- दिग्विजय बोले- अर्चना गुप्ता पढ़ी लिखी अनपढ़
हरियाणा भाजपा अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के विशेष वर्ग और खुंटी पर कुर्ते-पायजाम टंगवाने वाले बयान पर बवाल मच गया है। हिसार में खाप प्रतिनिधियों ने अर्चना गुप्ता के बयान की निंदा की। कंडेला खाप की महिला प्रधान सुदेश कंडेला अर्चना पर भड़क गईं। उन्होंने कहा…वो बोलणा सीख ले। उसे बोलण का बेरा ना। जिस विशेष जाति का नाम लिया है, उसका नाम बी बता दे। जल्दी उसे जवाब देंगे। भाजपा की सरकार एक जाति पै निशाना साध री। वहीं, पूनिया खाप के प्रधान शमशेर पूनिया ने कहा, अर्चना गुप्ता के परिवार ने सदा ही हमारा शोषण किया है। सर छोटू राम ने अंग्रेजों के टाइम में इनकी ताखड़ी खूंटी पर टंगवा दी थी। हम जात-पात और धर्म के नाम पर लड़ने वाले लोग नहीं है। संविधान को मानते हैं। ये समाज में जहर घोलकर राज कर रहे हैं। उधर, जजपा नेता दिग्विजय चौटाला ने कहा कि यह रूढ़ीवादी मानसिकता के लोग हैं। अर्चना गुप्ता पढ़ी लिखी अनपढ़ हैं।
अर्चना गुप्ता ने पानीपत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, एक विशेष वर्ग सुबह-सुबह कलफ लगाकर कुर्ते-पायजामे पहनकर लघु सचिवालय में पहुंच जाते थे। अब उनस सबके कुर्ते पयजामे खुंटी पर टंगे हुए हैं।
पहले जानिए, अर्चना गुप्ता का विशेष वर्ग वाला बयान
- बिचौलियों और दलालों का वर्चस्व: पानीपत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंगलवार को डॉ. अर्चना गुप्ता ने कहा कि पिछली हुड्डा व इनेलो सरकारों में एक विशेष वर्ग सक्रिय था, जो सुबह-सुबह कलफ लगे कुर्ते-पायजामे पहनकर लघु सचिवालय पहुंच जाता था। ये लोग बिचौलियों, दलालों और ‘सेटिंग’ कराने का काम करते थे।
- भाजपा आई तो पारदर्शिता लाई: अर्चना गुप्ता ने कहा कि पूर्व सरकारों के दौरान सरकारी नौकरियों में भारी भ्रष्टाचार था। लोगों को नौकरी पाने के लिए अपनी जमीन, घर या मां के जेवर तक बेचने पड़ते थे या फिर केवल रिश्तेदारों और सिफारिश वालों को ही नौकरियां मिलती थीं।
- कुर्ते-पायजामे खूंटियों पर टंग गए: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि हमारी सरकार आने के बाद भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता लाई गई। बिचौलियों की दुकानदारी पूरी तरह बंद हो चुकी है और अब उनके कुर्ते-पजामे खूंटियों पर टंग गए हैं। किसी बिचौलिये या ‘विशेष वर्ग’ के हस्तक्षेप का सवाल ही नहीं उठता।
दिग्विजय चौटाला ने अर्चना गुप्ता को पढ़ी लिखी अनपढ़ बताया
जननायक जनता पार्टी (जजपा) नेता दिग्विजय चौटाला ने कहा कि यह रूढ़ीवादी मानसिकता के लोग हैं। इनको डॉक्टर की उपाधि कहां से मिली है इनको पूछना चाहिए। डॉक्टर को तो हम भगवान का रूप मानते हैं। डॉक्टर की धर्म और जाति नहीं होती। डॉ. अर्चना गुप्ता विशेष वर्ग की बात करती हैं। विशेष वर्ग की बात से राजनीति नहीं होती, 36 बिरादरी से होती है। ये अपने आपको डॉक्टर कहती हैं मगर यह पढ़ी लिखी अनपढ़ हैं।
हरियाणा प्रदेश के लाखों करोड़ों युवाओं से कहूंगा इनके बहकावे में मत आ जाना। ये राजकुमार सैनी और रामचंद्र जांगड़ा का दूसरा रूप हैं। इससे बचकर रहना, यह हरियाणा को फिर से आग लगाना चाहती है। यह हरियाणा को बांटना चाहती है। खूंटी पर किसके कपड़े टंगेंगे यह तो वक्त बताएगा। मगर अर्चना गुप्ता को अपनी सोच और वाणी में सुधार लाने की जरूरत है। मैं अर्चना गुप्ता से कहना चाहता हूं कि पद तो आते-जाते रहते हैं मगर लोगों के दिलों में कमाई हुई जगह खत्म हो जाए तो वापस आनी मुश्किल हो जाती है।
अपने बयान पर घिरने के बाद दी सफाई
अर्चना गुप्ता ने बयान देने के बाद विवाद बढ़ता देख 11 अगस्त को स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि कहा कि विशेष वर्ग से उनका मतलब किसी जाति या समुदाय से नहीं था। उनका इशारा उन बिचौलियों और कथित दलालों की ओर था, जो पिछली सरकारों में सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर सचिवालय पहुंचते थे और व्यवस्था में प्रभाव रखते थे।
उन्होंने कहा कि चाहे हुड्डा सरकार रही हो या इनेलो की सरकार, ऐसे मध्यस्थों के माध्यम से सिस्टम बनाया जाता था और नौकरियां दिलाने के नाम पर लोगों से पैसा लिया जाता था। भाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि अब ऐसे लोगों का दौर समाप्त हो चुका है और उनका ‘कुर्ता-पायजामा खूंटी पर टंग चुका है’।
अब पढ़िए…नेताओं ने अर्चना गुप्ता के बयान पर क्या कहा
- बीरेंद्र बोले- सलीका सीखना चाहिए: बुधवार को कांग्रेस की आगाज-ए-दोस्ती अमन यात्रा कार्यक्रम में करनाल पहुंचे कांग्रेस नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा- सबसे पहले बोलने का सलीका सीखना चाहिए। अर्चना गुप्ता यह बात दूसरे तरीके से भी कह सकती थी। जिस प्रदेश या क्षेत्र में किसी समुदाय की संख्या अधिक हो, उसके खिलाफ दूसरे लोगों को खड़ा करने का प्रयास गलत है।
- दिग्विजय बोले- कुर्ता पयजामा हरियाणा की शान: दिग्विजय चौटाला ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा- कुर्ता- पयजामा खूंटियों पर टंगा नहीं रहता। यह हरियाणा की शान है। बुजुर्गों के भाईचारे और युवाओं के संस्कार की पहचान है। ये 36 बिरादरियों का पारंपारिक पहनावा है। ये सिर्फ पोशाक नहीं, हरियाणवी स्वाभिमान की पहचान है।
