• अब जिन सीटों पर हारे थे, उस पर खास फोकस

हरियाणा भाजपा को 43 साल बाद डॉ. अर्चना गुप्ता के रूप में महिला प्रदेश अध्यक्ष मिली है। चिकित्सक से संगठन की इस जिम्मेदारी तक पहुंची डॉ. गुप्ता इसे महिला सशक्तिकरण और संगठन विस्तार का अवसर मानती हैं। उनका कहना है कि भाजपा की ताकत उसके कार्यकर्ता हैं और संगठन को उन क्षेत्रों में और मजबूत किया जाएगा जहां इसकी पहुंच कम है। एक रेडियोलॉजिस्ट से प्रदेश अध्यक्ष तक का उनका सफर किन चुनौतियों और अनुभवों से होकर गुजरा। प्रस्तुत है डॉ. अर्चना गुप्ता से हुई विस्तृत बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल : आपकी पहली तीन प्राथमिकताएं क्या होंगी?
जवाब : मेरी पहली प्राथमिकता उन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करना है, जहां हम अभी कमजोर हैं। दूसरी प्राथमिकता महिलाओं को पार्टी के साथ जोड़ना है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि महिलाएं अधिक से अधिक भारतीय जनता पार्टी की गतिविधियों में शामिल हों। तीसरी प्राथमिकता युवाओं को नई ऊर्जा, नया उत्साह और नए विचारों के साथ पार्टी में जोड़ना है। पुराने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन और अनुभव बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी के बिना संगठन आगे नहीं बढ़ सकता।

सवाल : 43 साल बाद भाजपा ने किसी महिला को प्रदेश अध्यक्ष चुना। पार्टी ने आपको ही क्यों चुना? इस पर आप क्या सोचती हैं।
जवाब : यह मोदी जी के महिला सशक्तिकरण के दृष्टिकोण का परिणाम है। उन्होंने महिलाओं के जीवन में छोटे-छोटे बदलावों के माध्यम से बड़ा प्रभाव डाला है। महिलाओं में नई ऊर्जा और विश्वास पैदा किया है। हरियाणा में भी इसी कड़ी में महिलाओं को जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया गया। मेरा यह चयन केवल व्यक्तिगत कारणों से नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और संगठन के विकास की दृष्टि से किया गया।

सवाल : संगठन कैसा होगा? क्या पुराने कार्यकर्ताओं के भरोसे ही काम चलेगा या नए लोगों को भी टीम में शामिल किया जाएगा?
जवाब : जिला अध्यक्षों का चुनाव हो चुका है और अब जिला स्तर से ऊपर की टीम पूरी तरह नई होगी। प्रदेश की टीम में नए पदाधिकारी होंगे और इसे जल्द ही घोषित किया जाएगा। हमारी कोशिश यही रहेगी कि संगठन में नई सोच, नई ऊर्जा और पुराने अनुभव का संतुलन बना रहे।

सवाल : कुछ लोग केवल पद के लिए पार्टी में आते हैं। क्या भाजपा में ऐसे लोगों की छुट्टी होगी?
जवाब : भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता-आधारित पार्टी है। हमारा फोकस वही लोग हैं जो पार्टी की नीतियों पर लगातार काम करते हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि संगठन में जिम्मेदारी केवल उन लोगों को मिले जो वास्तविक कार्यकर्ता हैं और पार्टी के विकास के लिए सक्रिय योगदान देते हैं।

सवाल : प्रदेश अध्यक्ष के रूप में निर्णय लेने में कितनी स्वतंत्रता होगी? अक्सर कहा जाता है कि अधिकतर फैसलों के लिए केंद्रीय नेतृत्व पर निर्भर रहना पड़ता है।
जवाब : केंद्रीय नेतृत्व और संगठन अलग-अलग नहीं हैं। उनके पास कार्यकर्ताओं का फीडबैक और व्यापक अनुभव होता है। अगर उन्होंने मुझ पर विश्वास जताकर प्रदेश अध्यक्ष जैसी जिम्मेदारी दी है, तो उनका मार्गदर्शन भी संगठन और प्रदेश के हित में ही होता है। कई बार कुछ बातें स्थानीय स्तर पर हमारी नजर से छूट सकती हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व तक अलग-अलग माध्यमों से जानकारी पहुंचती रहती है। इसलिए मैं इसे हस्तक्षेप नहीं, बल्कि संगठन को सही दिशा में आगे बढ़ाने वाला मार्गदर्शन मानती हूं।

