• संविधान को तोड़ने का प्रयास

रोहतक में कांग्रेस के शहरी जिलाध्यक्ष कुलदीप केडी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार संसद में जो संविधान संशोधन के नाम पर 131वां संशोधन बिल पेश कर रही है, वह संविधान को तोड़ने की कोशिश है। परिसीमन प्रक्रिया के नाम पर सरकार सत्ता संतुलन को अपने पक्ष में करना चाहती है, जिसे देश की जनता किसी भी सूरत में कामयाब नहीं होने देगी।

कुलदीप केडी ने कहा कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के साथ ही लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों को बढ़ाने के लिए भी परिसीमन का बिल ला रही है। कांग्रेस इस बिल के पेश करने के तरीके के खिलाफ है। संविधान की प्रस्तावना की शुरुआत ही हम भारत के लोग शब्दों से शुरू होती है, जिन्होंने संविधान को खुद पर लागू किया है।

कुलदीप केडी ने कहा कि देश के संविधान के अनुच्छेद 82 में यह सपष्ट तौर पर लिखा है कि किसी भी सूरत में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों को बढ़ाए जाने से पहले जनगणना करवाना अनिवार्य है। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण व संख्या विधिसंगत है।

जनगणना से ही महिलाओं का सही मिलेगा आंकड़ा
कांग्रेस शहरी जिलाध्यक्ष कुलदीप ने कहा कि जनगणना के आधार पर किसी भी इलाके में वहां महिलाओं की सही संख्या के आंकड़े सामने आ जाएंगे। उन्हीं आंकड़ों के आधार पर यदि केंद्र सरकार महिलाओं के आरक्षण का बिल लाती तो कांग्रेस भी उनके साथ होती। पिछड़ी जाति की महिलाओं की संख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों में महिला आरक्षण लागू होना चाहिए।

संविधान को तोड़ने का किया जा रहा प्रयास
कुलदीप केडी ने कहा कि केंद्र सरकार ने बिना जातिगत जनगणना करवाए, महिला आरक्षण का बिल पेश किया, जो न्यायसंगत नहीं है। संविधान संशोधन के नाम पर संविधान को तोड़ने की कोशिश है। कांग्रेस कभी नहीं चाहेगी कि संविधान संशोधन के नाम पर संविधान को तोड़ा जाए। जातिगत जनगणना को नजरअंदाज कर ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है।

लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने का प्रयास
कुलदीप केडी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन प्रक्रिया के जरिए सत्ता संतुलन को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है। लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की दिशा में एक चिंताजनक कदम है, जिसका कांग्रेस विरोध कर रही है।