हरियाणा राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय कैंडिडेट के पक्ष में वोटिंग करने वाले कांग्रेस के पांच विधायकों शैली चौधरी (नारायणगढ़), रेनू बाला (साढ़ौरा), मोहम्मद इलियास (पुन्हाना), मोहम्मद इजराइल (हथीन) और जरनैल सिंह (रतिया) को निलंबित कर दिया है। कहने का मतलब यह है कि ये पांचों विधायक तो रहेंगे, लेकिन कांग्रेसी नहीं रहे।
कांग्रेस हाईकमान के इस कदम के बाद हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कह चुके है कि पार्टी में अनुशासन ही सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला उन सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि पार्टी के खिलाफ चलने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, इस एक्शन का पार्टी को फायदा कम नुकसान ज्यादा होता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह असर मौजूदा समय या यूं कहे कि तत्काल दिखाई ना दे,लेकिन 2028 में राज्यसभा की 2 सीटों पर होने वाले चुनाव पर इसका असर पड़ेगा। साथ ही 2029 में भी पार्टी को दिक्कतें आ सकती हैं।
पहले विधायकों के निलंबन से होने वाले नुकसान पर डालते हैं नजर…
1. विधानसभा में संख्या बल घटने का जोखिम
हरियाणा विधानसभा में अभी कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, लेकिन पांच के निलंबन के बाद ये संख्या बल घटकर 32 रह गया है। अब संबंधित विधायक पार्टी की सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों से बाहर रहेंगे, ऐसे में सदन में पार्टी का प्रभाव कमजोर पड़ना निश्चित है। सदन में सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले महत्वपूर्ण बिल, प्रस्ताव या अविश्वास प्रस्ताव जैसे मामलों में इस एक्शन से नुकसान बड़ा हो सकता है। इसका सीधा असर पार्टी की निर्णय क्षमता और राजनीतिक ताकत में दिखाई देगा।
2. संगठन में असंतोष और गुटबाजी बढ़ने की आशंका
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तों निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई को कई बार पार्टी के दूसरे विधायक कठोर कार्रवाई के रूप में देखते हैं। इससे अंदरखाने असंतोष बढ़ने की संभावना और बढ़ सकती है। खासकर तब जब चुनाव के दौरान टिकट वितरण, नेतृत्व या लोकल राजनीति से जुड़ा हो। इससे पार्टी के भीतर ही इंटरनल गुट मजबूत हो सकते हैं। भविष्य में और बगावत या क्रॉस वोटिंग का खतरा और बढ़ जाता है।
3. कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम और मनोबल पर असर
जब विधायक को निलंबित किया जाता है, तो उसके समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी पैदा हो सकती है। इससे बूथ स्तर पर संगठन कमजोर हो सकता है। इसका दीर्घकालिक असर चुनावी तैयारी और जमीनी नेटवर्क को भी प्रभावित करता है। विशेषज्ञों की मानें तो निलंबित विधायक खुलकर सार्वजनिक मंच पर पार्टी नेताओं और उनकी नीतियों के खिलाफ कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच सक्रिय रहेंगे, जिससे नुकसान होना तय है। निलंबित किए गए विधायक इजराइल तो सार्वजनिक मंच पर ऐसा कर भी चुके है।
4. विपक्ष को पॉलिटिकल नैरेटिव बनाने का मौका
कांग्रेस की इस कार्रवाई के खिलाफ दूसरे राजनीतिक दल खासकर बीजेपी यह प्रचार कर सकती है कि पार्टी के अंदर अस्थिरता और असंतोष है। इससे कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं में राजनीतिक छवि पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसका सबसे अच्छा उदाहरण नैरेटिव के रूप में “पार्टी अपने विधायकों को संभाल नहीं पा रही” या “नेतृत्व कमजोर है”। पूर्व राज्यसभा सांसद व भाजपा नेत्री किरण चौधरी का बयान भी इसे लेकर आ चुका है। उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा पर निशाना साधते हुए कहा कि जिसके नेतृत्व के अंदर ये सब हुआ, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
5. उपचुनाव की स्थिति में ज्यादा जोखिम
अगर मामला आगे बढ़कर निष्कासन या इस्तीफे तक पहुंच जाए, तो सीट खाली हो सकती है। ऐसे में उपचुनाव में हार का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पार्टी की संख्या और कम हो सकती है। निलंबित विधायक अक्सर अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार रखते हैं। उनके अलग होने से स्थानीय स्तर पर वोट बैंक और संगठनात्मक ढांचा प्रभावित हो सकता है। इससे विधानसभा या लोकसभा चुनाव में सीट हारने का जोखिम बढ़ सकता है।
क्या फायदा पार्टी को होगा, यहां पढ़िए…
1. अनुशासन का सख्त संदेश
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान ने पांच विधायकों के निलंबन से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी लाइन के खिलाफ जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। इससे अन्य विधायकों और नेताओं में अनुशासन बना रहेगा। भविष्य में राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग या बगावत की संभावना कम हो सकती है।
