। चन्नी गुट की शर्त के हिसाब से राजा वड़िंग को मीटिंग में नहीं बुलाया गया है। वहीं ये मीटिंग कांग्रेस भवन की जगह MLA के घर पर हो रही है। बैठक में नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा भी आ सकते हैं। मीटिंग में चन्नी गुट की तरफ से शक्ति प्रदर्शन भी किया जाएगा। सांसद-विधायक और पूर्व MLA मिलाकर इसमें 80 नेता इकट्ठे किए जा रहे हैं।
बैठक से पहले भूपेश बघेल ने चन्नी गुट को दो टूक संदेश दे दिया कि सीमा लांघी तो सख्त कार्रवाई होगी। भूपेश बघेल का मीटिंग से पहले इस तरह की चेतावनी देना कहीं न कहीं चन्नी गुट पर प्रेशर बनाने की एक सुनियोजित रणनीति है। बघेल ने राजा वड़िंग को भी कह दिया कि वो चन्नी गुट के साथ अकेले बैठक करेंगे।
चन्नी गुट ने स्पष्ट किया है कि हाईकमान को मिलने से पहले वो भूपेश बघेल के साथ बैठक में अपनी बात रखेंगे और उसके बाद दिल्ली में हाईकमान के साथ मीटिंग करेंगे। चन्नी गुट को राहुल गांधी के विदेश दौरे से वापस आने का इंतजार है।
पॉलिटिकल एक्सपर्ट का मानना है कि चरणजीत सिंह चन्नी को साइड लाइन करना कांग्रेस हाईकमान के लिए आसान नहीं है। चन्नी पंजाब में इस समय दलित वर्ग में सबसे बड़े नेता हैं और उनके साथ दलित वोट बैंक है। कांग्रेस हाईकमान भी वोटों के गणित को देखते हुए चन्नी को साइड करने की स्थिति में नहीं है।
मीटिंग से दूर रहेंगे राजा वड़िंग
भूपेश बघेल ने प्रताप सिंह बाजवा के साथ हुई पहली मीटिंग के अलावा हर बैठक में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को साथ रखा। चन्नी गुट ने बघेल के साथ बैठक करने से पहले इसीलिए शर्त रखी कि वो वड़िंग को मीटिंग में लेकर न आएं। बघेल ने भी वड़िंग को साफ कह दिया कि वो चन्नी गुट के साथ होने वाली बैठक में अकेले जाएंगे ताकि सभी विवादित मुद्दों पर खुलकर बात हो सके। बघेल का मानना है कि यदि इस वन-टू-वन बैठक में कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय निकलकर सामने आता है और चन्नी गुट के नेता आगे राजा वड़िंग के साथ बैठकर बातचीत करने के लिए सहमत हो जाते हैं, तभी वड़िंग को मीटिंग में शामिल होने के लिए बुलाएंगे।
आज ही हाईकमान को सौंपेंगे रिपोर्ट
भूपेश बघेल ने साफ किया है कि वे आज इस पूरी बातचीत और बैठक के दौर को खत्म करने के तुरंत बाद दिल्ली चले जाएंगे। दिल्ली दरबार में पेश होकर वे पंजाब के सभी गुटों की नाराजगी, उनकी शर्तें और सांगठनिक हालातों की एक ‘सीक्रेट’ रिपोर्ट हाईकमान के सामने रखेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बघेल की इस चंडीगढ़ यात्रा और चन्नी गुट को दी गई सीधी चेतावनी से साफ है कि आने वाले दिनों में पंजाब कांग्रेस के भीतर या तो कोई बड़ा समझौता होने वाला है या फिर अनुशासन तोड़ने वाले बड़े नेताओं पर हाईकमान की गाज गिरने वाली है।
अब पढ़िए एक्सपर्ट ने क्या कहा…
बघेल गुटबाजी खत्म नहीं कर पाए
पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रोफेसर डॉ कृष्ण कुमार रत्तू का कहना है कि भूपेश बघेल पंजाब में जिस संकट को खत्म करने आए थे वो अभी तक वैसा ही है। बघेल ने मैराथन मीटिंग्स की लेकिन जो गुटबाजी खत्म करने के लिए उन्हें भेजा गया था वो काम नहीं कर पाए। उनका कहना है कि चन्नी गुट इस पूरे प्रकरण में एक साथ डटा रहा।
चन्नी गुट को दरकिनार करना आसान नहीं
उनका कहना है कि चरणजीत सिंह चन्नी बड़े दलित-सिख नेता हैं, सुखजिंदर सिंह रंधावा जट्ट सिख नेता हैं, परगट सिंह, तृत्प रजिंदर बाजवा और अन्य भी बड़े जट्ट सिख नेता हैं। वहीं भारत भूषण आशु कांग्रेस में बड़े हिंदू चेहरे के तौर पर देखे जाते रहे हैं। ऐसे में हाईकमान चरणजीत चन्नी गुट को आसानी से दरकिनार नहीं कर सकता।
मीटिंग में चन्नी गुट की बात नहीं मानी जाएगी
पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि भूपेश बघेल की मीटिंग में भी चन्नी गुट की बात नहीं मानी जाएगी क्योंकि बघेल के पास वो शक्तियां नहीं हैं जो चन्नी गुट की शिकायतों पर फैसला ले सके। चन्नी गुट राजा वड़िंग को प्रधान मानने को तैयार नहीं है। बघेल कह चुके हैं कि हाईकमान फैसला नहीं बदलेगा। फिर इस मीटिंग के कोई ज्यादा मायने नहीं हैं।
राहुल गांधी के सामने रखेंगे बात
उनका कहना है कि चन्नी गुट राहुल गांधी के विदेश से आने का इंतजार कर रहा है। एक बार वो राहुल गांधी के सामने अपनी बात रखेंगे। राहुल गांधी से बात करने के बाद अगर कांग्रेस हाईकमान ने बीच का रास्ता नहीं निकाला तो पार्टी टूट की तरफ जाएगी, क्योंकि चन्नी गुट के नेता वड़िंग की अगुवाई में विधानसभा चुनाव में उतरने को तैयार नहीं हैं।
