• नेताओं-कार्यकर्ताओं से लेगी फीडबैक, यशोमति ठाकुर बोलीं- चुनौतियां ठीक करेंगे

सिरसा कांग्रेस पार्टी संगठन में गुटबाजी को देखते हुए ऑब्जर्वर की कमेटी आज सिरसा पहुंची। इस दौरान सभी विधायकों, कांग्रेस समर्थक एवं सीनियर नेताओं और जिलाध्यक्ष से फीडबैक लिया जाएगा। ये कमेटी आज से ही हलका वाइज एरिया में दौरा करेगी और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेगी।

सीडब्ल्यूसी मेंबर एवं पूर्व मंत्री यशोमति ठाकुर ने मीडिया को दिए बयान में कहा, कांग्रेस के जो नेता व वर्कर है, उनकी बात सुनने के लिए आए हैं। संगठन सृजन में हम पूरे जिले में रहेंगे। उनसे बात करेंगे और जानेंगे कि पार्टी को किस तरह मजबूत किया जाए। सिरसा में विधानसभा-लोकसभा में अच्छा रिजल्ट रहा है, 2 विधानसभा में हार का अंतर बहुत कम रहा है।

सीनियर नेताओं के साथ वन टू वन होगा और सभी हलकों में जाकर फीडबैक लेंगे या उनको यहां बुला लेंगे। तब तक यहीं रहेंगे। कुछ चुनौतियां है, उनको ठीक करेंगे। विधायक और जिलाध्यक्ष में गुटबाजी एवं रिव्यू के बाद समाप्त के सवाल पर यशोमति ठाकुर ने कहा कि गुटबाजी हर पार्टी में हैं, ऐसा नहीं है। अनुशासन रखना चाहिए। मन की बात करने आए हैं।

पोस्ट वायरल एवं कंट्रोवर्सी पर यशोमति ने कहा- इसी के लिए हम आए हैं और सबसे बात करेंगे, उसे सुलझाएंगे।

संसद-विधानसभा में धक्का-मुक्की हो रही

पंचायत चुनाव के सवाल पर सीडब्ल्यूसी मेंबर यशोमति ठाकुर ने कहा कि पूरी ताकत के साथ पंचायत चुनाव लड़ेंगे और पूरी तैयारी है। जन की मन की बात ज्यादा महत्वपूर्ण है, उसी को जानने यहां आए हैं। सिरसा जिले के विधायक ग्राउंड स्तर पर लोगों की लड़ाई मजबूती से लड़ रहे हैं और उनकी आवाज सदन में उठाई है। संगठन को मजबूत करना ही मकसद है।

पूर्व मंत्री यशोमति ने कहा- संविधान को मानना चाहिए। जो दोषी है, उसे दोषी नहीं मान रहे। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर एफआईआर कर रहे हैं। वे डरते हैं और सच के साथ लड़ेंगे। संसद और विधानसभा में भी धक्का-मुक्की होती है। जब कांग्रेस सत्ता में थी तो विपक्ष के लोग उनसे मिलकर डिवलेपमेंट के काम करते थे। विपक्ष को पूरा हक दिया जाता था, पर बीजेपी सरकार में ऐसा नहीं है।

हमें ही विधानसभा नहीं जाने दिया : विधायक हंस

विधायक देवेंद्र हंस मीडिया से कहा कि लोकतंत्र में सभी को प्रदर्शन की आजादी है। जनता ने हमें आवाज उठाने को भेजा है। हमें ही विधानसभा में जाने नहीं दिया जा रहा। लोगों के लिए हमने काले कपड़े डाले थे और उनकी मांगों के लिए प्रोटेस्ट किया था।

जनता की आवाज दबाई जाएगी और हल नहीं होगा सदन कैसे चलने दे : विधायक हंस

इनेलो द्वारा कांग्रेस पर विधानसभा न चलने देने एवं प्रदर्शन के आरोप वाले सवाल पर विधायक देवेंद्र हंस ने कहा- पॉजिटिव तौर कहूं कि अगर प्रदेश के जनता की आवाज दबाई जाएगी और उसका हल नहीं होएगा तो सदन चलने देंगे। जैसे हम एचकेआरएन कर्मचारियों का मुद्दा लेकर आए और उस पर चर्चा न हो और हम गुणगान करते हैं कि आपके शासन काल में ये हुआ। ये नहीं देखते कि आपको जनता ने 12 साल दे दिए, आप बताओ, आपने क्या किया है।

