• सिरसा कांग्रेस जिलाध्यक्ष और विधायकों के बीच छिड़ी सियासी जंग

सिरसा कांग्रेस के पार्टी संगठन में गुटबाजी के बाद अंदरूनी सियासी जंग शुरू हो गई है। सिरसा में हुड्डा और सैलजा गुट एक होने के बाद जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल ने भी तीसरा गुट खड़ा करना शुरू कर दिया है। सांसद कुमारी सैलजा द्वारा स्पोर्ट न करने वाले बयान के बाद जिलाध्यक्ष ने विधायकों के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल ने विधायक गोकुल सेतिया की “साथ न चलने वाली पोस्ट” पर कहा, कांग्रेस का बड़ा परिवार है और उनका बचपना है। हमारे बीच मतभेद हो सकता है, मनभेद नहीं। कालांवाली में वर्करों से मीटिंग के दौरान विधायक शीशपाल कहरवाला पर तंज कसते हुए कहा- मुझे नेताओं के आने न आने से कोई फर्क नहीं पड़ता। वर्करों की जरूरत है, नेताओं की नहीं। इन वर्करों की वजह से कांग्रेस सिरसा में जिंदा है। इन्हीं बयान पर विवाद शुरू हो गया है।

अब सिरसा विधायक गोकुल सेतिया ने शुरूआत करते हुए लगातार 4 पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर डाली है। जिनमें लिखा है कि अब ये जिलाध्यक्ष हमें राजनीति सिखाएगी और पहले नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा और मौजूदा सांसद कुमारी सैलजा और अब विधायकों के बारे में अनाप-शनाप बोल रही है।

जो (जिलाध्यक्ष) अपने जेठ को ही राजनीतिक चपत लगाने की तैयारी में है। विधायक सेतिया ने थोड़े दिन की एक्सीडेंटल और जल्द पता चलने को बताया है। कालांवाली विधायक ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ऐसी दुकानें जल्द बंद हो जाती है और अब पार्टी से जाने की तैयारी है।

सबसे पहले विधायक सेतिया पर कहा, उनमें बचपना

6 अगस्त को कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल ने पोस्ट विवाद पर कहा था- विधायक गोकुल सेतिया मेरा छोटा भाई है। अगर जरूरत पड़ी तो मैं उनसे घर जाकर बात करूंगी। उनमें बचपना है या कुछ और, पता नहीं। कांग्रेस का बहुत बड़ा परिवार है। हमारे बीच मतभेद हो सकता है, मनभेद नहीं। जब वर्करों को जरूरत पड़ेगी तो विधायक उनके साथ होंगे और मैं उनके साथ खड़ी मिलूंगी। सबका पार्टी को मजबूत करना ही काम है।

9 अगस्त को होने वाली मीटिंग के लिए जिलाध्यक्ष ने कहा, मेरी ओर से भी विधायकों को निमंत्रण जाएगा और पूर्व मंत्री बीरेंद्र सिंह, पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की ओर से भी निमंत्रण दिया जाएगा। इसे लेकर जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल जिले के सभी हलकों में दौरा कर रही है और मीटिंग में ज्यादा से ज्यादा लोगों को पहुंचने का निमंत्रण दिया जा रहा है।

विधायक शीशपाल पर कहा- नेताओं की जरूरत नहीं

कालांवाली में वर्करों से मीटिंग के दौरान जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल ने मीडिया को दिए बयान में कहा था- मेरे लिए नेताओं की उपस्थिति मायने नहीं रखती, कार्यकर्ताओं की उपस्थिति मायने रखती है। जितना मान-सम्मान कार्यकर्ता दे रहा है। उसे देखकर लगता है कि शायद नेता की जरूरत नहीं पड़ेगी। आपने देखा, जितना भी इतिहास उठाकर देखो आप, आज भी सिरसा में कांग्रेस जिंदा है तो इन कार्यकर्ताओं की बदौलत। नेताओं की जरूरत नहीं।

मेरा दायित्व है कि कार्यकर्ताओं के बीच जाकर उनकी समस्या सुनी और जहां जो दिक्कत आ रही है, उसे ऊपर तक पहुंचाने का काम करूं। उनका समाधान कराने की कोशिश करेंगे, न कि वहां चुप्पी मारकर बैठ जाए। हमें कांग्रेस मजबूत करने को बनाया गया है।

प्रधान के नाते दुकान चलाना चाहतीं : शीशपाल

जिला अध्यक्ष के बयान के बाद कालांवाली से विधायक शीशपाल कहरवाला का कहना है कि जिला प्रधान के नाते ये दुकान चलाना चाहतीं है। ऐसे शटर जल्दी बंद हो जाते हैं। जो उस समय मीटिंग में गए थे, उनमें से ज्यादातर पार्टी के साधारण कार्यकर्ता है। वे पार्टी प्रोग्राम समझकर गए थे, उनको पता ही नहीं था कि किसने और क्यों मीटिंग बुलाई थी। उनके अब फोन आ रहे हैं कि उनको पता ही नहीं था।

जो लोग 4-4 पार्टियां बदल चुके हैं और वे अब सवाल उठा रहे हैं। अब जाने की तैयारी में हैं। रही बात फोन न उठाने की। अगर किसी अज्ञात नंबर से भी कॉल आती है तो वह भी अटेंड होती है। एक समय कॉल न उठा पाऊं तो उससे बाद में वापस संपर्क किया जाता है। मेरे पास मीटिंग के लिए कोई निमंत्रण नहीं आया था।

 

जिलाध्यक्ष संतोष बेनिवाल के बारे में जानिए, कब और कैसे ये विवाद पहुंचा

संतोष बेनिवाल नाथुसरी चौपटा ब्लॉक से दड़बां कलां गांव से नवबंर 2022 में सरपंच बनी। इससे पहले शादी समारोह के दौरान हाथ में पिस्टल लेते हुए वीडियो वायरल हुई थी। उसी दौरान चर्चा में आई और दबंग सरपंच के रूप में छा गई। इस बीच मीडिया में बयान आने शुरू हुए और कांग्रेस से जुड़ गई। सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा से जुड़ी और लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में अक्सर उनके साथ नजर आती थी। अगस्त 2025 में कांग्रेस की जिला प्रधान चुनी गई।

इसके बाद सिरसा में सांसद कुमारी सैलजा के साथ हर कार्यक्रम में अक्सर नजर आने लगी। अब पिछले कुछ दिनों से सांसद सैलजा के साथ नजर नहीं आती है। सांसद सैलजा और विधायकों ने भी दूरी बना ली है। विधायक पार्टी जिलाध्यक्ष से अलग होकर प्रदर्शन या कार्यक्रम में शामिल होते हैं। जिलाध्यक्ष संतोष ने भी किनारा करते हुए सांसद और विधायकों पर बयानबाजी शुरू कर दी है। इससे अंदरूनी खींचतान साफ झलक रही है।