- कुलदीप शर्मा का दीपेंद्र हुड्डा पर फिर जुबानी हमला
हरियाणा कांग्रेस में नेताओं के बीच मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आए हैं। हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता कुलदीप शर्मा ने नाम लिए बिना रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा पर निशाना साधते हुए कहा कि मंडियों में किसानों का धान और बाजरा कम दामों में बिक रहा है। लेकिन वो किसानों के बीच जाकर उनके हकों की लड़ाई लड़ने के बजाय मैरिज पैलेसों में रैलियां कर रहे हैं।
वहां उनके समर्थन में सीएम बनने के नारे लगाए जा रहे हैं। शर्मा ने कहा कि सीएम जनता बनाएगी। पहले कांग्रेस को सरकार में लाना होगा और इसके लिए किसानों व मजदूरों की लड़ाई लड़नी होगी।
कुलदीप शर्मा ने कहा कि किसान और आढ़ती परेशान हैं, लेकिन वे (दीपेंद्र हुड्डा) वहां नहीं पहुंच रहे। इसके बजाय लोगों के कंधों पर सवार होकर ‘आ गए सीएम’ के नारे लगवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि कुछ लोग दीपेंद्र हुड्डा को ‘सीएम साहब’ कहना क्यों नहीं छोड़ रहे।
उन्होंने कहा कि 12 साल पहले उनके पिता सीएम थे, अब नहीं हैं और सभी नेता बराबर हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को किसानों और मजदूरों की लड़ाई लड़नी चाहिए और पार्टी को सत्ता में लाना चाहिए। इसके बाद ही सीएम बनने की बात होनी चाहिए।
खड़गे को लिखे पत्र में नारे बंद कराने की मांग
कुलदीप शर्मा ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि सीएम पद की लड़ाई और सीएम के नारों की वजह से कांग्रेस पिछली बार चुनाव हारी। अगर उस समय पार्टी के हित को प्राथमिकता देकर कांग्रेस की बात की जाती तो पार्टी जीत सकती थी।
शर्मा ने खड़गे से हरियाणा में इस तरह के नारों और सीएम पद की व्यक्तिगत दावेदारी पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंजाब में भी ऐसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बदलाव किया गया था। जरूरत पड़े तो प्रदेश अध्यक्ष या प्रभारी बदले जाएं, लेकिन पार्टी में बदलाव होना चाहिए। उनके अनुसार जब तक इस तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक कांग्रेस को नुकसान होता रहेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अभी से स्वयं को सीएम मानकर घूम रहे हैं और उनके समर्थन में नारे लग रहे हैं। शर्मा ने कहा कि पार्टी नेतृत्व को इस पर नियंत्रण करना जरूरी है।
कुंजपुरा कार्यक्रम में लगे थे भावी सीएम के नारे
हाल ही में कुंजपुरा में कांग्रेस का एक कार्यक्रम हुआ था। इसमें दीपेंद्र हुड्डा पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान कार्यकर्ताओं ने उन्हें कंधों पर उठा लिया था और उनके समर्थन में ‘भावी सीएम’ के नारे लगाए गए थे।
इस पर दीपेंद्र हुड्डा से सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा था कि यह लोगों की भावना है और लोग क्या नारा लगा रहे हैं, यह उनके हाथ में नहीं है।
पहले पत्र में सीडब्ल्यूसी से हटाने की मांग की थी
कुलदीप शर्मा इससे पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिख चुके हैं। उस पत्र में उन्होंने दीपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस कार्यसमिति से हटाने की मांग की थी। शर्मा ने पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को लेकर दीपेंद्र हुड्डा के बयान पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि इस बयान से सिख समुदाय के एक वर्ग में नाराजगी पैदा हुई है और इसका राजनीतिक नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ सकता है।
शर्मा ने पत्र में कहा था कि सज्जन कुमार के निधन के बाद दीपेंद्र हुड्डा की ओर से उनके बारे में सकारात्मक टिप्पणी और उन्हें सम्मान दिए जाने की बात कही गई। इससे सिख समुदाय का एक वर्ग आहत हुआ। उन्होंने दावा किया था कि हरियाणा और पंजाब के कुछ सिख मित्रों ने इस मुद्दे पर उनसे नाराजगी जाहिर की है।
पंजाब चुनाव को लेकर भी जताई थी चिंता
पहले पत्र में कुलदीप शर्मा ने कांग्रेस के लिए राजनीतिक खतरे की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि किसान आंदोलन के बाद देश में सिख समुदाय का बड़ा वर्ग कांग्रेस के साथ आया था, लेकिन ऐसे बयानों से समुदाय में कांग्रेस को समर्थन देने को लेकर दोबारा विचार की स्थिति बन सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया था कि विपक्षी दल इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। शर्मा ने कहा था कि दीपेंद्र हुड्डा का बयान पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के हितों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
उन्होंने कांग्रेस से सज्जन कुमार से पूरी तरह दूरी बनाए रखने की मांग की थी। साथ ही कहा था कि जनता के बीच दोबारा उभरे पुराने घावों को भरने के लिए दीपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस कार्यसमिति से हटाया जाना चाहिए। इस तरह कुलदीप शर्मा के ताजा पत्र और बयानों से हरियाणा कांग्रेस में सीएम पद को लेकर चल रही खींचतान और पार्टी के भीतर मतभेद एक बार फिर सार्वजनिक हो गए हैं।