2. हाईकमान की पकड़ मजबूत दिखती है
विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में विधायकों के खिलाफ कार्रवाई से यह दिखा दिया है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व का फैसला ही निर्णायक होगा। इसके अलावा हाईकमान राज्य स्तरीय पार्टी गतिविधियों को लेकर भी एक्टिव है। इससे संगठन के अंदर नेतृत्व की विश्वसनीयता बढ़ेगी। ये संदेश भी जाएगा कि पार्टी कमजोर नहीं, बल्कि नियंत्रण में है।
3. भविष्य के चुनावी कंट्रोल और प्लानिंग मजबूत होगी
निलंबन के बाद पार्टी उम्मीदवार चयन, व्हिप और वोटिंग प्रबंधन को लेकर ज्यादा अलर्ट हो जाएगी। इससे अगले राज्यसभा या विधानसभा चुनाव में रणनीतिक तैयारी बेहतर होगी। अगर विपक्ष यह आरोप लगाता है कि पार्टी में अराजकता है, तो निलंबन दिखाता है कि पार्टी ने तुरंत कार्रवाई की है और स्थिति को संभाल लिया है। राजनीतिक नैरेटिव को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
इन तीन कारणों ने निष्कासन से बचाया…
2028 के राज्य सभाचुनाव
बता दें कि 2028 में राज्यसभा की 2 सीटों के चुनाव हैं। कांग्रेस को 31 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। 5 को निष्कासित कर दिया जाता तो 32 बचते। इससे मामला फंसने की संभावना बनती। ऐसे में निलंबन का विकल्प चुना। सूत्रों का कहना है कि पार्टी 2028 तक इनकी गतिविधियां देखेगी। उस वक्त चुनाव में क्रॉस वोटिंग जैसी बात आती है तो फिर निष्कासन हो सकता है। है। पार्टी के प्रति वफादार रहते हैं तो सस्पेंशन को खत्म भी किया जा सकता है।
पहले भी क्रॉस वोटिंग पर नहीं हुई थी कार्रवाई
कांग्रेस हाईकमान ने यह फैसला सख्त संदेश देने के लिए भी किया है। दरअसल, 2016 और 2022 के राज्यसभा चुनाव में खेला होने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। इस बार कई सीनियर नेताओं ने कहा कि तब सख्त एक्शन लिया होता तो अब ऐसी नौबत नहीं आती। इसलिए विधायकों का निलंबन यह संदेश देने के लिए किया गया कि पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
2029 के विधानसभा चुनाव पर नजर
हरियाणा में 2029 में विधानसभा चुनाव होने हैं। फिलहाल सख्त निर्णय से पार्टी को कोई नुकसान भी नहीं। कांग्रेस हरियाणा में 2024 में आपसी खींचतान में ही सत्ता से चूक गई थी। तब हाईकमान ने कमेटी से फीडबैक कराया था। इसके बाद से संगठन से जुड़े बड़े निर्णय हाईकमान ने ही लिए हैं। यह कार्रवाई भी राज्य अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति की अनुशंसा पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी के बाद हुई।
निलंबन पर विधायकों ने इस तरह दी प्रतिक्रिया…
रतिया विधायक बोले- बहुत धक्का हुआ
रतिया से विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि हमारे साथ बहुत धक्का हुआ है। हमारी सुनवाई नहीं हुई। जवाब मांगा था, मैंने लिखित में दे दिया था। मगर, बाद में हमें बुलाना चाहिए था। एक तरफा कार्रवाई हुई है, जिसका हमें बहुत दुख हुआ है। दुख तो इसी बात का है कि जिस आदमी की वफादारी की है, उसी ने यह सिला दिया है।
शैली चौधरी बोलीं- हमें कोई चिट्ठी नहीं मिली
कांग्रेस पार्टी से निलंबन किए जाने पर नारायणगढ़ से विधायक शैली चौधरी का पहला रिएक्शन आया है। उन्होंने बताया कि अभी उन्हें इस मामले में कोई चिट्ठी पार्टी की ओर से प्राप्त नहीं हुई है। जब तक वह उन्हें नहीं मिल जाती, तब तक वह इस मामले में कुछ नहीं कह पाएंगी। कहा कि वह अभी अपने परिवार के साथ हरियाणा से बाहर आई हुई हैं। संडे को उन्होंने लौटने की बात कही है।
इजराइल बोले-हलके के लिए क्रॉस वोट किया
हथीन विधायक मोहम्मद इसराइल ने कहा-इलाके के लोगों की भलाई के लिए क्रॉस वोट किया था। कांग्रेस का राज्यसभा का उम्मीदवार पसंद नहीं था। देश में लोकतंत्र है और कोई किसी को भी अपना वोट दे सकता है। हाईकमान का फैसला मंजूर है। किसी दूसरी पार्टी में जाने का मन में विचार नहीं है। इलाके के लोगों को एकत्रित करूंगा।
इलियास बोले-कुछ नहीं कहूंगा
पुन्हाना विधानसभा मोहम्मद इलियास ने कहा-पार्टी का अधिकार है, हम इसमें कुछ नहीं कह सकते, वह चाहे जो कर सकते हैं। BJP या दूसरी किसी पार्टी में शामिल होने वाले सवाल पर वे चुप्पी साध गए।
साढौरा विधायक रेनू बाला का फोन बंद
उधर, साढौरा की विधायक रेनू बाला का मोबाइल फोन फिलहाल स्विच ऑफ है। उनके निजी सहायक (पीए) रवि ने बताया कि मैडम आज एक पारिवारिक कार्यक्रम में व्यस्त हैं। सस्पेंशन का आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। हालांकि, 20 मार्च को उनका एक बयान सामने आया था। इसमें उन्होंने कहा था कि कुछ नेता चाहते हैं कि विधायक उनके पीछे चलें। ऐसा न करने पर राजनीति करते हैं।
