- बादली विधायक बोले-ब्राह्मणों को टारगेट किया जा रहा
भिवानी के 54 फुटा रोड़ स्थित संस्कृति सदन में रविवार को भरत तिवारी की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की, जिसमें विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं छात्र संगठनों के प्रतिनिधि पहुंचे। उपस्थित जनसमूह ने 2 मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी और पीड़ित परिवार के लिए तुरंत न्याय की मांग उठाई।
इस दौरान झज्जर के बादली से विधायक कुलदीप वत्स ने कहा कि इस सरकार द्वारा खासकर ब्राह्मण समाज को टारगेट किया जा रहा है। चाहे वह भरत तिवारी के रूप में हो, यूपी या हरियाणा हो। यहां की बेटी मनीषा के साथ इतना बड़ा दुराचार कर मर्डर किया। सीबीआई जांच के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा गंगानगर की बेटी की मामला इसी तरह का है।
उन्होंने कहा कि 36 बिरादरी ने यह ठाना है कि जिस भी समाज के साथ कहीं पर भी कोई अन्याय होगा, ब्राह्मण समाज व 36 बिरादरी हर उस अन्याय के खिलाफ लड़ने का काम करेंगी।
भरत तिवारी की तुलना भगत सिंह से की
विधायक कुलदीप वत्स ने कहा कि वे खुद भी भरत तिवारी के घर गए। आजादी के बाद आज का शहीद भगत सिंह कहूं तो भरत तिवारी था। जिसने अपना घर नहीं देखा और 36 बिरादरी की आवाज को उठाया। उसके पास जो 40 लाख रुपए थे, वे भी समाज सेवा में लगा दिए।
जैसे जरनल डायर ने भारतीय सैनिकों को भूना था, उसी प्रकार से पुलिस ने तिवारी को भूना। उसकी आवाज को दबाया गया। खासकर ब्राह्मण समाज को टारगेट करने का काम किया है। यहां से आवाज उठी है कि भाजपा के सीएम इस्तीफा दें। भरत तिवारी व उसके परिवार को न्याय मिले और दोषियों को सजा मिले।
फरटिया बोले- तिवारी गरीब आदमी की बात करता था
लोहारू के विधायक राजबीर फरटिया ने कहा कि भरत तिवारी हमारे बीच नहीं रहा, जो गरीब आदमी की आवाज उठाता था। अपने क्षेत्र के मुद्दों को उठाता था। उसकी निर्मम हत्या की गई है। प्रजातंत्र में जीने का हक सभी को है। एंकाउंटर का नाम लेकर जबरदस्ती पुलिस ने गोलियों से उसके शरीर को छलनी कर हत्या की।
जिस प्रकार भगत सिंह ने देश के लिए आहुति दी थी, उसी प्रकार से उस नौजवान साथी ने अपनी जान की आहुति दी है। अपने समाज के लिए लड़ते-लड़ते जो मरा है, उसको श्रद्धांजलि देने के लिए आज इकट्ठा हुए हैं।
कई लोग रहे मौजूद
समाजसेवी एवं पूर्व छात्र नेता उमेश भारद्वाज ने कहा कि यह श्रद्धांजलि सभा कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था के अन्याय के खिलाफ समाज की सामूहिक चेतना का शंखनाद है। उन्होंने युवाओं और समाज के सभी वर्गों से लोकतांत्रिक व शांतिपूर्ण तरीके से इस लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि पीड़ित परिवार का न्याय प्रणाली में विश्वास बहाल हो सके।
इस मार्च में विनोद उमरावत, देवराज मेहता, समीर खटीक, मंजीत लांगायन, बीरसिंह ठाकुर, प्रवेश शर्मा, कालू प्रधान मानहेरू, दिनेश, ग्रेनेड, रामफल आदि उपस्थित रहे।
