- BJP के पोस्टर-बैनर गायब, राजनीतिक विश्लेषक बोलें- इसकी 3 वजहें
हरियाणा की राजनीति में ‘किंगमेकर’ कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल के परिवार और बीजेपी के रिश्तों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हिसार, सिरसा, जींद और कैथल जैसे जाट-बिश्नोई बहुल इलाकों में कुलदीप बिश्नोई का दौरा जारी है।
इस दौरों पर बीजेपी आलाकमान की नजरें भी गड़ी हैं। वजह है बिश्नोई के किसी भी मंच, बैनर या पोस्टरों में बीजेपी का नाम न होना। बिना पार्टी के झंडे और सिंबल के हो रहीं इन रैलियों और बंद कमरे की बैठकों को राजनीतिक जानकार कुलदीप बिश्नोई की प्रेशर पॉलिटिक्स मान रहे हैं।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक डॉ. सतीश त्यागी का कहना है कि ‘बिश्नोई भले ही कह रहे हों कि वे बीजेपी में हैं, लेकिन अपनी जेब में मुख्यमंत्री चेहरे का कार्ड और बिना सिंबल का अभियान यह साफ इशारा करता है कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ा पक रहा है। वे इसके पीछे की तीन वजहें भी बताते हैं।
3 बड़े झटके, जिनसे बिगड़ा सियासी गणित
पारंपरिक गढ़ ढहा: वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक डॉ. सतीश त्यागी बताते हैं कि 2024 के विधानसभा चुनाव में बिश्नोई परिवार के सबसे सुरक्षित किले ‘आदमपुर’ से उनके बेटे भव्य बिश्नोई चुनाव हार गए।
टिकट काटने से नाराजगी: हिसार से लोकसभा टिकट का दावा खारिज होना और फिर राज्यसभा न भेजे जाने से कुलदीप खेमा खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है।
अपनों का साथ छूटा: 12 साल तक अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के संरक्षक रहे कुलदीप को विवादों के चलते पद छोड़ना पड़ा। वहीं उनके सबसे खास सहयोगी अजय प्रताप सिंह (बब्लू खटाना) दुष्यंत चौटाला की JJP में शामिल हो गए।
CM सैनी ने की थी पैचअप की कोशिश
हाल ही में बिश्नोई ने बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडोली और राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा के बयानों पर खुलेआम नाराजगी जताई थी। मामला इतना बढ़ा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को खुद आदमपुर आकर भजनलाल जयंती के कार्यक्रम में शामिल होना पड़ा ताकि डैमेज कंट्रोल किया जा सके।
कुलदीप के पास ये हैं 3 बड़े विकल्प?
विकल्प 1 (निर्दलीय/अलग राह): अपने कोर बिश्नोई वोटबैंक को यह संदेश देना कि वे किसी पार्टी के मोहताज नहीं हैं और स्वतंत्र पहचान बनाए रख सकते हैं।
विकल्प 2 (बीजेपी में बड़ा पद): बिना झंडे के जनसभाएं करके बीजेपी नेतृत्व को अपनी ताकत दिखाना, ताकि संगठन या सरकार में कोई सम्मानजनक भूमिका मिल सके।
विकल्प 3 (पुराने घर की ओर रूख): बिश्नोई का राजनीतिक इतिहास दल-बदल का रहा है (कांग्रेस से HJC, फिर BSP-BJP गठबंधन, फिर कांग्रेस और 2022 में बीजेपी)। विश्लेषकों का मानना है कि वे भविष्य के लिए सभी राजनीतिक रास्ते खुले रख रहे हैं।
18 साल से सरकार में पद से दूर बिश्नोई परिवार
इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली हार से बिश्नोई परिवार एक बार फिर सत्ता सुख से दूर हो गया है। अगर रणजीत चौटाला चुनाव जीतते तो उनका बिजली मंत्री का पद भव्य को मिल सकता था। मगर रणजीत की हार ने भव्य बिश्नोई को मंत्री पद से दूर कर दिया।
हरियाणा में बिश्नोई परिवार 18 साल से सरकार में पद से बाहर है। 2005 से 2008 तक भजनलाल के बड़े बेटे चंद्रमोहन बिश्नोई हरियाणा के डिप्टी सीएम पद पर रहे। इसके बाद निजी कारणों से उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद से आज तक बिश्नोई परिवार को सरकार में कोई पद नहीं मिला है।
2005 में भजनलाल की अगुवाई में कांग्रेस हरियाणा में पूर्ण बहुमत से आई मगर भजनलाल को मुख्यमंत्री ना बनाकर कांग्रेस ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री की कुर्सी दे दी। डैमेज कंट्रोल के लिए कांग्रेस ने चंद्रमोहन को डिप्टी सीएम का पद दे दिया था।
