- सरकार सत्ता का दुरुपयोग करके प्रचार के जरिए लोगों को बहकाने का काम कर रही है- गोगी
करनाल जिले के असंध में आज प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस के पूर्व विधायक शमशेर सिंह गोगी ने कहा कि अब वे अपनी बातचीत राम-राम कहकर शुरू करते हैं, तो क्या अब भाजपा को इसमें भी दिक्कत होगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा वालों ने राम जी का ठेका ले रखा है, जबकि राम जी कण-कण में हैं, क्या भाजपा वाले भी कण-कण में हैं। उन्होंने कहा कि आस्था किसी एक दल की जागीर नहीं हो सकती।
मनरेगा का इतिहास और विरोध का आरोप
गोगी ने कहा कि मनरेगा रोजगार के लिए बना कानून था, जिसे पीएम सरदार मनमोहन सिंह की सरकार के समय पास किया गया था। उसी दिन से भाजपा ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। बाद में जब यह योजना बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गई और जनता में इसकी चर्चा होने लगी, तो 2014 में नरेंद्र मोदी चाहकर भी इसे वापस नहीं ले सके। उन्होंने कहा कि अब शायद मोदी के जाने का समय आ गया है, इसलिए जाते-जाते मनरेगा के स्वरूप में बदलाव कर दिया गया।
नाम नहीं, भावना का सवाल
उन्होंने कहा कि इसमें नाम का कोई मुद्दा नहीं है, नाम कुछ भी हो सकता है, लेकिन अंदर की भावना शुद्ध होनी चाहिए। पहले यह कानून लोगों को रोजगार का अधिकार देता था, अब इसे खैरात में बदल दिया गया है। अधिकार खत्म करके लोगों को सरकार पर निर्भर बना दिया गया है, जो गरीबों के सम्मान के खिलाफ है।
केंद्र से आने वाला पैसा राज्य पर बोझ
गोगी ने कहा कि पहले मनरेगा का पूरा पैसा केंद्र सरकार से आता था और राज्य सरकार केवल कागजी रिकॉर्ड का खर्च उठाती थी, जो करीब 10 प्रतिशत होता था। अब व्यवस्था बदलकर राज्य सरकार के हिस्से में 40 प्रतिशत खर्च डाल दिया गया है। अधिकार भी खत्म कर दिया गया और ऊपर से राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है।
फेडरल सिस्टम खत्म करने का आरोप
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को पहले ही पंगु बनाया जा चुका है। पूरा फेडरल सिस्टम खत्म करने का काम फासीवाद सोच वाली सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि जब राज्यों के पास फंड नहीं होगा, तो वे न पेंशन दे पाएंगे, न समय पर तनख्वाह दे पाएंगे और न ही नई नौकरियां दे सकेंगे।
गोगी ने कहा कि राज्य सरकार बुजुर्गों की पेंशन तक समय पर नहीं दे पा रही है, क्योंकि फंड रुका हुआ है। कर्मचारियों की तनख्वाह में भी दिक्कतें हैं। नई भर्तियां इसलिए नहीं हो पा रहीं, क्योंकि राज्य के पास संसाधन नहीं बचे हैं। उन्होंने कहा कि यह हालात जानबूझकर पैदा किए जा रहे हैं।
ओपीएस पर खट्टर के बयान पर सवाल
ओपीएस के मुद्दे पर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि खट्टर ने कहा था कि अगर ओपीएस लागू हो गया, तो राज्य सरकार का दिवालिया निकल जाएगा। गोगी ने कहा कि देश पिछले 78 साल से चल रहा है, आज तक तो दिवालिया नहीं निकला, क्या खट्टर साहब के कहने से दिवालिया निकल जाएगा।
कृषि कानूनों से जोड़कर देखा फैसला
गोगी ने कहा कि पहले जो तीन कृषि कानून लाए गए थे, उनका मकसद भी यही था कि किसान को कमजोर करके उसे मजदूर में बदला जाए। जब वे कानून लागू नहीं हो पाए, तो अब मनरेगा को कमजोर करके गरीब आदमी पर हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मनरेगा में सभी जातियों के लोग काम करते हैं, लेकिन दलित समाज के लोग भी बड़ी संख्या में इस पर निर्भर हैं। इस बदलाव से सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं वर्गों को होगा।
गांव-गांव जाकर विरोध का ऐलान
गोगी ने कहा कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को बताएंगे कि मनरेगा कैसे खत्म किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सत्ता का दुरुपयोग करके प्रचार के जरिए लोगों को बहकाने का काम कर रही है, लेकिन सच छुपाया नहीं जा सकता।
