उकलाना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक नरेश सेलवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने गांव सरसाना स्थित एक पुस्तकालय भवन को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में निर्मित भवनों पर भाजपा सरकार अपना नाम अंकित कर राजनीतिक श्रेय लेने का प्रयास कर रही है।
विधायक नरेश सेलवाल द्वारा साझा की गई पोस्ट में पुस्तकालय भवन पर लगे दो अलग-अलग शिलापट्टों की तस्वीरें दिखाई गई हैं। इनमें एक शिलापट्ट वर्ष 2012 का है, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में पुस्तकालय भवन के उद्घाटन का उल्लेख है। वहीं भवन पर हाल ही में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम का नया शिलापट्ट लगाए जाने को लेकर उन्होंने सवाल खड़े किए हैं।
विधायक बोले- कांग्रेस सरकार में पूर्व सीएम ने किया था उद्घाटन
पोस्ट में विधायक सेलवाल ने लिखा कि, जब प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी और चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे, तब 11 अप्रैल 2012 को गांव सरसाना में इस भवन का उद्घाटन उनके द्वारा किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने उसी भवन के साथ नया शिलापट्ट लगाकर उसका नाम बदलकर ‘अटल लाइब्रेरी’ कर दिया है।
विधायक ने कहा कि भाजपा सरकार कांग्रेस शासनकाल में बने प्रोजेक्ट्स पर अपना नाम थोपने का प्रयास कर रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार को उद्घाटन करना ही है तो पहले नई इमारत, भवन या परियोजना का निर्माण करे और उसके बाद उसका उद्घाटन करे।
महापुरुषों के नाम से संचालित पुस्कालयों के नाम बदलने का आरोप
नरेश सेलवाल ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न गांवों में महापुरुषों के नाम पर संचालित पुस्तकालयों के नाम बदले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत कबीर, शहीद भगत सिंह, चौधरी छोटूराम और महात्मा ज्योतिबा फुले जैसे महापुरुषों के नाम पर स्थापित लाइब्रेरियों का नाम बदलकर ‘अटल लाइब्रेरी’ किया जा रहा है, जो महापुरुषों के सम्मान के साथ-साथ लोगों की भावनाओं को भी प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर पुस्तकालय बनाना चाहती है तो नई इमारतों का निर्माण कर उनमें फर्नीचर, पुस्तकें और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाए तथा उसके बाद उनका उद्घाटन करे।
विधायक की इस पोस्ट के बाद क्षेत्र की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि इस मामले में भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
