- बोले-सरकारी स्कूल और विश्वविद्यालय बदहाल
सोनीपत पहुंचे इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक एवं हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री प्रो. सम्पत सिंह ने राज्य की भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी शिक्षा को लगातार कमजोर कर निजी शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा दे रही है, जिसके कारण सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों की स्थिति बदहाल होती जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में हजारों शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, विश्वविद्यालय आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और सरकारी अनुदान के बजाय कर्ज देकर उच्च शिक्षा संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है।
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि यदि समय रहते शिक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया तो इसका सबसे बड़ा नुकसान हरियाणा के युवाओं के भविष्य पर पड़ेगा। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालयों की स्थिति, शिक्षकों की कमी, सरकारी फंड, रोजगार, प्रदेश में सामने आए कथित घोटालों और कानून व्यवस्था जैसे कई मुद्दों पर सरकार को घेरा तथा शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग उठाई।
शिक्षा को कमजोर कर निजीकरण बढ़ाने का आरोप
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि हरियाणा सरकार सरकारी शिक्षा की लगातार उपेक्षा कर रही है और निजी शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा दे रही है। उनका कहना था कि शिक्षा किसी भी समाज और राज्य के विकास की सबसे मजबूत नींव होती है, लेकिन सरकार ने प्री-प्राइमरी स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर होने दिया। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर प्रदेश के विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है।
साक्षरता और शिक्षा बजट पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में हरियाणा देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, लेकिन साक्षरता दर में प्रदेश 20वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने इसे सरकार की शिक्षा के प्रति घटती प्राथमिकता का परिणाम बताया। उन्होंने एक ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2023-24 में शिक्षा पर राज्य के बजट का हिस्सा 11.9 प्रतिशत से घटकर 8.7 प्रतिशत रह गया, जो शिक्षा क्षेत्र की अनदेखी को दर्शाता है।
सोनीपत की विश्वविद्यालयों की हालत पर चिंता
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि सोनीपत के चारों राज्य विश्वविद्यालय लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप था कि पिछले पांच वर्षों से इन विश्वविद्यालयों को पर्याप्त सरकारी अनुदान नहीं दिया गया। सरकार अनुदान देने के बजाय ऋण उपलब्ध करा रही है, जिससे विश्वविद्यालयों पर कर्ज बढ़ता जा रहा है और शिक्षकों की भर्ती तथा शैक्षणिक विकास प्रभावित हो रहा है।
भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय का किया जिक्र
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, खानपुर में 262 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 124 नियमित शिक्षक कार्यरत हैं। उन्होंने दावा किया कि वित्तीय संकट के चलते कर्मचारियों को पिछले दो महीने से वेतन तक नहीं मिला है और विश्वविद्यालय पर लगभग 519 करोड़ रुपए का कर्ज हो चुका है।
मुरथल विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी
उन्होंने बताया कि दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल में 391 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 134 शिक्षक कार्यरत हैं। उनके अनुसार विश्वविद्यालय पर करीब 465 करोड़ रुपए का सरकारी ऋण है, जिससे संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियां और विकास प्रभावित हो रहे हैं।
अन्य विश्वविद्यालयों की स्थिति भी बताई चिंताजनक
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में 33 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल सात शिक्षक कार्यरत हैं। वहीं राय स्थित खेल विश्वविद्यालय भी वित्तीय संसाधनों और शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वीकृत वित्तीय सहायता का पूरा उपयोग नहीं कर रही, जबकि विश्वविद्यालयों का कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है।
नेशनल एजुकेशन सिटी के विकास पर भी उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि सोनीपत की एजुकेशन सिटी का विकास भी अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाया है। वर्ष 2024-25 में इसका नाम बदलकर नेशनल एजुकेशन सिटी कर दिया गया, लेकिन पिछले दो वर्षों में विकास कार्यों की गति बेहद धीमी रही। उन्होंने कहा कि केवल नाम बदलने से शिक्षा का विकास नहीं होगा, बल्कि बुनियादी सुविधाओं और निवेश की जरूरत है।
40 हजार शिक्षकों के पद खाली होने का दावा
प्रो. सम्पत सिंह ने आरोप लगाया कि हरियाणा में 40 हजार से अधिक शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका कहना था कि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के बजाय सरकारी स्कूलों को बंद करने की दिशा में काम कर रही है।
घोटालों और कानून व्यवस्था पर सरकार को घेर
प्रो. सम्पत सिंह ने प्रदेश में सामने आए विभिन्न घोटालों का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े-बड़े मामलों में आज तक दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के मामलों में जिम्मेदार लोगों को सजा नहीं मिल रही, जिससे जनता का विश्वास कमजोर हो रहा है।
राम मंदिर और चोरी की घटनाओं का किया उल्लेख
राम मंदिर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जो सरकार राम मंदिर के नाम पर सत्ता में आई थी, वह अब मंदिरों में हो रही चोरी की घटनाओं पर जवाब देने से बच रही है। उन्होंने दावा किया कि मंदिरों में चोरी की घटनाओं के बाद श्रद्धालुओं की संख्या पर भी असर पड़ा है।
सरकार से की ये प्रमुख मांगें
प्रो. सम्पत सिंह ने मांग की कि प्रदेश के सभी खाली शिक्षक पदों पर जल्द भर्ती की जाए, विश्वविद्यालयों को पर्याप्त सरकारी अनुदान दिया जाए, सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, निजीकरण पर निर्भरता कम की जाए तथा युवाओं के हितों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि मजबूत सरकारी शिक्षा व्यवस्था ही हरियाणा के युवाओं का भविष्य सुरक्षित कर सकती है।
