• सोच समझकर दें बयान

फतेहाबाद में पूर्व कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र सिंह बबली ने राज्यसभा सांसद सुभाष बराला और कांग्रेस विधायक परमवीर सिंह पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अपनी हार के बाद क्षेत्र में विकास कार्यों के रुकने और भ्रष्टाचार बढ़ने का आरोप लगाया।

बबली ने कांग्रेस विधायक रामकरण काला के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें काला ने जेजेपी तोड़ने के लिए 50 करोड़ रुपए का ऑफर देने का आरोप लगाया था। बबली ने कहा कि ऐसे बयान सोच-समझकर देने चाहिए, क्योंकि इससे विधायक के प्रति मन में सम्मान कम हुआ है। उन्होंने मनगढ़ंत बयान न देने की सलाह दी।

‘चुनाव हारने के बाद से पूरा क्षेत्र आराम कर रहा है’

अपनी हार के बाद क्षेत्र के हालात पर बबली ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उनके चुनाव हारने के बाद से पूरा क्षेत्र ‘आराम कर रहा है’ और विकास कार्य भी ठप पड़े हैं। बबली ने भ्रष्टाचार बढ़ने का भी आरोप लगाया और कहा कि लोग पैसे मांगे जाने की शिकायत करते हैं।

सुभाष बराला को राज्यसभा भेजे जाने के संबंध में बबली ने एक खुलासा किया। उन्होंने बताया कि भाजपा में शामिल होने से पहले उन्होंने मनोहर लाल खट्टर से बात की थी। बबली ने स्पष्ट किया था कि अगर बराला टोहाना या फतेहाबाद से चुनाव लड़ते हैं तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। उनके अनुसार, उनकी सहमति के बाद ही बराला को राज्यसभा भेजा गया, क्योंकि उनमें ‘कोई खासियत नहीं थी’।

जनता से परमवीर सिंह का सरोकार नहीं

परमवीर सिंह पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि परमवीर के परिवार ने कथित तौर पर भगत सिंह को फांसी दिलाने में गवाही दी थी, और उन्हें ‘देश और टोहाना का गद्दार’ बताया। बबली ने परमवीर सिंह के हुड्डा सरकार में मंत्री रहते हुए टोहाना में कोई बड़ा प्रोजेक्ट न लाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि वे जीतकर पंचकूला बैठ जाते हैं, जनता से उनका सरोकार नहीं है।

बबली ने यह भी आरोप लगाया कि 2019 में उनके विधायक बनने के बाद सरकारी दफ्तरों में पूर्व विधायक के लोग बैठते थे, और अब भी वही स्थिति है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार बढ़ा है और लोग दुखी हैं।

बबली ने दावा किया कि 2015 में उनके निर्दलीय लड़ने से भाजपा प्रत्याशी जीता था, और अगर वह चुनाव न लड़ते तो सुभाष बराला विधानसभा का मुंह नहीं देख पाते। बबली ने कहा कि इस विधानसभा चुनाव में एक शेर को हराने के लिए सभी लकड़बग्घे इकट्ठे हुए थे।