- जनमत को स्वीकार, कांग्रेस जनता को गलत ठहरा रही
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कांग्रेस पर जनता का अपमान करने का आरोप लगाया है। कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में उन्होंने कहा कि हरियाणा की जनता ने हाल में ही हुए निकाय चुनाव में भाजपा पर भरोसा जताया, लेकिन कांग्रेस हार स्वीकार करने की बजाय जनता को ही गलत ठहराने की कोशिश कर रही है।
शिक्षा मंत्री रविवार दोपहर को शाहाबाद रेस्ट हाउस पहुंचे थे। यहां उन्होंने चुनावी नतीजों से लेकर कॉलोनियों, विकास कार्यों और हरियाणा बोर्ड के रिजल्ट तक कई मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने उन समस्याओं को हल किया, जिन्हें पिछली सरकारों ने सालों तक नजरअंदाज किया।
बोले- कांग्रेस के लोग बुलडोजर भेजते थे
ढांडा ने कहा कि शहरों में बनी ज्यादातर कॉलोनियां पहले अवैध घोषित कर दी गई थीं। वहां न सड़कें थीं, न पानी, न बिजली और न ही सीवर की व्यवस्था। जब कोई कांग्रेस की सरकार में इसकी बात करता था, तो उनको सिर्फ नोटिस और बुलडोजर भेजने का डर दिखाया जाता था। भाजपा सरकार ने इन कॉलोनियों को वैध करने का काम किया और वहां मूलभूत सुविधाएं पहुंचाईं।
कांग्रेस को कौन देगा आशीर्वाद
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के समय में लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिलता था। जब लोग मांग लेकर जाते थे तो उन्हें सुविधाएं देने की बजाय कॉलोनी तोड़ने की धमकी दी जाती थी। ऐसी सोच रखने वाले लोग जनता का आशीर्वाद कैसे उम्मीद कर सकते हैं। जनता ने प्रधानमंत्री के विकास मॉडल और हरियाणा सरकार के कामों पर भरोसा जताया है।
हम भी चुनाव हार चुके
उन्होंने कहा कि हमने भी कई चुनाव हार चुके हैं, लेकिन हमने कभी हार के बाद जनता या ईवीएम पर सवाल नहीं उठाए। जनता का फैसला सर्वोपरि है। अगर जनता हमें सत्ता से बाहर करती है तो हम उसका सम्मान करते हैं। कांग्रेस को भी जनता के फैसले को स्वीकार करना चाहिए।
हमारा रिजल्ट CBSE के बराबर
शिक्षा मंत्री ने हरियाणा बोर्ड के 10वीं के रिजल्ट पर भी बात की। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले प्रदेश का रिजल्ट करीब 53 प्रतिशत के आसपास रहता था, लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद लगातार सुधार हुआ है। इसका श्रेय शिक्षकों और छात्रों की मेहनत को जाता है। आज हमारा रिजल्ट CBSE के बराबर पहुंच चुका है।
सोशल मीडिया पर व्यवस्था नहीं बनती
ढांडा ने कहा कि टीचर और बच्चों की मेहनत का नतीजा है कि हर साल रिजल्ट बेहतर हो रहा है। सिर्फ सोशल मीडिया पर बैठकर स्कूलों और शिक्षकों को कोसने से शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होती। जो लोग आज शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अपने समय की स्थिति भी याद करनी चाहिए।
