- बढ़ती कीमतों पर सरकार से 3 सवाल, 3 महीने में ₹19 महंगी दाम 40% बढ़े
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चीनी की बढ़ती कीमतों और स्टॉक की कमी को लेकर केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा कि त्योहारों से पहले मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट चीनी की मिठास में घुल गई है।
खड़गे ने सरकार से सवाल किया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया। उन्होंने 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की नौबत पर भी सवाल उठाया।
खड़गे ने सरकार से 3 सवाल करते हुए पूछा कि ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है, जहां विदेश से चीनी आयात की जा रही है और दूसरी तरफ गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल में झोंका जा रहा है।
देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। पिछले 3 महीने में इसके दाम करीब 40% यानी ₹19 प्रति किलो तक बढ़े हैं। कीमत कम करने के लिए केंद्र ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर बिना ड्यूटी के आयात करने की मंजूरी दी है।
तीन महीने में गुड़ के दाम भी 24% तक बढ़े
चीनी के अलावा तीन महीने में गुड़ 24%, चावल 16% और मक्के का आटा 11% तक महंगा हुआ है। चीनी के दाम बढ़ने की एक वजह मिलों के पास बचे स्टॉक में कमी भी बताई जा रही है। पिछले सीजन में पेराई शुरू होने से पहले मिलों के पास 47 लाख टन चीनी थी, जो इस बार घटकर 32 लाख टन रह गई है।
एथेनॉल बनाने में भी गन्ने और उससे बने उत्पादों का इस्तेमाल हुआ है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले साल देश में 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। इसे बनाने में 1.33 करोड़ टन अनाज और करीब 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा इस्तेमाल हुआ।
इसमें करीब 34 लाख टन गन्ना शामिल था। एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने वाले खराब अनाज की वजह से पशु आहार और पोल्ट्री फीड की उपलब्धता भी कम हुई। इससे पशु आहार के दाम 8-10% तक बढ़ गए।
सरकार बोली- एथेनॉल की वजह से चीनी की कीमत नहीं बढ़ी
केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने शुक्रवार को कहा कि कीमत बढ़ने की अन्य वजहों में घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव बताया है।
चोपड़ा ने कहा कि देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक है, इसके बावजूद मिलों ने पिछले कुछ दिनों में कीमतें बढ़ाई हैं। चोपड़ा के मुताबिक, 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत ₹48/kg थी, जो बढ़कर ₹56/kg हो गई है। वहीं, एक्स-मिल कीमत सिर्फ 7-10 दिनों में ₹47-48 से बढ़कर ₹62/kg पहुंच गई।
खाद्य सचिव बोले- एथेनॉल के लिए कम चीनी इस्तेमाल हो रही
खाद्य सचिव चोपड़ा के मुताबिक, अब देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब एक-चौथाई हिस्सा ही चीनी से आता है, जबकि बाकी मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से बनता है। एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12% थी। यह 2025-26 में घटकर करीब 9% रह गई है। मौजूदा सीजन में एथेनॉल के लिए सिर्फ 28 लाख टन चीनी डायवर्ट की गई है।
निर्यात 4 साल पहले 1.33 करोड़ टन था, अब जीरो हुआ
वाणिज्यिक मामलों के मंत्रालय के अनुसार, 2022-23 में 1.33 करोड़ टन चीनी-शीरा और इससे बने उत्पादों का निर्यात हुआ। 2023-24 में 51.35 लाख टन निर्यात की गई। 2024-25 में निर्यात घटकर 38.43 लाख टन तक सीमित हो गया। 2026-27 में चीनी के निर्यात का आंकड़ा जीरो रहेगा, क्योंकि इस बार आयात करने की नौबत आ गई है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक
भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और निर्यातक देश है। 2021-22 में भारत ने रिकॉर्ड 1.1 करोड़ टन चीनी एक्सपोर्ट की थी, लेकिन इसके बाद निर्यात लगातार घट रहा है।
घरेलू सप्लाई कम होने पर सरकार ब्राजील जैसे देशों से कच्ची चीनी आयात करती है और उसे भारतीय मिलों में रिफाइन करके बाजार में उतारती है। भारत ने आखिरी बार 2017 में करीब 24 लाख टन चीनी आयात की थी।
