- दल-बदल से लेकर FIR तक का मांगा हिसाब
कांग्रेस का जिलाध्यक्ष दिल्ली-चंडीगढ़ के चक्कर काटकर या बड़े नेताओं के पैर छूकर नहीं, बल्कि लिखित में परीक्षा देकर चुना जाएगा। हिसार कांग्रेस की जिलाध्यक्ष की कुर्सी के लिए पार्टी ने इस बार सिफारिशी संस्कृति पर फुलस्टॉप लगाते हुए 3 पन्नों का एक पेचीदा अप्लाई प्रफॉर्म जारी किया है।
हिसार में उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे अजय कुमार लुल्लू को ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया है। पहले दिन कई नेताओं ने आवेदन किया। कांग्रेस ने तीन पेज का प्रोफॉर्मा वर्करों को दिया है, इसे भरकर जमा करवाना होगा।
अजय कुमार ने बताया कि 5 दिन हिसार में रहकर वह 6 नामों का पैनल तैयार कर हाईकमान को नाम भेजेंगे। इसके बाद हाईकमान ही नाम पर मुहर लगाएगा। पांच साल से ज्यादा अनुभव वाले वर्कर इस प्रोफॉर्मा को भर सकते हैं।
प्रोफॉर्मा में पूछ गए कई सवाल
फॉर्म में ऐसे-ऐसे सवाल पूछे गए हैं कि कई पुराने धुरंधरों के पसीने छूट रहे हैं। प्रफॉर्म में फेसबुक आईडी, एक्स (ट्विटर) हैंडल और व्हाट्सएप नंबर मांगा गया है। इसके अलावा सामाजिक संतुलन देखने के लिए जाति और उप-जाति का कॉलम अनिवार्य किया गया है।
वफादारी के लिए तीन सवाल पूछे गए हैं, आप कांग्रेस में कब से हैं, पार्टी में पहला पद कौन सा मिला था और अतीत में किन-किन 4 पदों पर रहे, जैसे सवाल पूछे गए हैं। पहले किसी और दल में रहकर आए हैं या कांग्रेस से कभी निकाले गए थे, तो उसका पूरा साल और महीना दर्ज करना होगा।
ये रहेगी ऑब्जर्वरों की मुख्य भूमिका
अजय कुमार लुल्लू ने बताया कि हाईकमान ने धरातल पर काम करने का बड़ा टास्क दिया गया है। जिला और ब्लॉक अध्यक्षों का चयन किया जाएगा। ऑब्जर्वर संबंधित जिलों में जाकर स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और दावेदारों से सीधा संवाद करेंगे और ब्लॉक से लेकर जिला कार्यकारिणी तक के नाम तय करेंगे।
विभिन्न गुटों के बीच तालमेल बिठाकर किसी एक गुट का वर्चस्व खत्म करना और सर्वसम्मत नामों की सूची हाईकमान को भेजना। अजय कुमार ने कहा कि क्षेत्र में पार्टी की वास्तविक स्थिति, कार्यकर्ताओं के असंतोष और स्थानीय मुद्दों की रिपोर्ट एआईसीसी प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश नेतृत्व को दी जाएगी।
इस अभियान से ये मिलेगा फायदा
सालों से बिना संगठन चल रही कांग्रेस के लिए यह कदम ‘बूस्टर डोज’ की तरह है। लंबे समय से लंबित पड़े जिला व ब्लॉक अध्यक्षों के पदों पर नियुक्तियां होने से जमीनी कार्यकर्ता सक्रिय होंगे। मजबूत संगठन तैयार होने से भाजपा के कैडर-बेस्ड सांगठनिक ढांचे का मुकाबला करने में कांग्रेस को मदद मिलेगी।
एआईसीसी (AICC) ऑब्जर्वरों की मौजूदगी यह सुनिश्चित करेगी कि केवल एक ही गुट की मनमानी न चले और एआईसीसी का सीधा नियंत्रण बना रहे।
