झज्जर में पूर्व मंत्री गीता भुक्कल के निवास स्थान पर आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। हुड्डा ने मनरेगा योजना के नाम में बदलाव और इसमें शामिल किए गए नए प्रावधानों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे गरीब मजदूरों के हितों पर सीधा हमला करार दिया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इस योजना के मूल ढांचे को बदलकर गरीब मजदूरों के पेट पर लात मारने का काम किया है। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी और बहुत जल्द देशभर में चरणबद्ध तरीके से एक बड़ा आंदोलन शुरू करने जा रही है। हुड्डा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जिस प्रकार किसानों ने एकजुट होकर तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए सरकार को मजबूर किया था, उसी तर्ज पर कांग्रेस भी सरकार को मनरेगा के इस नए स्वरूप को वापस लेने के लिए विवश कर देगी।
योजना के तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए हुड्डा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नई योजना में राज्य सरकारों का आर्थिक हिस्सा बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जो सीधे तौर पर राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है। इसके अलावा, उन्होंने कार्य चयन की प्रक्रिया के केंद्रीकरण का भी विरोध किया। हुड्डा के अनुसार, पहले पंचायतें यह तय करती थीं कि उनके क्षेत्र में क्या कार्य होना है, लेकिन अब केंद्र सरकार इसका फैसला करेगी, जिससे स्थानीय स्वशासन की अवधारणा कमजोर होगी।
भाजपा नेताओं द्वारा विपक्ष पर विकास कार्यों में बाधा डालने के आरोपों का जवाब देते हुए हुड्डा ने पूछा कि इस नई योजना में ‘अच्छा’ क्या है? उन्होंने तर्क दिया कि मनरेगा के 90 प्रतिशत लाभार्थी दलित, पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर समाज से आते हैं। यह योजना लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से लाई गई थी, जिसे अब खत्म करने की साजिश रची जा रही है।
राम के नाम पर हो रही राजनीति और योजना के नए नामकरण से जुड़े सवाल पर हुड्डा ने कहा कि ‘राम राज्य’ तभी संभव है जब ‘ग्राम स्वराज’ सुरक्षित रहे। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि पंचायतों के अधिकारों को खत्म करके ग्राम स्वराज की नींव हिलाई जा रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले नेहरू युवा केंद्र जैसे संस्थानों के नाम भी बदले गए हैं, जिससे सरकार की प्राथमिकताओं का पता चलता है।
हुड्डा ने अंत में दोहराया कि 12 तारीख से शुरू होने वाले कार्यक्रमों के जरिए जनहित की इस आवाज को बुलंद किया जाएगा और कांग्रेस इस योजना के पुराने स्वरूप और अधिकारों की बहाली के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