विधायक-वर्करों व जिलाध्यक्षों की नाराजगी पर चल रही अटकलें

दरअसल, पिछले कई दिनों से कांग्रेस में कुछ जिलाध्यक्षों के प्रति विधायकों एवं वर्करों की नाराजगी पर उनके बदलने की अटकलें चल रही है। इस पर पार्टी संगठन मीटिंग में कई बार चर्चा हुई। गत मीटिंग के दौरान कुछ जिलाध्यक्षों ने भी खुलकर विचार रखें कि अगर पार्टी को लगता है कि वे गलत है तो इसके लिए कमेटी बनाकर जांच कराए। उसमें सबका पता चल जाएगा।

ऐसे में पार्टी हाईकमान ने सभी जिलों में सीडब्ल्यूसी सदस्यों की टीम भेजी है, जो फीडबैक लेकर रिपोर्ट बनाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर ही जिलाध्यक्षकों के बदलने पर विचार होगा। सिरसा सहित बाकी जिलाध्यक्षों का एक साल से ज्यादा का कार्यकाल पूरा हो गया है तो रिव्यू आवश्यक है। गुटबाजी रोकने को सभी से रिव्यू लिया जाएगा।

पार्टी ने इसे संगठन सर्जन अभियान बताया

पार्टी ने इसे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा चलाए गए संगठन सर्जन अभियान बताया है। इसी के तहत सीडब्ल्यूसी सदस्य यशोमति ठाकुर और प्रदेश प्रवेक्षक गुहला-चीका विधायक विधायक देवेंद्र हंस, गायत्री देवी, मनोज राठी ने बुधवार दोपहर को कांग्रेस भवन सिरसा में पहले संगठनात्मक गतिविधियों को सांझा करते हुए मीटिंग ली और इसके बाद मीडिया से रूबरू हुए।

संगठन में ये बड़ी समस्या, जो चुनौती बनी

संगठन में सबसे बड़ी समस्या ये आ रही है कि जब पार्टी का कोई कार्यक्रम या प्रदर्शन होता है तो सब एक साथ नहीं आते। जिलाध्यक्षों के लिए यहीं सबसे बड़ी चुनौती है। सिरसा में भी ऐसे ही हालात है। पिछले दिनों हुए प्रदर्शन और पार्टी कार्यक्रम में सांसद व विधायक अलग और जिलाध्यक्ष अपना अलग कार्यक्रम रखते हैं। इसमें वर्करों के उनके कार्यक्रम में पहुंच पाना चुनौती हो जाता है।

सिरसा में ये बदलाव

सिरसा में पहले जिलाध्यक्ष संतोष बेनीवाल अक्सर सांसद कुमारी सैलजा के साथ नजर आती थी और विधायक शीशपाल कहरवाला के अलावा बहुत कम दिखते थे। अब ऐसा है कि जिलाध्यक्ष संतोष पार्टी के अपने कार्यक्रम करती है, परंतु सांसद के साथ नहीं दिखती और तीनों विधायक व सीनियर नेता सांसद कुमारी सैलजा के साथ हो गए हैं।

ऐसे शुरू हुआ विवाद

पहले सिरसा विधायक गोकुल सेतिया और पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह में कंट्रोवर्सी चल रही थी और एक-दूसरे के खिलाफ विरोधी बयानबाजी चली। सिरसा में संकल्प यात्रा के दौरान जिलाध्यक्ष संतोष पार्टी के नाते बृजेंद्र सिंह से जा मिली और यात्रा में शामिल हुई। इसके बाद जिलाध्यक्ष से सांसद कुमारी सैलजा ने दूरी बना ली।

पिछले दिनों रानियां दौरे के दौरान जिलाध्यक्ष संतोष ने भी विवादित बयान दिया कि मुझे जिलाध्यक्ष बनाने में सांसद सैलजा का कोई रोल नहीं है। पार्टी ने उसे बनाया है और वह बिना नेताओं के पार्टी के लिए काम कर रही है। इस बयान के बाद हुड्‌डा और सैलजा गुट से विधायक और सांसद एक हो गए और जिलाध्यक्ष से किनारा कर लिया।

तब से जिलाध्यक्ष के प्रति रोष है और ये बातें पार्टी संगठन तक जा पहुंची। इस पर पार्टी संगठन में कई बार गुटबाजी पर चर्चा भी हुई है, जिसके बाद ये कमेटी बनाई गई।