• पंचकूला परंपरागत सीट पर नाराजगी का डर

हरियाणा के पंचकूला में मेयर चुनाव को लेकर BJP की मीटिंग के बावजूद 3 दिन से प्रत्याशी का ऐलान नहीं हो पा रहा है। इसके पीछे वजह सामने आई है कि पंचकूला और सोनीपत में से एक ही जगह वैश्य कैंडिडेट को BJP उतारना चाह रही है।

पंचकूला में फिलहाल मेयर कुलभूषण गोयल वैश्य समुदाय से आत हैं। वहीं सोनीपत मेयर राजीव जैन भी वैश्य समुदाय से हैं। हालांकि राजीव जैन का मौका उस वक्त लगा था जब निखिल मदान को मेयर से इस्तीफा दिलवा कर MLA का टिकट दिया गया था। खाली हुई सीट पर उपचुनाव में राजीव जैन मेयर चुने गए थे। लेकिन अब दोनों ही जगह पर वैश्य समुदाय से मेयर हैं।

पंचकूला मेयर सीट BJP में परंपरागत तौर पर वैश्य समुदाय की रही

पंचकूला मेयर सीट BJP में परंपरागत तौर पर वैश्य समुदाय की रही है। लेकिन पार्टी राजीव जैन का टिकट भी नहीं काटना चाह रही। इससे सोनीपत में गलत संदेश जाएगा। ऐसे में पार्टी पंचकूला से वैश्य समुदाय का चेहरा नहीं उतारती है तो फिर पंजाबी चेहरे तरूण भंडारी को टिकट दे सकती है। तरूण भंडारी आजकल सीएम के राजनीतिक सचिव हैं। संभव हे कि आज देर शाम तक दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष मेयर प्रत्याशियों के नाम का घोषणा कर सकते हैं।

संगठन को एकजुट करने की कोशिश

सुधा भारद्वाज मेयर पद के अन्य दावेदारों से भी लगातार संपर्क साध रही हैं, ताकि सभी को साथ लेकर चुनाव मैदान में उतरा जा सके। वहीं आज उन्होंने जिला प्रधान संजय चौहान के साथ भी कार्यालय में मीटिंग की। कांग्रेस की ओर से यह रणनीति चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और व्यापक समर्थन जुटाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

कांग्रेस प्रत्याशी ने खोला चुनाव कार्यालय

BJP भले ही अभी तक नगर निगम चुनाव को लेकर प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है, लेकिन कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मेयर पद की कांग्रेस प्रत्याशी सुधा भारद्वाज ने अपना चुनाव कार्यालय खोल दिया है। कार्यालय का उद्घाटन कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन ने किया।

कार्यालय खुलने के साथ ही सुधा भारद्वाज ने चुनाव प्रचार की शुरुआत भी कर दी है। फिलहाल वे पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर संगठन को मजबूत करने में जुटी हैं। इसके साथ ही पार्टी में नाराज चल रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने का दौर भी शुरू कर दिया गया है।

सुधा भारद्वाज ने अपने पति संजीव भारद्वाज के साथ कांग्रेस के बड़े पंजाबी नेता रविंद्र रावल के निवास पर जाकर मुलाकात की। रावल टिकट के प्रबल दावेदार थे लेकिन चंद्रमोहन के विरोध की वजह से उनको टिकट नहीं मिली। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले पार्टी के भीतर एकजुटता दिखाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।