हिसार में कांग्रेस सांसद जयप्रकाश ने पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की सद्भाव यात्रा को लेकर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बृजेंद्र सिंह अब कांग्रेस का हिस्सा हैं और पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर काम कर रहे हैं। राहुल गांधी ने भी यात्रा को लेकर सकारात्मक संदेश दिया और कहा कि जो भी यात्रा करेगा वह अच्छी बात है।
जयप्रकाश ने कहा कि बृजेंद्र सिंह ने राजनीति की शुरुआत बीजेपी से की थी और प्रदेश की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति को समझने के लिए उन्होंने यह यात्रा निकाली। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के कई बड़े नेता इस यात्रा में शामिल नहीं हुए।
किसानों में पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह को लेकर नाराजगी
कांग्रेस सांसद जयप्रकाश ने बताया कि वे स्वयं भी इस यात्रा में नहीं गए। इसके पीछे उन्होंने दो बड़े कारण बताए। पहला, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पार्टी प्रभारी ने इस यात्रा को अधिकृत यात्रा नहीं बताया था। दूसरा और सबसे बड़ा कारण किसानों में बृजेंद्र सिंह को लेकर नाराजगी है।
उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार तीन कृषि कानून लेकर आई थी और देशभर में किसान आंदोलन चल रहा था, उस समय बृजेंद्र सिंह बीजेपी में थे। किसान आंदोलन के दौरान 730 किसानों की मौत हुई थी, जिसकी पीड़ा आज भी किसानों के मन में है।
जयप्रकाश ने कहा कि किसानों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि उस समय बीजेपी के साथ खड़े रहने वाले नेता अब कांग्रेस में आकर नई राजनीति करना चाहते हैं। यही कारण रहा कि प्रदेश के कई कांग्रेस नेता और किसान वर्ग इस यात्रा से दूरी बनाए रहे।
सफाई कर्मचारियों की मांगों का समर्थन
सांसद जयप्रकाश ने सफाई कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार के 11 साल के कार्यकाल में कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने न तो स्थायी भर्ती की और न ही एचकेआरएन के माध्यम से पर्याप्त नियुक्तियां कीं। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की तनख्वाह वर्षों से नहीं बढ़ाई गई।अगर आज भी यूपीए सरकार होती और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की नीतियां लागू होतीं तो सफाई कर्मचारियों की स्थिति कहीं बेहतर होती।
उन्होंने बीजेपी को किसान, मजदूर और कर्मचारी विरोधी बताते हुए कहा कि सरकार कर्मचारियों से बातचीत तक नहीं करना चाहती। सांसद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी 10 से 15 साल से कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को नियमित करने के आदेश दे चुका है, लेकिन सरकार ने कर्मचारी हितैषी फैसलों को लागू नहीं किया।
