• 21 अन्य पदाधिकारियों ने भी दिया इस्तीफा

हरियाणा में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) चीफ चौधरी जयंत चौधरी को बड़ा झटका लगा है। दादरी से पूर्व विधायक और रालोद की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष जगजीत सिंह सांगवान ने अध्यक्ष पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तुरंत प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने और प्रदेश कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों ने रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी को अपना इस्तीफा भेज दिया है।

करीब 21 पार्टी पदाधिकारियों ने रालोद को अलविदा कह दिया है। इस्तीफे के पीछे की बड़ी वजह यह सामने आई है कि पार्टी अध्यक्ष जयंत चौधरी पिछले दिनों पानीपत आए थे, लेकिन इसकी जानकारी पार्टी के किसी पदाधिकारी को नहीं दी गई। इसको लेकर पार्टी के नेता काफी नाराज चल रहे थे।

30 जुलाई 2025 को ही रालोद प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा हुई थी, जिसमें 6 प्रदेश उपाध्यक्ष, 9 प्रदेश महासचिव, 10 प्रदेश सचिव और 1 कोषाध्यक्ष की नियुक्ति हुई की गई थी।

पांच प्रदेश उपाध्यक्ष ने भेजे इस्तीफे

प्रदेश अध्यक्ष जगजीत सिंह सांगवान, पूर्व विधायक के साथ उक्त प्रदेश कार्यकारिणी में से पार्टी से इस्तीफा देने वालों में पांच प्रदेश उपाध्यक्ष मेवा सिंह पातड- हिसार, राजकुमार जांगड़ा चरखी दादरी, संपूर्ण आनंद गुरुग्राम, अजय सिंह मालिक सोनीपत, जगत सिंह यादव नारनौल के अलावा 7 प्रदेश महासचिव जसबीर सिंह अहलावत जींद, कृष्ण कुमार देसवाल करनाल, राजनारायण पंघाल रोहतक, ओमप्रकाश सरदाना फतेहाबाद, ब्रह्मानंद भिवानी, अंकुर दीक्षित रेवाड़ी और मास्टर हवासिंह सोनी तोशाम ने भी इस्तीफा दिया।

हिसार के उमेद सरपंच ने भी छोड़ी पार्टी

इनके अलावा 9 सचिव जिनमें उमेद सरपंच हिसार, महेंद्र कुमार यमुनानगर, राजेश भिवानी, आजाद नेहरा रेवाड़ी, सुशील गहलोत सोनीपत, महेंद्र शर्मा चेयरमैन चरखी दादरी, कपिल कुमार झज्जर, कृपाल सिंह तंवर कुरुक्षेत्र और अशोक अहलावत झज्जर भी इस्तीफा देने वालों में शामिल रहे। कोषाध्यक्ष मोहन नारंग फतेहाबाद ने भी अपना इस्तीफा दिया।

दादरी विधानसभा से 5 चुनाव लड़े

जगजीत सिंह सांगवान ने दादरी विधानसभा से 5 चुनाव लड़े हैं। उन्होंने पहला चुनाव 1982 में कांग्रेस पार्टी से लड़ा था, जिसमें हार मिली। उसके बाद 1987 में उन्होंने निर्दलीय के तौर पर ताल ठोकी, लेकिन सफलता हासिल नहीं हुई। 1991 और 1996 के विधानसभा के चुनाव में वे कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़े लेकिन हार मिली। 4 हार के बाद 2000 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से किस्मत आजमाई और जीत हासिल कर दादरी के विधायक बने।