पंजाब विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में हरियाणा की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। पंजाब विश्वविद्यालय छात्र राजनीति से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान राजनीतिक गतिविधियों के बीच भूपेंद्र बूरा का नाम प्रमुखता से सामने आया है। भूपेंद्र बूरा ने करीब 26 साल पहले वर्ष 2000 में पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संघ के हरियाणा से पहले अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल किया था। अब उन्हें हरियाणा से बनने वाले 5वें अध्यक्ष के रूप में भी याद किया जा रहा है।
भूपेंद्र बूरा मूल रूप से जींद जिले के उचाना क्षेत्र के गांव पाना निवासी बताए गए हैं। छात्र राजनीति में उनका सफर उस समय शुरू हुआ, जब पंजाब विश्वविद्यालय में हरियाणा के विद्यार्थियों की राजनीतिक भागीदारी लगातार बढ़ रही थी। उन्होंने छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया और विश्वविद्यालय की राजनीति में हरियाणा की मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
1997 में भी लड़ा था अध्यक्ष पद का चुनाव
भूपेंद्र बूरा ने वर्ष 1997 में पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ा था। उस चुनाव में कुल 27 अध्यक्ष पद के उम्मीदवार मैदान में थे और बूरा पांचवें स्थान पर रहे थे। इसके बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक सक्रियता जारी रखी और वर्ष 2000 में अध्यक्ष पद हासिल किया।
उनकी राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि उन्होंने हरियाणा से आने वाले विद्यार्थियों के बीच संगठनात्मक आधार मजबूत करने पर जोर दिया। उस दौर में पंजाब विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में हरियाणा के विद्यार्थियों की भागीदारी को लेकर अलग तरह की चुनौतियां थीं। बूरा ने इन परिस्थितियों के बीच अपनी पहचान बनाई।
2021 से विद्यार्थी परिषद से जुड़े हैं अंकित
अंकित विधान वर्ष 2021 से विद्यार्थी परिषद से जुड़े हुए हैं और विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों के हित से जुड़े मुद्दों को उठाने के साथ-साथ विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने छात्र समस्याओं को रखने का प्रयास किया। फीस, छात्र सुविधाएं, सुरक्षा, डिजिटल सुविधाएं और विद्यार्थियों के कल्याण जैसे विषय छात्र राजनीति में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
हरियाणा के पांच अध्यक्षों में तीन जींद से
इस बार पंजाब विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में हरियाणा की भागीदारी की खास बात यह बताई गई है कि हरियाणा से अध्यक्ष पद के पांच दावेदारों में तीन का संबंध जींद जिले से है। इससे यह संकेत मिलता है कि जींद लंबे समय से पंजाब विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है।
भूपेंद्र बूरा के अलावा दिव्यांशु बुद्धिराजा, आयुष खटकड़, अनुराग दलाल और अंकित विधान जैसे नाम भी छात्र राजनीति के संदर्भ में सामने आए हैं। इनमें अलग-अलग राजनीतिक और छात्र संगठनों से जुड़े उम्मीदवार शामिल हैं।
छात्र राजनीति को लेकर बदल रही है तस्वीर
पंजाब विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति केवल चुनावी मुकाबले तक सीमित नहीं रही है। विद्यार्थियों के लिए बेहतर सुविधाएं, फीस, छात्रावास, सुरक्षा, डिजिटल सेवाएं, स्वच्छता और विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े मुद्दे लंबे समय से छात्र संगठनों के एजेंडे में रहे हैं।
समाचार में यह भी कहा गया है कि छात्र राजनीति का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने प्रभावी ढंग से आवाज उठाना भी उतना ही जरूरी है।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकले नेताओं की भूमिका
भूपेंद्र बूरा का उदाहरण यह भी दिखाता है कि पंजाब विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। जींद जैसे जिले से निकलकर पंजाब विश्वविद्यालय की राजनीति में शीर्ष पद तक पहुंचना उस समय बड़ी उपलब्धि माना गया था। आज 26 साल बाद जब हरियाणा से आने वाले कई विद्यार्थी और छात्र नेता फिर अध्यक्ष पद की दौड़ में दिखाई दे रहे हैं, तो भूपेंद्र बूरा की पुरानी राजनीतिक यात्रा को भी याद किया जा रहा है।