सवाल : केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत व राव नरबीर के बीच खटपट की बातें अक्सर सामने आती रहती हैं। हाल ही कुलदीप बिश्नोई ने भी नाराजगी जाहिर की थी। सबको साथ लेकर कैसे चलेंगी।
जवाब : मैं इसे बड़ी चुनौती नहीं मानती। मेरे पद ग्रहण समारोह में सभी वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। थोड़े बहुत मतभेद सामान्य हैं, लेकिन कोई भी समस्या संगठन के काम को प्रभावित नहीं करती। सभी नेता अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं और हम सबका एक सामूहिक उद्देश्य है कि पार्टी की मजबूती के लिए काम करते रहे हैं।

सवाल : अगले साल पंजाब में चुनाव हैं। हरियाणा के नेताओं की पंजाब में क्या भूमिका होगी?
जवाब : पंजाब हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है। मुख्यमंत्री नायब जी लगातार वहां जा रहे हैं और लोगों से संवाद कर रहे हैं। आज पंजाब की जनता हरियाणा मॉडल को देख रही है, जहां भाजपा सरकार ने अपने वादों को धरातल पर उतारने का काम किया है। हमारी पहचान केवल घोषणाएं करने की नहीं, बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करने की है। जनता अब वादों और वास्तविक डिलीवरी के बीच का अंतर समझती है। मुझे विश्वास है कि पंजाब में भी लोग विकास, सुशासन और जवाबदेही की राजनीति को प्राथमिकता देंगे।

सवाल : जब आप राजनीति में आईं तो किसे देखकर आई थी।
जवाब : मोदी जी मेरी प्रेरणा हैं। मैं गुजरात से उनके नेतृत्व और नीतियों को नियमित रूप से फॉलो करती रही हूं। उनके नेतृत्व में महिलाओं और युवाओं के लिए अवसर और जिम्मेदारी हमेशा प्राथमिकता रही है।

सवाल : एक चिकित्सक से प्रदेश अध्यक्ष बनने तक का सफर कैसा रहा? इस यात्रा का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर कौन-सा था?
जवाब : यह सफर काफी सीख देने वाला रहा। जब मुझे महिला मोर्चा का जिला अध्यक्ष बनाया गया, तब संगठनात्मक कामकाज का ज्यादा अनुभव नहीं था। कई बार यह चिंता होती थी कि सभी को साथ लेकर कैसे चलूंगी और जिम्मेदारियों को कैसे निभाऊंगी। शुरुआती दौर में चुनौतियां भी आईं, लेकिन समाज और कार्यकर्ताओं का लगातार सहयोग मिलता रहा, जिसने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया।

सवाल : सुनने में आया है कि इस पद के लिए आपने मन्नतें भी मांगी थी
जवाब : आपको लगता है कि खाली मिन्नत करने से कुछ मिल जाता है। पार्टी में जिम्मेदारियां संगठन के शीर्ष नेतृत्व द्वारा कार्य, अनुभव और क्षमता के आधार पर तय की जाती हैं। मेरा मानना है कि व्यक्ति को अपना काम पूरी निष्ठा से करना चाहिए, बाकी निर्णय संगठन पर छोड़ देने चाहिए।

सवाल : अगर अगले एक साल बाद आपके काम का मूल्यांकन हो, तो आप किस पैमाने पर खुद को सफल मानेंगी
जवाब : मैं अपने काम का आकलन इस आधार पर करना चाहूंगी कि मैंने कितने नए लोगों को पार्टी से जोड़ा। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कितने बुद्धिजीवी वर्ग ने पार्टी की नीतियों को समझा और उनसे जुड़ा। मेरा प्रयास रहेगा कि कार्यकर्ताओं के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं और नीतियां अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचें। ये सभी मेरे लिए प्रमुख मूल्यांकन के आधार होंगे।

सवाल : 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 42 सीटें हारी थीं। इन सीटों पर क्या रणनीति होगी
जवाब : इन क्षेत्रों पर संगठन को मजबूत करना, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ना और योजनाओं को अंतिम स्तर तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता होगी।