- हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार, कोर्ट बोला- फरार हो सकता है, नहीं मिलेगी बेल
हरियाणा के समालखा से पूर्व कांग्रेस विधायक एवं महिरा ग्रुप के प्रमोटर धर्म सिंह छोक्कर को मनी लान्ड्रिंग मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने आरोपी छोक्कर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मामले की गंभीरता, भारी वित्तीय गड़बड़ी और आरोपी के आचरण को देखते हुए उन्हें राहत नहीं दी जा सकती। जस्टिस त्रिभुवन दहिया की अदालत ने अपने आदेश में प्रवर्तन निदेशालय के इस तर्क को सही ठहराया कि छोक्कर के फरार होने की आशंका है। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी जांच के दौरान लगातार समन की अवहेलना करता रहा और उसकी गिरफ्तारी के लिए गैर-जमानती वारंट जारी करने पड़े।
616 करोड़ की प्रोसीड्स आफ क्राइम
यह मामला गुरुग्राम के सेक्टर-68 स्थित एक अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसमें करीब 1500 होमबायर्स से लगभग 363 करोड़ रुपये वसूले गए थे। इन फ्लैट्स का कब्जा वर्ष 2021-22 तक दिया जाना था लेकिन परियोजना अधूरी रही। जांच एजेंसी के अनुसार निर्माण कार्य में राशि लगाने के बजाय धन को विभिन्न कंपनियों के जरिए डायवर्ट किया गया। ईडी ने अदालत को बताया कि इस पूरे प्रकरण में करीब 616 करोड़ रुपये की ‘प्रोसीड्स आफ क्राइम’ उत्पन्न हुई, जिसे फर्जी लेनदेन, लोन और एडवांस के माध्यम से इधर-उधर घुमाया गया।
निजी खर्चों के लिए धनराशि का दुरुपयोग
जांच में सामने आया कि इस राशि का उपयोग निजी खर्चों जैसे प्रॉपर्टी खरीद, वाहन, ज्वेलरी और यहां तक कि पारिवारिक शादी समारोहों में किया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकार्ड से स्पष्ट है कि परियोजना के लिए एकत्रित धन का दुरुपयोग किया गया और फ्लैट निर्माण के बजाय निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। साथ ही करीब 56 करोड़ रुपये की फर्जी खरीद-फरोख्त का भी उल्लेख किया गया, जिसमें पैसे को विभिन्न संस्थाओं के जरिए घुमाकर नकद निकासी की गई।
फरार होने के प्रयास में दिल्ली से गिरफ्तार
हाईकोर्ट ने पाया कि छोक्कर के खिलाफ कई एफआईआर और शिकायतें दर्ज हैं, जो दर्शाती हैं कि यह कोई एक मामला नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर धोखाधड़ी का हिस्सा है। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि आरोपी ने 17 से अधिक समन का पालन नहीं किया और आखिरकार मई 2025 में दिल्ली के एक होटल से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह भागने की कोशिश में था। लंबी हिरासत के तर्क को भी अदालत ने खारिज करते हुए कहा कि मामले की प्रकृति को देखते हुए यह अवधि अत्यधिक नहीं मानी जा सकती, खासकर जब ट्रायल शुरू होने वाला है।
सभी तथ्य जमानत के खिलाफ गए
अदालत ने यह भी कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत निर्धारित कड़े प्रावधान को आरोपी पूरा नहीं कर सका। उक्त सभी पहलुओं पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता, निवेशकों के साथ हुई कथित ठगी का बड़ा पैमाना और आरोपी का व्यवहार, यह सभी जमानत के खिलाफ जाते हैं। नतीजतन, अदालत ने जमानत याचिका खारिज की।
