• 111 बोर्ड-निगमों की समीक्षा की मांग

हरियाणा में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों को दोबारा नियुक्तियां और सेवा विस्तार देने का मुद्दा फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में लाखों शिक्षित युवा बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को बार-बार सेवा विस्तार देकर अहम पदों पर नियुक्त कर रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार “रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों की शरणस्थली” बन गई है, जबकि नई पीढ़ी को रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे।

संपत सिंह के 5 बड़े आरोप
1. युवा बेरोजगार, रिटायर्ड अफसरों को मिल रहे पद: संपत सिंह ने कहा कि प्रदेश में लाखों प्रतिभाशाली युवा नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार सेवानिवृत्त अधिकारियों को फिर से नियुक्त कर रही है। इससे युवाओं के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

2. सरकारी खजाने पर बढ़ रहा बोझ: उन्होंने दावा किया कि कई रिटायर्ड अधिकारियों को वेतन, भत्तों के साथ सरकारी वाहन, आवास और स्टाफ जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। इससे राज्य के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

3. 111 बोर्ड-निगमों की समीक्षा हो: इनेलो नेता के अनुसार प्रदेश के करीब 111 बोर्ड, निगम, प्राधिकरण, मिशन और अन्य सरकारी संस्थानों में रिटायर्ड अधिकारियों, सलाहकारों और राजनीतिक नियुक्तियों की समीक्षा की जानी चाहिए। अनावश्यक पद खत्म कर खर्च कम किया जा सकता है।

4. एक अधिकारी को कई सुविधाएं: संपत सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों के पास एक से अधिक सरकारी वाहन, आवास और कार्यालय हैं। सरकार यदि वास्तव में मितव्ययिता चाहती है तो ऐसी अतिरिक्त सुविधाएं वापस लेनी चाहिए।

5. खर्च कम करने की शुरुआत खुद सरकार करे: उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष और जनता को सादगी का संदेश दे रही है, लेकिन खुद बड़े आयोजनों, कार्यक्रमों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भारी खर्च कर रही है।

15 नहीं, 9 मंत्री भी काफी

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में खर्च कम करना चाहती है तो मंत्रियों और उनके स्टाफ का आकार घटा सकती है। उनके मुताबिक 15 मंत्रियों की जगह 9 मंत्रियों से भी सरकार का काम चल सकता है।

हरियाणा में पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न बोर्डों, आयोगों, निगमों और सलाहकार पदों पर सेवानिवृत्त नौकरशाहों की नियुक्तियों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि इससे युवाओं के लिए अवसर सीमित होते हैं, जबकि सरकार का पक्ष रहता है कि अनुभवी अधिकारियों का अनुभव प्रशासनिक कार्यों में उपयोगी होता है।