• गोपाल कांडा ने उठाए सरकारी कार्यों पर सवाल

सिरसा शहर के विकास को लेकर हर शहरवासी परेशान है। अब बरसाती सीजन आने वाला है और बारिश में शहर डूबने की स्थिति में होगा। इससे पहले चेयरमैन और नेताओं के भी बयान बदल गए हैं। कुछ दिनों पहले तक हर कोई विकास के दावे करते थे। अब इसके बिलकुल विपरित है और उन बयानों से बदल गए हैं।

इस समय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं सिरसा की कमान संभाल ली है। मगर उसका धरातल पर कोई असर नहीं नजर आ रहा। पूर्व गृह मंत्री गोपाल कांडा ने भी सरकार के खिलाफ सरकारी कार्यों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में दावा किया है कि नगर परिषद के अंतर्गत हो रहे निर्माण कार्यों एवं सड़क-गलियों के टेंडर ठेकेदारों द्वारा एक-दूसरे से प्रतिद्वंद्विता करते हुए 25 से 30 प्रतिशत तक निम्न रेटों में लिए जा रहे हैं। ठेकेदार घटिया सामग्री का निर्माण करता है।

शहर में सड़क व गलियों के निर्माण कार्यों का टेंडर ज्यादातर एक-दो ठेकेदार के पास है। पहले गोपाल कांडा के छोटे भाई गोबिंद कांडा स्वयं चेयरमैन के साथ गलियों के निर्माण कार्य शुभारंभ पर नारियल फोड़ते नजर आते थे। पिछले कुछ समय से ऐसा नहीं देखा जा रहा है।

चेयरमैन ने पब्लिक हैल्थ पर फोड़ा ठीकरा

एक तरफ नगर परिषद नगर चेयरमैन वीर शांति स्वरूप विकास न होने का ठीकरा पब्लिक हेल्थ पर फोड़ दिया है और कहना है कि सीवरेज व पेजयल पाइप लाइन न बिछाने पर अड़चन बन गई है। चेयरममैन अकेले सीएम नायब सिंह से जाकर मिले थे और ज्ञापन सौंपा था।

दूसरी ओर हलोपो सुम्रीमो गोपाल कांडा एवं बीजेपी नेता गोबिंद कांडा अलग से सीएम को पत्राचार कर रहे हैं और शहर में अस्त-वस्त पड़े कार्यों को पूरा करने एवं पेयजल जैसी समस्याओं के समाधान के लिए टयूबवैल कनेक्शन की मांग के लिए पत्राचार कर चुके हैं।

निम्न दरों पर टेंडर, क्वालिटी में दिक्कत

शहर में टूटी सड़कें और पेयजल की भारी समस्या है। सड़कों व गलियों के टेंडर हो चुके हैं, लेकिन निम्न दरों पर टेंडर होने से क्वालिटी में दिक्कत आ रही है। सड़क या गली निर्माण में बेहतर सामग्री का इस्तेमाल न होने से वे जल्दी टूट जाती है। इस वजह बाजार के दुकानदार भी परेशान है, क्योंकि काफी गलियों-सड़कों की हालत खस्ता है। जो कार्य अटकें है या सही ढंग से नहीं हो रहे, इनके लिए कोई भी जिम्मेदारी नहीं ले रहा है।

ईओ से लेकर आयुक्त तक बदले

सरकार की ओर से नगर परिषद में ईओ से लेकर नगर आयुक्त तक बदल दिया गया। अब नगर परिषद में इंजीनियर व टेक्निकल स्टाफ की भारी कमी बताई जा रही है। जिससे हर कार्य समय पर नहीं हो रहे। चाहे वह नक्शे पास का काम हो या विकास कार्यों से जुड़ा।

पहले मंत्री बेदी के पास थी कमान

इससे पहले सिरसा की कमान कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी के पास थी। वे ही स्वयं दौरे के लिए सिरसा आते थे और विकास कार्यों पर चर्चा करते थे। कालांवाली निकाय चुनाव में मिली हार के बाद बदलाव हो गया। सिरसा के विकास को लेकर भी काफी कंप्लेंट थी। इस बीच सीएम नायब सैनी ने स्वयं सिरसा की कमान संभाली। हाल ही में सीएम सैनी के दो दौरे हो चुके हैं और अब तो ग्रीवेंस मीटिंग भी खुद लेने की बात सामने आई है।

सीवरेज या स्ट्रांग वाटर काम चल रहा

शहर में सड़क एवं गलियों का बुरा हाल है। हर जगह पेयजल या सीवरेज पाइप लाइन या स्ट्रांग वाटर काम चल रहा है। सालभर से ज्यादा का समय बीत गया, पर ये काम पूरे नहीं हुए। इसके लिए पूरे शहर में गलियां व सड़कें उखाड़ दी गई है। खास बात है कि जहां सीसी से बनी सड़क उखाड़ी थी, वहां काम पूरा होने के बाद इंटरलॉक ईंटें सही से नहीं लगाई गई। बरसाती सीजन में ईंटें उखड़ने का डर है, सफाई की भी बदहाली है।

शहर में कई जगह नई गलियां है, वो भी लेवल में सही से न बनाने पर लोगों में रोष का माहौल है। लोगों की मांग है कि सड़कें व गलियां दुरस्त करवाई जाए, ताकि वाहन ड्राइवरों का आवागमन सुगम हो।