• ढांडा ने कहा-कामचोर ठेकेदार ब्लैकलिस्ट

कुरुक्षेत्र शहर में सफाई व्यवस्था, नालों की सफाई और नगर परिषद (नप) थानेसर के टेंडरों को लेकर जजपा नेता की BJP की नगर परिषद चेयरपर्सन माफी ढांडा के पति मलकीत ढांडा से बहस हो गई। जजपा की टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके योगेश शर्मा ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर कई आरोप लगाए।

वे बुधवार को नगर परिषद कार्यालय में पहुंचे थे। यहां योगेश शर्मा और मलकीत ढांडा के बीच कामों को लेकर काफी सवाल जवाब हुए। योगेश शर्मा ने शहर के विकास के लिए लगे टेंडर में धांधली और नालों की सफाई नहीं होने के आरोप जड़े। तो वहीं मलकीत ढांडा ने फाइल दिखाकर उनके आरोप का जवाब दिया।

ढांडा से पूछा- यहां दो कुर्सियां कैसे?

योगेश शर्मा ने प्रतिनिधि मलकीत ढांडा से पूछा कि यहां कार्यालय में 2 कुर्सियां क्यों पड़ी हैं? अगर पार्षद प्रतिनिधि नहीं आ सकता, तो आपको भी यहां आने का कोई अधिकार नहीं है। आपको किसी का कोई लेटर निकालने और अधिकारियों को धमकाने का कोई राइट नहीं है।

हर साल बिगड़ रहे हालात- योगेश शर्मा

पत्रकारों से बातचीत में योगेश शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि शहर में हर साल बरसात के दौरान हालात बिगड़ जाते हैं। कई कॉलोनियों में लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। कॉलोनियों में पानी भर जाता है। वे खुद अपने सेक्टर-3 में किश्ती चला चुके हैं। जलभराव की सबसे बड़ी वजह नालों की सफाई नहीं होना है।

हर साइन पर 2 परसेंट कमीशन देनी पड़ती है

योगेश शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि नगर परिषद के टेंडरों में ठेकेदार 40 परसेंट तक कम रेट पर काम लेने को तैयार हो जाते हैं। अब सवाल उठता है कि इतने कम रेट में क्वालिटी वाला काम कैसे होगा। आरोप लगाया कि इसके बाद ठेकेदारों को हर फाइल पर 2 परसेंट कमीशन भी देना पड़ता है।

एक साल में सफाई के दो-दो टेंडर, फिर भी नाले गंदे

योगेश शर्मा ने आरोप लगाया कि एक साल के अंदर नालों की सफाई के लिए 2 बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन आज भी शहर में कहीं भी नालों की सही तरीके से सफाई दिखाई नहीं देती। यह सफाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है। अगर कोई भी व्यक्ति शहर में निकलकर देखे तो किसी भी नाले की सही सफाई नहीं मिलेगी।

 

बोले- पूरे शहर का दौरा करा दो, हर गटर दिखाऊंगा

अधिकारियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे उन्हें शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक लेकर चलें। जहां जरूरत होगी, वे खुद गटर उठाकर दिखाने को तैयार हैं। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद शहर की हालत नहीं बदली। इसलिए जब भी अधिकारी बातचीत के लिए आएं तो अपने साथ पूरा रिकॉर्ड लेकर आएं।

सफाई पर खर्च का रिकॉर्ड करें सार्वजनिक

योगेश शर्मा ने मांग की कि पिछले एक साल में सफाई के लिए किस ठेकेदार को कितनी राशि का भुगतान किया गया, इसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। इससे लोगों को भी पता चल जाएगा कि कागजों में कितना काम दिखाया गया और जमीन पर वास्तव में कितना काम हुआ।

वकील को अपनी जेब से बनानी पड़ी गली

योगेश शर्मा ने कहा कि शहर की बदहाल व्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि एक वकील को अपनी गली खुद अपने पैसे से बनवानी पड़ी। आज तक कोई अधिकारी यह पूछने तक नहीं पहुंचा कि ऐसी नौबत क्यों आई। इससे साफ पता चलता है कि अधिकारी जनता की समस्याओं को लेकर कितने गंभीर हैं।

इन सबकी निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए

आरोप लगाया कि जहां-जहां फाइल पर साइन होते हैं, वहां कमीशन देना पड़ता है। शहर के अधिकांश बुनियादी काम नगर परिषद के जिम्मे हैं। अगर नगर परिषद ही अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाएगी तो शहर की हालत कभी नहीं सुधरेगी। सफाई व्यवस्था, नालों की सफाई, सड़क निर्माण और टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

 

काम नहीं करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट कर रहे- ढांडा

उधर, नगर परिषद की चेयरपर्सन के पति मलकीत ढांडा ने योगेश शर्मा के सवालों का जवाब भी दिया। वे बीच-बीच में उनके सवाल का जवाब देते रहे। उन्होंने कहा कि काम नहीं करने वाले ठेकेदारों का ब्लैकलिस्ट भी किया गया। शरह में नालों की सफाई का 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

नालों की सफाई का काम काफी समय से चल रहा है। कई बार किसी ना किसी कारण दिक्कत आ जाती है। वे खुद अधिकारियों को साथ लेकर फील्ड जाते हैं। शहर के विकास के लिए काम कर रहे हैं।