• नमी के बहाने खरीद नहीं हो रही

जींद जिले के उचाना की अतिरिक्त मंडी में पीआर धान की खरीद का जायजा लेने पहुंचे पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने धान खरीद में आ रही समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बेमौसम बारिश, पोर्टल की समस्याओं और प्रत्येक मंडी में एक खरीद एजेंसी रखने के प्रयोग ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।

आज मंडियों में धान की ढेरियां पड़ी हैं, लेकिन खरीद और उठान की व्यवस्था सुचारू नहीं है। शनिवार को आई धान की ढेरियों में 16 प्रतिशत तक नमी होने के बावजूद रविवार का हवाला देकर खरीद नहीं करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

मंडियों में अनाज खराब होने की जिम्मेदारी भी सरकार की है। सरकार के पास न तो पर्याप्त मिलर्स हैं और न ही उठान की उचित व्यवस्था। कई मंडियों में किसानों को भुगतान का इंतजार है। कुछ जगहों पर सीधे मिलर्स को खरीद देने से आढ़तियों को भी दरकिनार करने का प्रयास किया जा रहा है।

चंडीगढ़ से आते समय नए हाईवे 152-जी पर जलबेहड़ा से शाहाबाद तक किसानों को धान सुखाने के लिए सड़क किनारे कई किलोमीटर तक फसल फैलानी पड़ी। यह सरकार की व्यवस्थागत विफलता को दर्शाता है। सीएम का ध्यान हरियाणा के किसानों की समस्याओं के बजाय पंजाब में जाकर बयानबाजी करने पर है।

‘किसानों को मंडियों में परेशान किया जाता है’

कृषि मंत्री के किसानों के खातों में 2461 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से राशि पहुंचने के बयान पर दुष्यंत चौटाला ने कहा कि पानीपत में किसानों ने कृषि मंत्री के सामने ही 300 रुपए प्रति क्विंटल तक कटौती किए जाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि मंडी में एक ढेरी के ऊपर 13 प्रतिशत और नीचे 21 प्रतिशत नमी होने से औसत नमी 17 प्रतिशत बनती है।

ऐसे मामलों में पूरी ढेरी की स्थिति को ध्यान में रखकर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए। किसानों को दो-दो दिन मंडियों में परेशान किया जाता है, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में 400 रुपए प्रति क्विंटल तक कम दाम पर फसल बेचनी पड़ती है। उनके अनुसार, कटौती के बाद बचा हुआ स्टॉक अपने पास रखकर बाद में अधिक कीमत पर बेचने की आशंका भी है।

‘यह बढ़ोतरी केवल 25 पैसे प्रति किलो के बराबर’

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल की मांग होने के बावजूद किसानों को धान कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना निंदनीय है। जेजेपी किसानों की समस्याओं को लेकर 21 अक्टूबर को प्रदेशभर में जिला स्तर पर उपायुक्तों के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपेगी।

पूर्व डिप्टी सीएम ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 25 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी केवल 25 पैसे प्रति किलो के बराबर है। उनके अनुसार, इतनी कम बढ़ोतरी किसानों की आय दोगुनी करने के दावे से मेल नहीं खाती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से किसानों की लागत के मुकाबले आमदनी प्रभावित हो रही है।

एक दुकान का प्लॉट तक नहीं बेच पाया मार्केटिंग बोर्ड’

सीएम नायब सिंह सैनी द्वारा सरकार की उपलब्धियां गिनवाने पर कटाक्ष करते हुए दुष्यंत चौटाला ने कहा कि वह उचाना मंडी में मौजूद हैं, लेकिन सरकार के कार्यकाल में मार्केटिंग बोर्ड यहां एक दुकान का प्लॉट तक नहीं बेच पाया। उन्होंने कहा कि मंडी में खरीद की व्यवस्था पहले से चली आ रही है, इसलिए इसे नई उपलब्धि नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने सवाल किया कि उचाना में प्रस्तावित फायर ट्रेनिंग कॉलेज का शिलान्यास हुआ या नहीं और सरकार पिछले ढाई साल में प्रदेश को कौन-सी पांच बड़ी उपलब्धियां बता सकती है। उन्होंने कहा कि जींद मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा होने के करीब होने के बावजूद वहां स्थायी व्यवस्थाओं और ओपीडी को लेकर अपेक्षित काम नहीं हुआ। उनके अनुसार, प्रदेश में कोई नया औद्योगिक क्षेत्र, हाईवे या मास्टर प्लान जैसी बड़ी पहल भी दिखाई नहीं दे रही।

‘सरकार को भर्तियों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए’

बिना पर्ची-बिना खर्ची 46 हजार से अधिक नौकरियां देने के सीएम के दावे पर दुष्यंत चौटाला ने कहा कि सरकार को भर्तियों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सीएम बताएं कि उनके कार्यकाल में क्लास सी और डी की कौन-कौन सी भर्तियां पूरी हुई हैं और इस संबंध में श्वेत पत्र जारी करें। सीईटी पास कर चुके युवा आगे की भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन दो साल में सीईटी की परीक्षा दोबारा नहीं करवाई गई। उन्होंने पुलिस भर्ती को लेकर भी सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।

‘वोट कटने पर मतदाता दोबारा नाम कैसे जुड़वाएं’

वोट चोरी के मुद्दे पर चल रहे आंदोलन को लेकर दुष्यंत चौटाला ने कहा कि 13 करोड़ लोगों के वोट काटे जाने का आरोप बेहद गंभीर है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के साथ डकैती करार देते हुए कहा कि हरियाणा में करीब 34 लाख वोटों पर आपत्तियां आने से मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। जेजेपी के पूर्व एक्स सर्विसमैन सेल प्रमुख कर्नल राठी का उदाहरण देते हुए कहा कि वह पिछले 15 वर्षों से गुरुग्राम में रह रहे हैं और सेना में सेवाएं दे चुके हैं।

इसके बावजूद उनके वोट पर आपत्ति आना चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पूर्व सैनिकों, पद्म पुरस्कार प्राप्त लोगों और खिलाड़ियों के वोटों पर भी आपत्तियां आ रही हैं, तो मतदाता सूची में गड़बड़ियों की आशंका की जांच होनी चाहिए।

एसआईआर प्रक्रिया में फॉर्म नंबर-6 और फॉर्म नंबर-7 के इस्तेमाल को लेकर भी कई सवाल सामने आ रहे हैं। उन्होंने बीएलओ से अपील की कि वे मतदाता सूची से नाम काटने की प्रक्रिया में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन निष्पक्षता से करें। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों के वोट कट गए हैं, उन्हें दोबारा मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए किस प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए।