गुरुग्राम में कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत के हाल ही में दिए बयान पर तीखा पलटवार किया। गुरु कमल कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि मेरा तो राजनीतिक जीवन ही राव इंद्रजीत को हरा कर शुरू हुआ है।

उन्होंने कहा कि राव इंद्रजीत पहले की बात भूल गए, जब मैं 26 साल का था और तब मैं जाटूसाना से चुनाव लड़ा और वह राव इंद्रजीत का आज भी गढ़ है। मैंने वहीं जाकर राव इंद्रजीत को हराया। मेरा पहला चुनाव ही राव इंद्रजीत के खिलाफ शुरू हुआ था।

ये 2009 से पहले की बात नहीं बताई, वे उम्र के तकाजे के हिसाब से भूल गए होंगे। राव नरबीर ने व्यंग्य करते हुए कहा कि राव इंद्रजीत इस पुरानी बात को भूल गए होंगे, शायद उम्र के तकाजे के कारण।

एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ चुके

यह बयान अहीरवाल क्षेत्र में यादव समुदाय के दो प्रभावशाली नेताओं के बीच लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता को फिर उजागर करता है। दोनों भाजपा में हैं, लेकिन अतीत में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। राव नरबीर ने 1987 में जाटूसाना से राव इंद्रजीत को हराकर विधायक बने थे, जबकि राव इंद्रजीत क्षेत्र के दिग्गज नेता हैं और केंद्रीय मंत्री पद संभाल रहे हैं।

इंद्रजीत बोले थे- 55 दिन की जेल काट चुके नरबीर

हाल ही में राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम में एक चैनल के कार्यक्रम में कहा था कि नरबीर सिंह भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में रहा है तो, उन्हें दूसरों के बारे में बोलने का हक नहीं हो सकता। राव इंद्रजीत सिंह दक्षिणी हरियाणा में भाजपा को मिली जीत का श्रेय भी खुद लेते रहे हैं।

आरती राव ने दिया ये बयान

तीन दिन पहले रेवाड़ी में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने भी कहा कि राव इंद्रजीत एक बरगद का पेड़ हैं। खुद नरबीर सिंह ने एक वक्त स्वीकार किया था कि अगर राव इंद्रजीत सिंह का साथ न होता, तो शायद उनके लिए लोकसभा की दहलीज लांघना भी मुमकिन नहीं हो पाता।

स्वास्थ्य मंत्री ने तंज कसा था कि जो लोग आज सवाल उठा रहे हैं, दरअसल उनके वजूद को टिकाए रखने के लिए राव साहब के नाम का सहारा चाहिए।

दोनों का बड़ी सियासी बैकग्राउंड

राव इंद्रजीत के पिता राव बीरेंद्र सिंह हरियाणा के दूसरे मुख्यमंत्री बने थे। किसी वक्त उनकी गिनती इंदिरा गांधी के करीबियों में होती थी। उन्होंने अपनी हरियाणा विशाल पार्टी का कांग्रेस में विलय किया था। राव इंद्रजीत उन्हीं की सियासी लीगेसी को बढ़ा रहे हैं। राव इंद्रजीत 6 बार के सांसद हैं।

दूसरी तरफ राव नरबीर का भी सियासी बैकग्राउंड मजबूत है। उनके दादा राव मोहर सिंह और पिता महाबीर सिंह भी सियासत में थे। राव नरबीर खुद 4 बार विधायक बने हैं और चारों बार मंत्री बने। वह जाटूसाना, सोहना और बादशाहपुर से विधायक बने हैं।