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मेघवाल गुरुवार को कुरुक्षेत्र में गुरु रविदास विश्व महापीठ की ओर से आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश वंदे मातरम् गा रहा है और इसे लेकर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की एकता और राष्ट्रीय भावना से जुड़े विषयों को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

गुरु रविदास की जयंती पर देशभर में होंगे कार्यक्रम

मेघवाल ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जन्म जयंती देशभर में प्रकट उत्सव के रूप में मनाई जा रही है। यह आयोजन गुरु पूर्णिमा से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलेगा। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने समाज को समानता, सद्भावना, भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश दिया था। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं।

उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी की जयंती के उपलक्ष्य में देश के उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जहां गुरु रविदास जी के मंदिर हैं, वहां पूजा-अर्चना के साथ कलश यात्राएं निकाली जा रही हैं। वहीं, जिन स्थानों पर गुरु रविदास जी के मंदिर नहीं हैं, वहां अन्य मंदिरों में जाकर विभिन्न समाजों के लोग आरती और पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

सामाजिक समरसता और संविधान के मूल भाव पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से समाज में आपसी भाईचारा और सामाजिक समरसता मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी की शिक्षाएं संविधान के मूल भाव स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को भी मजबूती देने का काम करती हैं।

मेघवाल ने कहा कि गुरु रविदास जी ने भेदभाव से ऊपर उठकर समानता और मानवता का संदेश दिया था। आज उनके विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की जरूरत है। राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान संत रविदास जी की शिक्षाओं और उनके सामाजिक योगदान पर भी चर्चा हुई।